कोटा में शिक्षा जगत की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। रंगबाड़ी इलाके में संचालित तिलक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाले एक दस वर्षीय छात्र के साथ शिक्षक द्वारा कथित रूप से मारपीट करने, गाली-गलौज करने और धमकाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह घटना 24 अगस्त को हुई थी, जिसके तुरंत बाद स्कूल प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रबंधन ने पूरे मामले को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। हालांकि, राजनीतिक रसूख के बल पर इस मामले को दबाए जाने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी किसी भी स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि नहीं हो पाई है।
पीड़ित छात्र अक्ष के परिजनों ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कक्षा के भीतर ही शिक्षक ने बच्चे के साथ बेहद बेरहमी से मारपीट की। इस घटना के परिणामस्वरूप मासूम बच्चे को शारीरिक चोटें आई हैं और वह मानसिक रूप से काफी सहमा हुआ है। परिवार का यह भी गंभीर दावा है कि शिक्षक ने केवल मारपीट तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि छात्र के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इस वाकये के बाद जब परिजन न्याय की उम्मीद लेकर स्कूल प्रबंधन के पास पहुंचे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
परिजनों के अनुसार, जब उन्होंने स्कूल के निदेशक मोहित गौतम से संपर्क साधने की कोशिश की, तो उन्होंने खुद के शहर से बाहर होने का हवाला दिया और कार्यवाहक प्रिंसिपल से बात करने की सलाह दी। आरोप है कि कार्यवाहक प्रिंसिपल ने भी अभिभावकों की शिकायत को पूरी तरह से तवज्जो देने के बजाय बच्चे को आई चोटों को बेहद मामूली करार दिया और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। परिवार का साफ तौर पर कहना है कि बार-बार गुहार लगाने और शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है, जिससे परिजनों में भारी रोष व्याप्त है।
स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे बड़े सवाल
यह पूरा प्रकरण केवल एक शिक्षक द्वारा छात्र के साथ की गई कथित मारपीट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि परिजनों ने स्कूल परिसर के भीतर बच्चों की कुल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि शैक्षणिक संस्थान के परिसर में अक्सर आवारा जानवर बेरोकटोक घूमते नजर आते हैं, जिससे वहां पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है और इसके लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसके अलावा, स्कूल के पास फायर एनओसी और अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
परिजनों का यह भी दावा है कि स्कूल प्रबंधन अपने राजनीतिक रफूख और प्रभाव का इस्तेमाल करके इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन तमाम गंभीर आरोपों की अभी तक किसी भी स्वतंत्र एजेंसी या अधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है, जिसके चलते यह माना जा रहा है कि पूरे प्रकरण की एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सबके सामने स्पष्ट हो सकेगी। अभिभावकों का मानना है कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
स्कूल प्रशासन की तरफ से नहीं मिली कोई प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में जब स्कूल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष जानने के लिए संवाददाताओं ने संपर्क करने का प्रयास किया, तो उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। स्कूल के संचालक की ओर से मीडिया के सामने किसी भी प्रकार की विस्तृत प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया गया और केवल यही दोहराया गया कि संचालक इस समय कोटा से बाहर मौजूद हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या शिक्षा विभाग इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेगा और स्कूल के भीतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े तमाम आरोपों की गहराई से जांच करवाएगा।
यदि जांच के दौरान ये सभी आरोप सही साबित होते हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठना पूरी तरह स्वाभाविक है। फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक जांच और उचित कार्रवाई के इंतजार में अटका हुआ है। सबसे बड़ा और अहम सवाल यही बना हुआ है कि आखिर कोटा के स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संस्थाएं इस तरह की शिकायतों पर कितनी गंभीरता से और कितनी जल्दी कार्रवाई करती हैं।



















