श्रीलंका और भारत के बीच खेले गए मुकाबले में मेहमान टीम जीत की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही थी। कोलंबो स्थित प्रसिद्ध सिंहली स्पोर्ट्स क्लब ग्राउंड पर जब श्रीलंकाई टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा और दूसरी पारी में उसके छह विकेट बहुत सस्ते में गिर गए, तब भारतीय टीम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। हालांकि, निचले-मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने उतरे एक युवा और छोटे कद के बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 22 गज की पिच पर मुकाबला पूरी तरह से पलट दिया। सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए सोनल दिनुषा ने अपने शानदार फुटवर्क और तकनीक के दम पर मैच का पासा पलट दिया।
संकटमोचक बनकर उभरे सोनल दिनुषा, हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि
श्रीलंकाई क्रिकेट लंबे समय से एक ऐसे भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाज की तलाश में था, जो तेज और स्पिन दोनों तरह की गेंदों का सामना डटकर कर सके। सोनल दिनुषा ने न केवल अपनी टीम को निश्चित दिख रही हार से बाहर निकाला, बल्कि दोनों पारियों में बैक-टू-बैक शतक जड़कर श्रीलंका के सबसे चुनिंदा क्रिकेट दिग्गजों के विशेष क्लब में अपनी जगह पक्की कर ली। एक ही मुकाबले की दोनों पारियों में तीन अंकों का आंकड़ा छूना किसी भी क्रिकेटर के लिए बहुत बड़ा सपना माना जाता है।
सोनल दिनुषा अब श्रीलंका के क्रिकेट इतिहास में यह मुकाम हासिल करने वाले महज 17वें बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले यह कारनामा केवल कुमार संगकारा, महेला जयवर्धने, अरविंद डी सिल्वा और तिलकरत्ने दिलशान जैसे महान और नामचीन क्रिकेटर ही कर पाए थे। मुश्किल पिच और बेहद दबाव की परिस्थितियों में दिनुषा ने जिस संयम और जुझारूपन का प्रदर्शन किया, उसने चयनकर्ताओं को एक बेहद मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है। उनके पास मैदान के चारों तरफ शॉट्स की विस्तृत रेंज है और वे हमेशा मेरिट के आधार पर गेंद को खेलने पर विश्वास रखते हैं।
सीरीज में जमकर बोला सोनल का बल्ला, 4 पारियों में बनाए 3 शतक
दिनुषा का यह असाधारण प्रदर्शन किसी एक पारी या एक मैच तक सीमित नहीं रहा। पूरी सीरीज के दौरान उन्होंने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ लगातार रन बनाए और श्रृंखला में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में उभरे। गॉल में खेले गए टेस्ट मैच की पहली पारी में सोनल ने शानदार 100 रन बनाए थे, जबकि दूसरी पारी में 84 रनों का अहम योगदान दिया था। इसके बाद कोलंबो मुकाबले की पहली पारी में भी उन्होंने 103 रन ठोके और फिर दूसरी पारी में भी एक और बेहतरीन शतक जड़ दिया।
इस प्रकार उन्होंने चार पारियों में कुल तीन शतक जड़कर अपनी निरंतरता साबित की। आमतौर पर सातवें नंबर पर आकर बल्लेबाजी करना और बड़ी पारियां खेलना आसान काम नहीं माना जाता, लेकिन दिनुषा ने हर मैच में परिस्थितियों के अनुसार अपनी शैली को बदला और टीम के लिए संकटमोचक बने।
स्वीप शॉट का नया कीर्तिमान, जो रूट का रिकॉर्ड छूटा पीछे
सोनल दिनुषा की इस ऐतिहासिक पारी का सबसे प्रमुख आकर्षण उनका स्वीप शॉट रहा। वर्तमान समय के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को स्वीप और रिवर्स स्वीप का सबसे बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है। हालांकि, कोलंबो में दिनुषा ने अपने स्वीप शॉट्स के दम पर जो रूट के प्रभाव को भी पीछे छोड़ दिया। स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने क्रीज का बेहतरीन इस्तेमाल किया और विपक्षी कप्तान की फील्डिंग रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
केवल स्वीप शॉट्स के जरिए सोनल दिनुषा ने कुल 170 रन बटोरे, जो किसी बल्लेबाज द्वारा एक मैच में स्वीप शॉट से बनाए गए रनों का नया रिकॉर्ड है। स्पिन की मददगार पिच पर इस शॉट को अपना सबसे घातक हथियार बनाकर उन्होंने मुकाबला श्रीलंका के हक में मोड़ दिया। खेल के जानकारों का मानना है कि सोनल की यह जुझारू पारी श्रीलंकाई क्रिकेट के पुनरुत्थान में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।



















