सीकर के प्रसिद्ध खाटूधाम में बाबा श्याम के दो दिवसीय मासिक मेले की शुरुआत हो चुकी है। पुत्रदा एकादशी के इस पावन अवसर पर श्री श्याम मंदिर कमेटी और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर के कपाट आज दोपहर और रात के समय बंद नहीं रहेंगे और भक्तों के दर्शन के लिए लगातार खुले रहेंगे। एकादशी मेले की विशेष श्रृंगार आरती के दौरान कोलकाता और बेंगलुरु से मंगवाए गए दुर्लभ फूलों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट्स का उपयोग कर बाबा श्याम का मनमोहक और अलौकिक श्रृंगार किया गया है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मौसम की गर्मी को देखते हुए श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिसके तहत मंदिर परिसर में लगातार पानी और गुलाब जल का छिड़काव किया जा रहा है जिससे आने वाले भक्तों को ठंडक मिल सके। यह दो दिवसीय मेला कल द्वादशी के दिन बाबा श्याम की शयन आरती के बाद संपन्न होगा। श्री श्याम मंदिर कमेटी के अनुसार, इस बार श्रावण मास की पवित्र पुत्रदा एकादशी और रविवार का अद्भुत संयोग बनने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। सुबह से ही रींगस से पदयात्रा करते हुए खाटूधाम पहुंचने वाले भक्तों का तांता लगा हुआ है और लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है।
प्रशासन और पुलिस बल की तैनाती
भारी भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। डीएसपी राजेश कुमार जांगिड़ और थानाधिकारी इन्द्राज मरोडिया के नेतृत्व में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं, जिसमें 650 से अधिक पुलिसकर्मियों और जवानों का जाप्ता तैनात किया गया है। इस सुरक्षा दस्ते में पुलिसकर्मियों के अलावा होमगार्ड्स, आरएसी के जवान और मंदिर के सेवादार शामिल हैं जो व्यवस्था को सुचारू रूप से चला रहे हैं। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने और भीड़ पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
एकादशी मेले का धार्मिक महत्व
श्यामा भक्तों के लिए एकादशी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। खाटूश्याम जी मंदिर में प्रत्येक महीने एकादशी और द्वादशी के अवसर पर दो दिवसीय मासिक मेले का आयोजन होता है, जिसमें बाबा श्याम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उनका भव्य श्रृंगार किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के पवित्र दिन बाबा श्याम के दर्शन मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यही कारण है कि मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर मंदिर के कपाट चौबीसों घंटे खुले रहते हैं और केवल श्रृंगार के निर्धारित समय पर ही इन्हें कुछ देर के लिए बंद किया जाता है।
बाबा श्याम की पौराणिक कथा
बाबा श्याम को मुख्य रूप से हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही अवतार माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का वेश धारण कर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया था। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश भगवान कृष्ण को दान कर दिया था। उनकी इस महान परीक्षा से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे संसार में हारे हुए लोगों के सबसे बड़े सहारे बनेंगे। तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के रूप में पूजे जाते हैं।



















