जब गेंद हवा में लहराते हुए पिच पर गिरती है और अपने पैने घुमाव से बल्लेबाजों के मन में खलबली मचा देती है, तो उसके पीछे गेंदबाज की उंगलियों, कलाई, कंधे और कमर का क्रीज पर किया गया सटीक तालमेल होता है। गॉल की पिच पर मानव सुथार की गेंदबाजी का तीखा टर्न इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि पारंपरिक गेंदबाजी शैली में जरा सा तकनीकी बदलाव भी खेल का रुख पूरी तरह पलट सकता है।
गॉल में उभरता नया गेंदबाजी अंदाज
श्रीलंका के गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम की स्पिन के अनुकूल पिचों पर युवा भारतीय स्पिनर मानव सुथार ने जिस तरह से अपनी गेंदों को हवा में नचाया है, उसने सभी खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस मुकाबले में प्रभात जयसूर्या और रविंद्र जडेजा जैसे दुनिया के स्थापित और अनुभवी बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर भी मैदान पर मौजूद हैं, लेकिन मानव सुथार के गेंदबाजी एक्शन ने उन्हें एक बिल्कुल अलग और प्रभावी पहचान दिलाई है। हालांकि ये तीनों ही गेंदबाज पारंपरिक बाएं हाथ की स्पिन शैली से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन गेंद को रिलीज करने का उनका ढंग, शरीर का खिंचाव और उंगलियों का इस्तेमाल इन तीनों को एक-दूसरे से पूरी तरह जुदा करता है।
मानव सुथार की ओवर-स्पिन और हाई-आर्म तकनीक
गॉल के इस मैदान पर मानव सुथार को प्रभात जयसूर्या और रविंद्र जडेजा के मुकाबले कहीं अधिक टर्न और उछाल हासिल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उनका हाई-आर्म रिलीज एक्शन है। गेंदबाजी करते वक्त सुथार का हाथ उनके कान के बिल्कुल करीब से ऊपर की तरफ उठता है। इस वर्टिकल एक्शन की बदौलत वह गेंद पर प्रभावी ओवर-स्पिन कराने में सफल होते हैं। ओवर-स्पिन के चलते गेंद हवा में आगे की दिशा में घूमने के बजाय नीचे की तरफ बहुत तेजी से उतरती है, जिसे डिप होना कहते हैं। पिच पर टप्पा खाने के बाद गेंद को अतिरिक्त उछाल मिलता है, जिससे बल्लेबाज गच्चा खा जाता है। हवा में गेंद के अधिक चक्कर लगने के कारण उन्हें गॉल की सूखी पिच पर बाकी दोनों गेंदबाजों के मुकाबले बेहद तीखा और खतरनाक घुमाव मिल रहा है।
प्रभात जयसूर्या की सटीकता और गॉल की पिच का अनुभव
श्रीलंका के प्रभात जयसूर्या इस मैदान पर सबसे सफल गेंदबाजों की फेरहिस्ट में शामिल हैं, लेकिन उनकी खूबी मानव सुथार जैसी भारी टर्न नहीं, बल्कि अंडर-स्पिन और क्रीज का समझदारी से इस्तेमाल करना है। जयसूर्या का गेंदबाजी करने वाला हाथ उनके कान से थोड़ा फासले पर रहता है। वह गेंद को उंगलियों से रगड़ने के बजाय थोड़ा पीछे से धकेलने का काम करते हैं, जिसे अंडर-स्पिन या स्लाइडर प्रभाव कहा जाता है। गॉल की पिच पर उनकी गेंदें टप्पा खाने के बाद ज्यादा ऊंची उठने के बजाए नीची रहती हैं और बहुत तेजी से अंदर या बाहर की तरफ निकल जाती हैं। वह लगातार एक ही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाज के संयम की कड़ी परीक्षा लेते हैं और विकेट झटकते हैं।
रविंद्र जडेजा की गति का मिश्रण और स्वाभाविक विविधता
विश्व के श्रेष्ठ टेस्ट ऑलराउंडर्स में शुमार रविंद्र जडेजा की स्पिन शैली मानव सुथार और प्रभात जयसूर्या दोनों से बिल्कुल भिन्न है। जडेजा भी जयसूर्या की तर्ज पर अंडर-स्पिन और साइड-आर्म एक्शन का प्रयोग करते हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज रफ्तार और बेजोड़ सटीकता है। जडेजा गेंद को हवा में ज्यादा देर तक नहीं रोकते, जिससे बल्लेबाज को क्रीज से बाहर निकलकर शॉट खेलने का मौका नहीं मिल पाता। उनका हाथ कान से दूर और थोड़ा नीचे की तरफ से आता है, जो गेंद को स्किड कराने में खासी मदद करता है। जडेजा की असली ताकत उनका नेचुरल वेरिएशन है, जिसका मतलब है कि एक ही जैसे एक्शन से फेंकी गई उनकी एक गेंद तेजी से टर्न ले जाती है, जबकि दूसरी बिना घूमे बिल्कुल सीधे निकल जाती है। अंडर-स्पिन के प्रभाव से उनकी गेंदें पिच पर तेजी से टप्पा खाकर सीधे बल्लेबाजों के पैड या स्टंप्स पर जा लगती हैं।
पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक का मेल
संक्षेप में कहा जाए तो जहां रविंद्र जडेजा और प्रभात जयसूर्야 अपनी फ्लैट कलाई और अंडर-स्पिन के दम पर बल्लेबाजों को गति, सटीक लाइन और कम उछाल के जाल में फंसाते हैं, वहीं मानव सुथार का क्लासिक हाई-आर्म एक्शन उन्हें हवा में ड्रिफ्ट, बेहतरीन डिप और पिच से घातक ओवर-स्पिन टर्न दिलाता है। गॉल की पिच पर सुथार का यह शानदार प्रदर्शन इस बात को साबित करता है कि टेस्ट क्रिकेट के लंबे फॉर्मेट में आज भी फ्लाइट और टर्न का पारंपरिक अंदाज सबसे अचूक हथियार साबित होता है।



















