भारतीय क्रिकेट में इन दिनों संजू सैमसन के बल्लेबाजी क्रम को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है. वजह है मैनचेस्टर में होने वाला अगला मुकाबला, जिससे पहले यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब वैभव सूर्यवंशी को मौका दिए जाने का समय आ गया है. यह पूरी बहस तब शुरू हुई जब भारतीय टीम प्रबंधन ने आयरलैंड दौरे के लिए वैभव सूर्यवंशी की जगह संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को चुना था, जो उस समय पूरी तरह तार्किक फैसला लग रहा था.
उस वक्त वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को साबित करने के लिए और समय चाहिए था, जबकि सैमसन और अभिषेक शर्मा दोनों ने अपने हालिया प्रदर्शन से टीम में जगह मजबूत कर ली थी. अभिषेक शर्मा शीर्ष क्रम में भारत के एक्स फैक्टर खिलाड़ी बनकर उभरे थे, तो दूसरी तरफ सैमसन टी20 विश्व कप के सबसे चमकते सितारों में गिने जा रहे थे. इस बीच नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए ईशान किशन ने भी अपनी भूमिका निभाई और टीम में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली.
सैमसन को मौका मिलना जायज था, लेकिन सवाल भी उठे
इसी प्रदर्शन के आधार पर सैमसन को इंग्लैंड सीरीज की शुरुआत में मौका मिलना पूरी तरह उचित था. आखिर टी20 विश्व कप में लगातार तीन शानदार पारियां खेलने वाले किसी भी खिलाड़ी को एक ठीक ठाक रन मिलना ही चाहिए. लेकिन दिक्कत यह है कि चुनौतीपूर्ण हालात में सैमसन सहज नजर नहीं आए हैं. उनके हालिया प्रदर्शन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या अब भारत को मैनचेस्टर में वैभव सूर्यवंशी को मैदान पर उतारना चाहिए?
मैनचेस्टर की पिच और मौसम बना रहे बहस को दिलचस्प
मैनचेस्टर के हालात इस चर्चा को और पेचीदा बना रहे हैं. यहां हाल ही में खेले गए महिला टी20 विश्व कप के मुकाबलों में पिच अपेक्षाकृत धीमी रही थी और गेंदबाजों को खास मदद नहीं मिल रही थी. इसके अलावा पिछले सप्ताह पड़ी गर्मी को देखते हुए भी पिच के मिजाज में बहुत बदलाव आने की संभावना कम ही है. यही वजह है कि यह बहस और गहरी होती जा रही है कि सैमसन को एक और मौका दिया जाए, या अब बदलाव का वक्त आ चुका है.
टीम संतुलन बनाम व्यक्तिगत फॉर्म की जंग
सैमसन को बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेज देना कोई आसान हल नहीं है. टीम संतुलन के लिहाज से यह कदम व्यावहारिक नहीं दिखता, क्योंकि क्रम में कोई साफ खाली जगह मौजूद ही नहीं है. ईशान किशन ने भले ही अब तक कोई मैच जिताऊ पारी न खेली हो, लेकिन उन्होंने ऐसा भी कुछ नहीं किया है जिसके चलते उन्हें बाहर करना सही ठहराया जा सके. सिर्फ एक खिलाड़ी को जगह देने के लिए पूरे बल्लेबाजी क्रम में उलटफेर करना जोखिम भरा साबित हो सकता है. अगर सैमसन को बाहर बैठाया भी जाता है, तो वैभव सूर्यवंशी को एक या दो मैच नहीं बल्कि लगातार मौके देना जरूरी होगा, तभी यह पता चल पाएगा कि वह इस स्तर पर कितने कारगर साबित होते हैं.
निष्पक्ष मौके का सिद्धांत क्या कहता है
खेल का सबसे निष्पक्ष नियम यही है कि किसी भी खिलाड़ी को अंतिम फैसले से पहले पर्याप्त मौके जरूर मिलने चाहिए. वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल और श्रीलंका में अपने प्रदर्शन से मजबूत दावा पेश किया है, लेकिन सैमसन और अभिषेक शर्मा ने पहले ही अपने खेल से जगह बना ली थी, इसलिए टीम प्रबंधन का अब तक का फैसला पूरी तरह सही ठहराया जा सकता है. फिर भी सैमसन के पिछले तीन मैचों में आउट होने के तरीके कुछ चिंता जरूर पैदा करते हैं. सवाल यह है कि क्या वह नई गेंद के खिलाफ सहज हैं, खासकर जब गेंद हल्की मूवमेंट ले रही हो? और अगर वह मिल रहे मौकों का फायदा नहीं उठा पा रहे, तो क्या यह वाकई भारत की सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन कही जा सकती है?
यह पूरी बहस किसी पीआर एजेंडे या निजी पसंद नापसंद से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि यह सिर्फ टीम के हित में सही सवाल पूछने की कोशिश है. सैमसन की विश्व कप वाली पारियां तारीफ के काबिल हैं, वहीं वैभव सूर्यवंशी की उभरती असाधारण प्रतिभा भी उतनी ही साफ नजर आती है. यही वजह है कि मैनचेस्टर का यह चयन इतना रोमांचक और अहम बन गया है.













