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राजस्थान में चुनाव से पहले साइबर ठगी का बड़ा खतरा, पुलिस ने जारी की खास एडवाइजरीअपराध
25 अग॰ 2026, 4:19 pm (2 घंटे पहले)· 2

राजस्थान में चुनाव से पहले साइबर ठगी का बड़ा खतरा, पुलिस ने जारी की खास एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस ने आगामी चुनावों के मद्देनजर एक विस्तृत साइबर एडवाइजरी जारी की है। इसमें फर्जी वोटर लिंक, डीपफेक वीडियो और व्हाट्सएप ग्रुप्स को लेकर खास चेतावनी दी गई है।

आगामी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के नजदीक आते ही राजस्थान में साइबर अपराधियों की सक्रियता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य की पुलिस ने मतदाताओं, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनावी कार्यों में तैनात अमले के लिए एक व्यापक दिशा-निर्देश सूची जारी की है। प्राधिकारियों का कहना है कि मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने या नागरिकों को ठगने के लिए साइबर अपराधी फर्जी वोटर लिंक, वन-टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी, क्यूआर कोड, फिशिंग ईमेल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डीपफेक तकनीक का सहारा ले सकते हैं।

डिजिटल ठगी और फर्जी वोटर लिंक से बचाव

साइबर अपराधी चुनाव के इस दौर में आम नागरिकों को मोबाइल फोन पर टेक्स्ट मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए फर्जी संदेश भेज सकते हैं। इन संदेशों में इस तरह के दावे किए जा सकते हैं कि मतदाता सूची में अपना नाम जांच लें या फिर आपका पोलिंग बूथ बदल दिया गया है। इन संदेशों के साथ संदेहास्पद लिंक भी संलग्न होते हैं जिन पर क्लिक करते ही लोग ठगी का शिकार बन सकते हैं। पुलिस बल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अज्ञात या अप्रमाणित लिंक पर क्लिक करने से पूरी तरह बचा जाना चाहिए।

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आधिकारिक स्रोतों पर ही करें भरोसा

मतदान सूची या निर्वाचन से जुड़ी किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी हासिल करने के लिए केवल स्टेट इलेक्शन कमीशन, राजस्थान और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान के अधिकृत वेब पोर्टल का ही उपयोग किया जाना चाहिए। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी सरकारी विभाग या चुनाव आयोग का नुमाइंदा बताकर वोटर कार्ड के सत्यापन या किसी अन्य चुनावी कार्य के नाम पर ओटीपी मांगता है, तो उसे बिल्कुल साझा न करें। अपनी बैंक डिटेल, यूपीआई पिन या अन्य व्यक्तिगत जानकारियां किसी भी अनजान व्यक्ति को देना वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है।

सोशल मीडिया पर डीपफेक और फेक न्यूज का खतरा

चुनावी माहौल के दौरान राजनीतिक हस्तियों से जुड़े फर्जी वीडियो, ऑडियो क्लिप, भाषण और डीपफेक सामग्रियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर प्रसारित की जा सकती हैं। प्रशासन ने नागरिकों को आगाह किया है कि बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के ऐसी वायरल सामग्रियों को सच न मान लें और किसी भी संदेश को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर कर लें। इसके अलावा चुनाव प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अपने सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन यानी टूएफए सक्रिय रखने, मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने और किसी भी अनजान लिंक के माध्यम से अपनी लॉगिन जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई है।

चंदे और व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन के लिए निर्देश

अभियान के लिए फंड जुटाने या चुनावी चंदे के नाम पर आने वाले यूपीआई लिंक और क्यूआर कोड को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी कोड को स्कैन करने या पिन दर्ज करने से पहले लेनदेन से जुड़ी पूरी जानकारी जांच लेनी चाहिए। इसके साथ ही व्हाट्सएप ग्रुपों का संचालन करने वाले एडमिनिस्ट्रेटर्स को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है। प्रचार से जुड़े इन समूहों में केवल विश्वसनीय सदस्यों को ही संदेश पोस्ट करने की अनुमति दी जानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर केवल एडमिनिस्ट्रेटर विकल्प का उपयोग करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।

चुनावी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के लिए नियम

चुनाव कार्य में लगाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे चुनावी डेटा या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तथा वीवीपैट से जुड़ी किसी भी संवेदनशील जानकारी को अपने निजी उपकरणों, असुरक्षित नेटवर्क या सार्वजनिक वाई-फाई पर साझा न करें। अनजान ईमेल पतों से आने वाले किसी भी चुनावी सर्कुलर, लिंक या अटैचमेंट को भी बिना पूरी जांच के खोलने से बचने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी सेंधमारी से बचा जा सके।

धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहां करें संपर्क

यदि किसी नागरिक के साथ किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना एक भी पल गंवाए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए। इसके अलावा नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन में भी तुरंत सूचना दी जा सकती है। नागरिक राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का भी उपयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान में विशेष रूप से उपलब्ध साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती दौर यानी गोल्डन ऑवर बेहद निर्णायक होता है, इसलिए शिकायत दर्ज कराने में बिल्कुल भी विलंब नहीं करना चाहिए।

सवाल-जवाब

राजस्थान पुलिस ने चुनाव से पहले कौन सी मुख्य चेतावनी जारी की है?
पुलिस ने मतदाताओं और उम्मीदवारों को फर्जी वोटर लिंक, ओटीपी धोखाधड़ी, डीपफेक वीडियो और संदिग्ध क्यूआर कोड से सावधान रहने की चेतावनी दी है।
साइबर ठगी होने पर किस नंबर पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए?
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी के लिए किस वेबसाइट का उपयोग करना चाहिए?
केवल स्टेट इलेक्शन कमीशन राजस्थान और मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइटों का ही उपयोग करना चाहिए।
व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन को क्या सावधानी बरतने की सलाह दी गई है?
ग्रुप एडमिन को केवल भरोसेमंद सदस्यों को संदेश पोस्ट करने की अनुमति देने और जरूरत पड़ने पर एडमिन-ओनली विकल्प का उपयोग करने को कहा गया है।
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