तेजस्वी प्रकाश संग पुरानी अनबन पर सुरभि चंदना ने तोड़ी चुप्पी, रिश्ते और पेशेवर एकता पर कही बड़ी बातपाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार, बाग और पुंछ के कई बूथों पर दर्ज हुआ शून्य मतदानश्रीलंका की सरजमीं पर चमके देवदत्त पडिक्कल, 167 रनों की मैराथन पारी खेलकर भारत के लिए बनाए 5 ऐतिहासिक रिकॉर्डलाल किले से पीएम मोदी के संबोधन पर सियासी घमासान, किरेन रिजिजू ने बताया दिमागी नक्सल का सही अर्थएम्स मेट्रो स्टेशन पर सीआईएसएफ जवान द्वारा गुप्त रूप से फोटो खींचने पर हंगामा, यात्रियों के विरोध के बाद सीसीटीवी जांच शुरूशेनझेन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बनाया नया AI मॉडल, डिप्रेशन के खतरे की 4 साल पहले होगी पहचानगुजारिश से लेकर फाइटर तक: जब ऋतिक रोशन ने अपनी बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से दर्शकों को चौंकायास्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के कथित अनादर पर सोनिया गांधी के विरुद्ध कर्नाटक पुलिस में शिकायत, विकास पुत्तूर ने दी हाईकोर्ट की चेतावनीडार्विन टेस्ट में बांग्लादेश की ऐतिहासिक जीत से ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस के नाम जुड़ा बेहद शर्मनाक रिकॉर्डचुनावी राजनीति और नेतृत्व का संकट: नेहरू-गांधी परिवार के वर्चस्व से लेकर क्षेत्रीय दलों की बैसाखियों तक कांग्रेस के घटते जनाधार की पूरी कहानी
टीम इंडिया में बढ़ती चोटों पर सुनील गावस्कर का कड़ा रुख, BCCI के बायोमैकेनिक्स और जिम रूटीन पर उठाए गंभीर सवालक्रिकेट
16 अग॰ 2026, 6:03 pm (1 घंटे पहले)· 1

टीम इंडिया में बढ़ती चोटों पर सुनील गावस्कर का कड़ा रुख, BCCI के बायोमैकेनिक्स और जिम रूटीन पर उठाए गंभीर सवाल

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों में बार-बार हो रही हैमस्ट्रिंग की चोटों पर चिंता जताई है। उन्होंने बीसीसीआई के फिटनेस मॉडल और नेट्स में सीमित गेंदबाजी कराने वाले बायोमैकेनिक्स नियमों की समीक्षा की मांग की है।

भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम इन दिनों मैदानी प्रतिद्वंद्वियों से निपटने के साथ-साथ अपने प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस समस्याओं से भी जूझ रही है। टीम के कई महत्वपूर्ण सदस्य चोटों के कारण बाहर हैं या उनकी फिटनेस पर अनिश्चितता बनी हुई है। इस परिस्थिति में पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के मौजूदा प्रशिक्षण ढांचे और खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि टीम में लगातार हो रही एक ही प्रकार की इंजरी महज इत्तेफाक नहीं हो सकती, बल्कि यह प्रशिक्षण प्रणाली में मौजूद किसी बुनियादी कमी की ओर इशारा करती है।

बार-बार लगने वाली चोटों का पैटर्न और ट्रेनिंग में खामियां

टीम प्रबंधन के लिए खिलाड़ियों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की समस्या का सामना कर रहे हैं। वहीं साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर, हार्दिक पंड्या, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे अन्य खिलाड़ी भी विभिन्न शारीरिक दिक्कतों से परेशान हैं। गावस्कर ने अपने विश्लेषण में ध्यान दिलाया कि टीम के बहुसंख्यक खिलाड़ी विशेष रूप से हैमस्ट्रिंग की चोट से प्रभावित हो रहे हैं।

ये भी पढ़ें

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब एक ही प्रकार की मांसपेशीय समस्या बार-बार सामने आती है, तो इसके कारणों की गहराई से जांच होनी चाहिए। गावस्कर के अनुसार, इसके लिए केवल BCCI Center of Excellence के फिजियोथेरेपिस्ट को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। इसके बजाय पूरे स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग और ट्रेनिंग प्रोटोकॉल का व्यापक ऑडिट किया जाना आवश्यक है ताकि समस्या की मूल वजह को पकड़ा जा सके।

