EUR/USD में उतार-चढ़ाव जारी रहने के आसार, राबोबैंक का अनुमानऑस्ट्रेलिया में एक ही सरोगेट मां से जन्मे जुड़वां बच्चों के जैविक माता-पिता निकले अलग, कानूनी पेच में उलझी अदालतनेपाल में बाढ़ के भीषण संकट के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू किया राहत अभियान, SDRF और PAC के जवान तैनातकोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने के बाद शुभमन गिल ने फॉलोऑन संघर्ष पर रखी बात, 1-0 से सीरीज पर कब्जाहरियाणा विधानसभा 2024 में युवा प्रतिनिधित्व: 90 सदस्यीय सदन में मात्र 1 जेन-जी विधायककैंसर इलाज में चीनी कंपनी अकेसो का बड़ा दावा, तीसरे चरण के ट्रायल में एस्ट्राजेनेका की इम्फिंजी से अधिक असरदार साबित हुई इवोनसिमैबत्योहारी सीजन से पहले भारतीय टू-व्हीलर बाजार में उछाल, अगस्त की रिटेल बिक्री में दर्ज हुई भारी बढ़ोतरीजब सिल्वर स्क्रीन पर बदले ऑनस्क्रीन रिश्ते, शाहरुख-ऐश्वर्या से लेकर अमिताभ-हेमा तक 7 जोड़ियां जो फिल्मों में प्रेमी भी बनीं और भाई-बहन भीचीन की सैन्य चुनौती के बीच जापान ने टेरा बी1 इंटरसेप्टर को चुना, जानिए कैसे काम करती है एंटी-ड्रोन तकनीकरिपल के एक्सआरपी में फिर तेजी, व्हेल खरीदारी और ईटीएफ इनफ्लो से $1.40 का स्तर पार
महाराष्ट्र में ऑटो और कैब चालकों को मराठी सीखने के लिए मिली बड़ी राहत, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दी एक साल की छूटमहाराष्ट्र
27 अग॰ 2026, 5:38 pm (1 घंटे पहले)· 2

महाराष्ट्र में ऑटो और कैब चालकों को मराठी सीखने के लिए मिली बड़ी राहत, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दी एक साल की छूट

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कम पढ़े-लिखे प्रवासी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने यह निर्णय लिया।

महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले गैर-मराठी चालकों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। सरकार ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए सभी व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि मुंबई सहित राज्य के विभिन्न जिलों में सेवाएं देने वाले कैब और ऑटो चालकों को दैनिक कामकाज के लिए सामान्य मराठी का ज्ञान होना आवश्यक है। हालांकि, चालकों के शैक्षणिक स्तर और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई के बजाय उन्हें भाषा सीखने का अवसर देने का मार्ग चुना है। इस निर्णय से लाखों प्रवासी चालकों पर मंडरा रहा आजीविका का संकट फिलहाल टल गया है।

मराठी भाषा अनिवार्य करने का नियम और सरकारी मंशा

राज्य के परिवहन विभाग ने हाल ही में 12 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के माध्यम से महाराष्ट्र में चलने वाले सभी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया था। प्रशासन का उद्देश्य था कि राज्य में आजीविका कमाने वाले सभी नागरिक स्थानीय भाषा और संस्कृति का सम्मान करें। लेकिन जमीनी स्तर पर इस नियम के लागू होते ही कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आने लगीं।

ये भी पढ़ें

व्यावसायिक वाहन चलाने वाले अधिकांश प्रवासी चालक बहुत कम पढ़े-लिखे हैं। ऐसे में कम समय के भीतर एक नई भाषा में दक्षता हासिल करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने इस स्थिति का संज्ञान लेते हुए कहा कि यात्रियों के साथ सामान्य बातचीत के लिए बुनियादी मराठी आना ही पर्याप्त है। सरकार का मकसद चालकों को परेशान करना या उनके रोजगार को खतरे में डालना नहीं है। इसी सोच के तहत सरकार ने नियमों में नरमी बरतते हुए चालकों को अपनी तैयारी पूरी करने के लिए 12 महीने की मोहलत देने का फैसला किया।

बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका और कानूनी पहलू

सरकारी नीति में आए इस बदलाव के पीछे कानूनी प्रक्रियाओं की भी अहम भूमिका रही है। इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ एडवोकेट विवेक शुक्ला ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में 12 अगस्त 2026 को जारी की गई अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई थी। चालकों की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया था कि किसी विशिष्ट भाषा की अनिवार्यता तय करना उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष यह तर्क भी प्रस्तुत किया कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के प्रावधानों में व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए किसी क्षेत्रीय भाषा के ज्ञान को अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया है। याचिका में चेतावनी दी गई थी कि यदि यह नियम तुरंत प्रभावी किया गया, तो लाखों गरीब प्रवासी चालकों के वाहन चलाने वाले बैज रद्द या निलंबित हो सकते हैं। इससे उनके और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो जाता। अदालत में मामला पहुंचने और कानूनी समीक्षा के दौरान सरकार ने अपना रुख नरम किया।

राजनीतिक बहस और 85 प्रतिशत चालकों का आंकड़ा

भाषा संबंधी इस अनिवार्यता को लेकर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में भी तीखी बहस शुरू हो गई थी। कई राजनीतिक प्रतिनिधियों ने प्रशासन के कड़े रवैये पर आपत्ति जताई थी। इसी दौरान शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से एक विशेष बैठक की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने चालकों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।

संजय निरुपम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान होना बेहद जरूरी है और प्रत्येक चालक को यात्रियों के साथ बुनियादी मराठी में संवाद करना आना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा सिखाने के नाम पर किसी के साथ जबर्दस्ती नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में कार्यरत लगभग 85 प्रतिशत चालक पहले ही मराठी भाषा का जरूरी ज्ञान प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में जो थोड़े बहुत चालक बच गए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सीखने का समय दिया जाना चाहिए।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और कैब चालकों को मराठी सीखने के लिए कितना समय दिया है?
राज्य सरकार ने चालकों को बेसिक मराठी सीखने के लिए एक साल (12 महीने) की अतिरिक्त मोहलत दी है।
मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने वाली अधिसूचना किस तारीख को जारी की गई थी?
यह नियम 12 अगस्त 2026 की सरकारी अधिसूचना के तहत लागू किया गया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका किसने दायर की थी?
एडवोकेट विवेक शुक्ला ने चालकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के संबंध में क्या तर्क दिया गया?
याचिका में कहा गया कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में ड्राइविंग लाइसेंस या बैज जारी करने के लिए किसी भी भाषा की बाध्यता का उल्लेख नहीं है।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री से मुलाकात में क्या दावा किया?
उन्होंने बताया कि लगभग 85 प्रतिशत चालक पहले से ही मराठी का बुनियादी ज्ञान हासिल कर चुके हैं और बाकी चालकों को समय दिया जाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

यह फैसला क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति और प्रवासी श्रमिकों के जीवनयापन के बीच संतुलन साधने का एक व्यावहारिक प्रयास है। हालांकि एक साल की मोहलत से तात्कालिक संकट टल गया है, लेकिन बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या कम पढ़े-लिखे चालक इस तय समय सीमा में भाषाई दक्षता हासिल कर पाएंगे, या फिर यह मुद्दा भविष्य में फिर अदालती और राजनीतिक जंग का केंद्र बनेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि कानूनी मोर्चे पर मोटर व्हीकल एक्ट 1988 बनाम क्षेत्रीय नियमों का यह टकराव आगे क्या रुख लेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर होने वाली अगली सुनवाइयों में इस बात पर कानूनी बहस तय है कि क्या राज्य सरकारें ड्राइविंग परमिट के लिए स्थानीय भाषा को अनिवार्य कर सकती हैं। एक साल की यह प्रशासनिक मोहलत भले ही अदालत के बाहर तात्कालिक राहत दे रही हो, लेकिन जब तक केंद्रीय कानून और राज्य की अधिसूचना के बीच के इस विधिक पेंच को स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक यह कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता बनी रहेगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR