पाकिस्तान की टेस्ट क्रिकेट टीम के हालिया निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर पूर्व कप्तान अज़हर अली ने देश के घरेलू क्रिकेट ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अज़हर अली के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान की लगातार हो रही गिरावट का मुख्य कारण डिपार्टमेंटल क्रिकेट का कमजोर होना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस तंत्र को तुरंत मजबूत नहीं किया गया, तो पाकिस्तान में क्रिकेट व्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो सकती है। 9 टेस्ट और 31 वनडे मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व कप्तान ने डिपार्टमेंटल टीमों को खिलाड़ियों को तराशने वाली मुख्य नर्सरी करार दिया है।
डिपार्टमेंटल क्रिकेट का खत्म होना और पीसीबी के फैसले
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) द्वारा हाल के समय में लिए गए निर्णयों पर चिंता जताते हुए अज़हर अली ने कहा कि डिपार्टमेंटल क्रिकेट व्यवस्था को बंद करने से खिलाड़ियों के विकास की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस ढांचे को फिर से बहाल करने के प्रयासों को भी बोर्ड की ओर से पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई। पीसीबी ने हाल ही में नए नियमों का पालन न करने के आधार पर वाप्डा और साहिर एसोसिएट्स जैसी टीमों को वर्ष 2026-27 के आगामी घरेलू सीज़न से बाहर कर दिया है। उल्लेख्य है कि वाप्डा पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबे समय तक खेलने वाली प्रमुख टीमों में शामिल रही है।
बार-बार नियम बदलने से बढ़ता अनिश्चितता का माहौल
अज़हर अली ने घरेलू क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में लगातार किए जा रहे बदलावों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल प्रणाली को स्थापित करने के बाद उसे कम से कम कुछ वर्षों का समय देना बेहद आवश्यक होता है। हर साल नियमों और ढांचों में बदलाव करने से पूरी व्यवस्था में अस्थिरता आती है। पूर्व कप्तान के अनुसार, यदि कोई बोर्ड हर वर्ष अपनी नीति बदलता है, तो इसका सीधा मतलब है कि या तो वह पिछले वर्ष गलत था या फिर वह वर्तमान में गलत फैसले ले रहा है।
युवा खिलाड़ियों के लिए वित्तीय सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा
डिपार्टमेंटल क्रिकेट के महत्व को रेखांकित करते हुए अज़हर अली ने बताया कि वे खुद इसी व्यवस्था के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कई अन्य प्रमुख खिलाड़ियों की तरह उनका अपना करियर भी डिपार्टमेंटल टीमों की देन है। जब प्रांतीय या क्षेत्रीय टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को नज़रअंदाज़ कर देते थे, तब भी डिपार्टमेंटल संस्थान खिलाड़ियों को नियमित वेतन प्रदान करते थे। यही वित्तीय सुरक्षा युवा क्रिकेटरों को मुश्किल समय में भी खेल से जोड़े रखने का काम करती थी।
पारिवारिक ज़िम्मेदारियां और क्रिकेट में आर्थिक लाभ की आवश्यकता
पाकिस्तान में क्रिकेट की प्रतिभा और जुनून की कोई कमी नहीं है, लेकिन केवल जुनून के सहारे करियर नहीं बनाया जा सकता। अज़हर अली का मानना है कि वित्तीय सहायता के बिना कई परिवारों के लिए अपने बच्चों को क्रिकेट में करियर बनाने की अनुमति देना संभव नहीं होता। विशेष रूप से उन युवा खिलाड़ियों के लिए, जिन पर अपने परिवारों के पालन-पोषण का आर्थिक दायित्व होता है, क्रिकेट से निश्चित आय मिलना अनिवार्य है। यदि खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता नहीं मिलेगी, तो देश में क्रिकेट का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।



















