छपरा के ग्रामीण इलाके में एक खास ठेला इन दिनों खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। दुकान गांव या ग्रामीण क्षेत्र में होने के बावजूद यहां खाने-पीने के शौकीनों की भारी भीड़ हमेशा देखने को मिलती है। इस ठेले को चलाने की जिम्मेदारी रामजी शाह संभालते हैं, जिनका साथ उनके परिवार के सदस्य भी देते हैं। स्कूल और ट्यूशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद रामजी शाह के बेटा और छोटी बेटी सीधे ठेले पर पहुंचते हैं और उनके काम में हाथ बंटाते हैं। यह परिवार पिछले 15 साल से भी ज्यादा समय से इसी बाजार में ठेला लगाकर समोसे की बिक्री कर रहा है और अपनी खास पहचान बनाए हुए है।
घरेलू मसालों का खास इस्तेमाल
रामजी शाह ने अपने कारोबार के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे बाजार के रेडीमेड मसालों की जगह घर पर ही पारंपरिक तरीके से मसाले तैयार करते हैं। समोसे में भरने वाली सामग्री के लिए वे लहसुन, प्याज, गरम मसाला, हल्दी और मंगरैल जैसे तमाम मसालों का मिश्रण खुद ही तैयार करते हैं। शुद्धता और गुणवत्ता पर उनका विशेष जोर रहता है, जिसके कारण ग्राहकों को आज भी वही पुराना स्वाद मिलता है जो उन्होंने 15 साल पहले चखा था। स्वाद और सेहत दोनों का ध्यान रखने के कारण लोग इस ठेले की तरफ खींचे चले आते हैं।
शुद्ध सरसों के तेल में तलने की परंपरा
इस ठेले पर बनने वाले व्यंजनों की एक और बड़ी खासियत यह है कि समोसो को किसी रिफाइंड या दोयम दर्जे के तेल में नहीं, बल्कि शुद्ध सरसों के तेल में तला जाता है। रामजी शाह का मानना है कि सरसों के तेल में बनी चीजें खाने से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है और पाचन संबंधी समस्याएं भी नहीं होती हैं। समोसे के साथ ग्राहकों को परोसी जाने वाली चीजें भी बेहद खास होती हैं। इसके साथ खाने के लिए धनिया की चटनी, आंवला की चटनी, कच्चा प्याज और हरी मिर्च परोसी जाती है, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देती है।
ब्रेड पकोड़ा और लौंगलता की भी है धूम
केवल समोसा ही नहीं, बल्कि इस ठेले पर मिलने वाले अन्य व्यंजन भी काफी लोकप्रिय हैं। रामजी शाह ने बातचीत में बताया कि उनके काउंटर पर ब्रेड पकोड़ा और लौंगलता भी पूरी शुद्धता के साथ तैयार किए जाते हैं। इतने लंबे समय तक दुकान चलाने के बावजूद उन्होंने कभी भी क्वालिटी या शुद्धता के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया है। यही कारण है कि जो लोग डेढ़ दशक पहले यहां का स्वाद चख चुके हैं, वे आज भी उसी स्वाद की तलाश में यहां खिंचे चले आते हैं और दूर-दूर से लोग इन व्यंजनों का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं।
ग्राहकों की लंबी फेहरिस्त और बार-बार आना
गुणवत्ता और स्वाद के प्रति इस निरंतरता का ही नतीजा है कि यहां आने वाले ग्राहक बार-बार आना पसंद करते हैं। एक बार जो व्यक्ति इस ठेले के समोसे या ब्रेड पकोड़े का स्वाद चख लेता है, वह दोबारा यहां जरूर लौटता है। ग्रामीण इलाके में स्थित होने के बावजूद छपरा के इस ठेले पर आसपास के गांवों के अलावा दूरदराज के इलाकों से भी लोग समोसा, ब्रेड पकोड़ा और लौंगलता खाने के लिए पहुंचते हैं। परिवार की मेहनत और शुद्ध खानपान की बदौलत यह ठेला आज इलाके में एक मिसाल बन गया है।



















