मॉडर्न डे क्रिकेट में गेंदबाज के लिए नो-बॉल फेंकना किसी बड़े अपराध से कम नहीं आंका जाता है। मैच के दौरान एक छोटी सी नो-बॉल ही अक्सर किसी टीम की जीत और हार के बीच का फैसला तय कर देती है। यही वजह है कि खिलाड़ी इससे बचने के लिए नेट पर पसीना बहाते हैं, लेकिन खेल के मैदान पर ऐसी गलतियां फिर भी हो जाती हैं। हालांकि, कल्पना कीजिए कि क्या स्थिति होगी जब केवल नो-बॉल के जरिए ही स्कोरबोर्ड पर 100 से ज्यादा रन जुड़ जाएं। ऐसा ही एक अनोखा और हैरान करने वाला मुकाबला साल 1977 में वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच ब्रिजटाउन क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया गया था।
ब्रिजटाउन में बने अनचाहे विश्व रिकॉर्ड की पूरी कहानी
वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच संपन्न हुए उस ऐतिहासिक मुकाबले में दोनों पक्षों के गेंदबाजों ने कुल मिलाकर 109 नो-बॉल फेंकी थीं, जो टेस्ट इतिहास में आज भी एक अटूट रिकॉर्ड है। वर्ष 1977 से पहले कभी भी टेस्ट क्रिकेट में 100 या उससे अधिक नो-बॉल फेंके जाने का वाकया सामने नहीं आया था। ब्रिजटाउन की पिच काफी तेज और अतिरिक्त उछाल वाली थी, जिस पर गेंदबाज ज्यादा रफ्तार हासिल करने और खतरनाक बाउंसर डालने के प्रयास में अपने रन-अप का संतुलन खो बैठे। नतीजतन, क्रीज पार करने का सिलसिला लगातार चलता रहा और नो-बॉल का आंकड़ा 109 तक जा पहुंचा। इस मामले में दूसरा स्थान साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए टेस्ट मैच का है, जिसमें कुल 90 नो-बॉल डाली गई थीं।
रफ्तार के सौदागरों का प्रदर्शन और ओवरस्टेपिंग
उस दौर में वेस्टइंडीज और पाकिस्तान की टीमों में दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज हुआ करते थे। वेस्टइंडीज की गेंदबाजी कमान कॉलिन क्रॉफ्ट और जोएल गार्नर संभाल रहे थे, और यह मुकाबला उन दोनों का ही डेब्यू टेस्ट मैच था। इसके अलावा एंडी रॉबर्ट्स ने भी अपनी आक्रामक गति से बल्लेबाजों को परेशान किया। दूसरी ओर, पाकिस्तान खेमे में इमरान खान और सरफराज नवाज जैसे दिग्गज पेसर मौजूद थे जिन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर तीखे बाउंसरों की बरसात कर दी। एक-दूसरे से श्रेष्ठ साबित करने की इस अंधी होड़ में दोनों पक्षों के खिलाड़ियों ने इतनी ज्यादा ओवरस्टेपिंग और बाउंसर गेंदबाजी की कि क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा नो-बॉल का यह अनचाहा रिकॉर्ड बन गया।
रोमांचक मोड़ के बावजूद बेनतीजा रहा मुकाबला
अगर इस रोमांचक मुकाबले के परिणाम की चर्चा करें, तो वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच खेला गया यह टेस्ट मैच अंततः ड्रॉ पर छूटा था। टॉस जीतकर पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया था और वसीम रजा के शानदार शतक की बदौलत अपनी पहली पारी में 435 रन बनाए। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने भी कप्तान क्लाइव लॉयड के शतकीय पारी के दम पर 421 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। खेल आगे बढ़ा तो पाकिस्तान ने अपनी दूसरी पारी में 291 रन बनाए, जिससे मेजबान टीम के सामने जीत के लिए 306 रनों का लक्ष्य आया। मैच के आखिरी दिन वेस्टइंडीज की टीम 9 विकेट के नुकसान पर 251 रन ही बना सकी और पाकिस्तानी गेंदबाज जीत के लिए जरूरी आखिरी विकेट हासिल नहीं कर पाए, जिसके चलते यह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हो गया।



















