दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपने ही 38 साल के बेटे की जान ले ली। मृतक गुल हसन लंबे समय से सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहा था। आरोपी पिता तालुखदार अंसारी अपने बेटे की इस मानसिक स्थिति से अत्यधिक परेशान हो चुका था और उसने इस समस्या से हमेशा के लिए निजात पाने के लिए खौफनाक कदम उठाया। इस साज़िश को अंजाम देने के लिए उसने अपने साथी मोहम्मद वसीम उर्फ अकरम के साथ मिलकर एक खतरनाक योजना बनाई। दोनों आरोपियों ने पीड़ित को इलाज के बहाने घर से बाहर बुलाया और फिर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सुनसान कंटेनर में मिला शव और शुरुआती जांच
इस खौफनाक वारदात का खुलासा 23 अगस्त की शाम करीब सवा सात बजे हुआ, जब पुलिस को एक लावारिस कंटेनर के भीतर शव मिलने की सूचना मिली। यह वीरान जगह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित थी। जब स्थानीय पुलिस दल मौके पर पहुंचा, तो उन्होंने देखा कि मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। घटनास्थल के पास ही एक भारी पत्थर भी मिला जो खून से सना हुआ था। शुरुआती मुआयने से ही यह स्पष्ट हो गया था कि युवक की कनपटी पर भारी वस्तु से हमला कर निर्ममता से जान ली गई है। इसके तुरंत बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया और अपराधियों की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर छानबीन शुरू कर दी।
सीसीटीवी कैमरों की मदद से हुआ कातिलों का खुलासा
घटनास्थल के आसपास अपराधियों की तलाश के लिए पुलिस टीमों ने तकनीकी मदद ली और कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के बारीक विश्लेषण से पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसमें गुल हसन दो संदिग्ध व्यक्तियों के साथ उसी सुनसान कंटेनर की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया। हालांकि, कुछ समय बीतने के बाद वे दोनों संदिग्ध व्यक्ति वहां से अकेले ही बाहर निकलते हुए दिखे, लेकिन गुल हसन उनके साथ वापस नहीं लौटा। इसी अहम सुराग के आधार पर पुलिस ने फुटेज में दिख रहे चेहरों की पहचान की और दोनों को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो परत दर परत सच सामने आने लगा।
इलाज का झांसा देकर रची गई थी खौफनाक साजिश
पुलिस हिरासत में हुई पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मुख्य आरोपी तालुखदार अंसारी ने अधिकारियों को बताया कि उसका 38 साल का बेटा गुल हसन सिजोफ्रेनिया का मरीज था और उसकी इस बीमारी के चलते पूरा परिवार लगातार परेशानियों का सामना कर रहा था। इसी पारिवारिक और मानसिक तनाव से तंग आकर उसने अपने परिचित वसीम के साथ मिलकर बेटे को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा था। घटना वाले दिन गुल हसन को डॉक्टर के पास ले जाने का झूठा लालच दिया गया और उसे सुनसान कंटेनर के पास बुलाया गया। जैसे ही वह वहां पहुंचा, दोनों ने मिलकर पहले उसके सिर पर पत्थर से कई प्रहार किए और फिर कपड़े की रस्सी से उसका गला घोंटकर उसकी सांसें हमेशा के लिए रोक दीं।



















