जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके में 14 साल की एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद पूरे राज्य में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है। इस गंभीर मामले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर महीनों तक यौन शोषण करने और जबरन गर्भपात कराने के बेहद संगीन आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जब गर्भपात के दौरान पीड़ित बच्ची की हालत अत्यधिक बिगड़ गई, तो उसने दम तोड़ दिया। इस अमानवीय घटना के सामने आते ही स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवार का गुस्सा फूट पड़ा और न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए। स्थानीय पुलिस की शुरुआती कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच अब इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है, जबकि पहले से बनाई गई एसआईटी वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने में जुटी हुई है। इस सनसनीखेज प्रकरण में अब तक मुख्य आरोपी शिक्षक, उसके भाई और जिला अस्पताल की एक स्टाफ नर्स समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और एससी-एसटी एक्ट की बेहद कड़ी धाराएं लगाई गई हैं, और इस पूरी वारदात के विरोध में चिनाब घाटी में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सरकारी टीचर की हैवानियत और गर्भपात की साजिश का खुलासा
छत्रू पुलिस थाने को 20 अगस्त को इस नाबालिग छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत होने की इत्तिला मिली थी। घटना की शुरुआत में कोई भी लिखित शिकायत पुलिस को नहीं मिली थी, जिसके कारण पुलिस ने इसे शुरुआती दौर में एक सामान्य मौत मानकर अपनी पड़ताल शुरू की थी। हालांकि, जैसे-जैसे पुलिस ने तहकीकात आगे बढ़ाई, वैसे-वैसे मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने एक बड़े और जघन्य अपराध की परतों को खोलना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर ली। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सरकारी स्कूल का शिक्षक मोहम्मद इशाक काफी लंबे समय से उस मासूम छात्रा का दैहिक शोषण कर रहा था। जब लड़की गर्भवती हो गई, तो उस शिक्षक ने अपने भाई रियाज अहमद शेख के साथ मिलकर गर्भपात की एक खौफनाक और खतरनाक साजिश रची। दोनों ने मिलकर लड़की को अवैध रूप से दवाइयां दीं ताकि गर्भ गिराया जा सके, लेकिन इन दवाओं के घातक असर से छात्रा की तबीयत बेहद खराब हो गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
जिला अस्पताल के स्टाफ और अन्य मददगारों की संदिग्ध भूमिका
इस घिनौने और आपराधिक कृत्य में केवल वही शिक्षक अकेला शामिल नहीं था, बल्कि उसे प्रशासनिक और चिकित्सीय व्यवस्था से भी सहयोग मिला था। किश्तवाड़ जिला अस्पताल की एक स्टाफ नर्स और एक दिहाड़ी सफाई कर्मचारी ने भी इस अवैध गर्भपात को अंजाम देने में मुख्य आरोपियों की खुलकर मदद की थी। पुलिस ने इन दोनों कर्मचारियों के साथ अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के तमाम रिकॉर्ड, दवाइयों के वितरण और मेडिकल प्रोटोकॉल की बहुत गहराई से जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति इस आपराधिक षड्यंत्र में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी ताकि इस तरह के कृत्यों पर रोक लग सके।
सड़कों पर उतरे लोग और सियासी दबाव के बाद क्राइम ब्रांच को मिली कमान
इस सनसनीखेज वारदात के बाद किश्तवाड़ और आसपास के पूरे चिनाब घाटी क्षेत्र में आम जनता का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोग पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने और सभी दोषियों को जल्द से जल्द कठोरतम सजा दिलाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस मामले पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से औपचारिक आग्रह किया था कि इस गंभीर मामले की तह तक जाने के लिए इसे तुरंत क्राइम ब्रांच को सौंपा जाना चाहिए ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और समय सीमा के भीतर पूरी हो सके। जनता के बढ़ते भारी दबाव और इस प्रकरण की अत्यधिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अब जांच का जिम्मा पूरी तरह से क्राइम ब्रांच के सुपुर्द कर दिया है। अब क्राइम ब्रांच और एसआईटी मिलकर इस पूरे आपराधिक नेटवर्क के सभी पहलुओं और चेहरों को बेनकाब करने में जुटी हैं।



