बायोमैकेनिक्स नियम और नेट्स में सीमित गेंदबाजी पर सवाल

आधुनिक क्रिकेट में लागू किए जा रहे बायोमैकेनिक्स और वर्कलोड नियमों पर भी पूर्व दिग्गज बल्लेबाज ने तर्कसंगत सवाल खड़े किए। अभ्यास सत्रों के दौरान गेंदबाजों पर लगाई जाने वाली पाबंदियों की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने नेट्स के तौर-तरीकों को व्यावहारिक बनाने की वकालत की।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी गेंदबाज को वास्तविक मुकाबले में एक ओवर में 6 गेंदें और पूरे स्पेल में 24 या उससे अधिक गेंदें फेंकनी होती हैं, तो अभ्यास के दौरान उसे केवल 20 गेंदें डालने तक सीमित रखना कितना तर्कसंगत है। गावस्कर का तर्क है कि अभ्यास सत्र की तीव्रता और वर्कलोड ऐसा होना चाहिए जो खिलाड़ी को मैच की वास्तविक शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के लिए तैयार करे, न कि उसे मैदान पर जल्दी थका दे।

'जिम फिट' बनाम 'मैच फिट' का नजरिया

शारीरिक तैयारी के संदर्भ में गावस्कर ने जिम वर्कआउट और मैदान पर सहनशक्ति के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि केवल भारी वजन उठाना या जिम में घंटे बिताना ही पूर्ण फिटनेस का प्रमाण नहीं होता। असली परीक्षा यह है कि खिलाड़ी मैच के लंबे दबाव और शारीरिक श्रम को किस तरह संभाल पाता है।

खिलाड़ियों की शारीरिक तैयारी के बारे में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा,

"मैच फिट होना जिम फिट होने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।"
उनका मानना है कि जब तक ट्रेनिंग का ध्यान खेल की वास्तविक परिस्थितियों पर केंद्रित नहीं होगा, तब तक खिलाड़ियों का शरीर लंबे स्पेल और लंबे टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो सकेगा।

कप्तान शुभमन गिल की चिंताएं और बड़े टूर्नामेंट की चुनौती

खिलाड़ियों के चोटिल होने का असर टीम के प्रदर्शन और संयोजन पर भी पड़ रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मिली पराजय के बाद कप्तान शुभमन गिल ने भी इस समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। निरंतर चोटों के कारण टीम प्रबंधन को लगभग हर मैच में अंतिम एकादश (Playing XI) में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे टीम का संतुलन प्रभावित होता है।

गिल ने भविष्य की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए कहा था कि यदि खिलाड़ी वर्तमान में लगातार दो या तीन मुकाबले खेलने में असहज महसूस कर रहे हैं, तो आगामी वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों में स्थिति और कठिन हो सकती है। वहां टीम को बिना किसी लंबे ब्रेक के लगातार 9 से 10 मुकाबले खेलने होते हैं। ऐसे में यदि खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं रहे, तो बड़े टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए परिस्थितियां काफी जटिल हो सकती हैं।

सवाल-जवाब

सुनील गावस्कर ने BCCI के ट्रेनिंग सिस्टम पर क्या सवाल उठाए हैं?
गावस्कर ने खिलाड़ियों में बार-बार हो रही हैमस्ट्रिंग की चोटों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रेनिंग पैटर्न में गड़बड़ी है और बायोमैकेनिक्स नियमों की समीक्षा होनी चाहिए।
इस समय कौन-कौन से भारतीय खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं?
जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर, हार्दिक पंड्या, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे खिलाड़ी चोटों या फिटनेस की समस्या का सामना कर रहे हैं।
गावस्कर ने नेट्स में गेंदबाजी की सीमाओं पर क्या तर्क दिया?
उन्होंने कहा कि जब मैच में 24 या उससे अधिक गेंदें फेंकनी होती हैं, तो नेट्स में 20 गेंदों की पाबंदी लगाना खिलाड़ी को वास्तविक मैच के लिए तैयार नहीं करता।
कप्तान शुभमन गिल ने चोटों को लेकर क्या चिंता जताई?
गिल ने कहा कि लगातार चोटों से प्लेइंग इलेवन बदलनी पड़ती है और अगर खिलाड़ी 2-3 मैच नहीं खेल पा रहे हैं, तो वर्ल्ड कप के 9-10 लगातार मैचों में परेशानी होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR