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छत्तीसगढ़ के 2015 कोरर नक्सली हमला मामले में बड़ा फैसला, 25 लाख के इनामी प्रभाकर राव और पत्नी राजे कांगे को 7 साल की जेलछत्तीसगढ़
9 सित॰ 2026, 11:24 am (1 घंटे पहले)· 4

छत्तीसगढ़ के 2015 कोरर नक्सली हमला मामले में बड़ा फैसला, 25 लाख के इनामी प्रभाकर राव और पत्नी राजे कांगे को 7 साल की जेल

छत्तीसगढ़ की विशेष अदालत ने वर्ष 2015 में पुलिस दल पर हुए जानलेवा हमले के मामले में शीर्ष नक्सली प्रभाकर राव, उसकी पत्नी राजे कांगे समेत 5 लोगों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नौ वर्ष पूर्व सुरक्षाबलों पर अंजाम दिए गए भीषण नक्सली हमले के मामले में अदालत की ओर से ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम और अनुसूचित अपराधों की विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के बाद प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवादी संगठन के उच्चस्तरीय कैडर प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे सहित पांच अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने पेश किए गए सबूतों, गवाहों के बयानों और पुलिस की केस डायरी की गहराई से समीक्षा करने के उपरांत यह सजा मुकर्रर की है।

विशेष अदालत का फैसला और धाराओं के तहत सजा

अदालत के फैसले के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को भारतीय दंड संहिता की बलवे से जुड़ी धारा 147 के अंतर्गत 2-2 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है। इसके साथ ही, विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम (UAPA) की धारा 38(2) एवं 39(2) के तहत दोनों दोषियों को 7-7 वर्ष के सश्रम कठोर कारावास से दंडित किया गया है। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सुनाए गए इस फैसले में अन्य तीन सह-आरोपियों की संलिप्तता को भी प्रमाणित पाया गया और उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा सुनाई गई।

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बस्तर के जंगलों में चार दशकों का खौफनाक इतिहास

सजा पाने वाला यह नक्सली दंपति बस्तर संभाग के दुर्गम और घने जंगलों में पिछले 40 वर्षों से उग्रवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। पुलिस की आधिकारिक फाइलों के मुताबिक, स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZDCM) के पद पर सक्रिय प्रभाकर राव के खिलाफ अकेले कांकेर जिले के विभिन्न थानों में गंभीर अपराध दर्ज थे। उसके नाम पर हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, बारूदी सुरंग के जरिए ब्लास्ट और लूटपाट जैसी 64 आपराधिक वारदातें दर्ज पाई गई हैं। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रभाकर राव की गिरफ्तारी के लिए 25 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था।

वहीं दूसरी तरफ, उसकी पत्नी और डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) राजे कांगे भी संगठन के भीतर बेहद प्रभावी भूमिका में थी। राजे कांगे के खिलाफ सुरक्षाबलों पर हमलों और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कुल 36 संगीन मामले पंजीकृत थे। राज्य सरकार ने उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और उसकी सूचना देने पर 8 लाख रुपये का इनाम रखा था। इस तरह इस नक्सली दंपति पर कुल मिलाकर 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो उनके उग्रवादी तंत्र के प्रभाव और खतरे की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

साल 2015 के कोरर जंगल हमले की पूरी कहानी

यह मामला वर्ष 2015 का है, जब कांकेर जिले का कोरर थाना क्षेत्र सघन वनों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा होने के कारण उग्रवादियों का प्रमुख गढ़ माना जाता था। उस समय स्थानीय जिला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टुकड़ी क्षेत्र में नियमित गश्त और तलाशी अभियान के उद्देश्य से कोरर के जंगलों की ओर रवाना हुई थी। हालांकि, पहले से घात लगाकर बैठे उग्रवादियों को सुरक्षाबलों की इस हलचल की भनक मिल चुकी थी। प्रभाकर राव और राजे कांगे ने अपने सशस्त्र दस्ते के साथ मिलकर पहाड़ियों और घने पेड़ों की ओट में रणनीति तैयार कर रखी थी।

जैसे ही सुरक्षाबलों का गश्ती दल उग्रवादियों द्वारा चिह्नित संवेदनशील इलाके में प्रवेश कर गया, नक्सलियों ने बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमलावरों ने जवानों को निशाना बनाते हुए IED के माध्यम से विस्फोट करने का भी प्रयास किया ताकि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुँचाया जा सके।

जवानों की जवाबी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

अचानक हुए इस जानलेवा हमले के बावजूद, गश्ती दल में शामिल जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। बिना समय गंवाए जवानों ने अपनी-अपनी पोजीशन संभाली और नक्सलियों पर ताबड़तोड़ जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों की ओर से मिले इस मुंहतोड़ जवाब से नक्सली घबरा गए। जब प्रभाकर राव और राजे कांगे को अहसास हुआ कि जवानों का पलड़ा भारी पड़ रहा है, तो वे अपने बाकी साथियों के साथ पहाड़ियों, घने जंगलों और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

इस मुठभेड़ के तुरंत बाद कोरर थाने में नामजद उग्रवादियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, बलवा, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और UAPA की विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने विस्तृत विवेचना के बाद अदालत में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसकी परिणति 9 साल के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक दोषसिद्धि और सजा के रूप में सामने आई है।

सवाल-जवाब

कोरर नक्सली हमला मामला क्या है?
यह मामला साल 2015 का है जब छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोरर जंगल में सुरक्षाबलों की गश्ती टीम पर नक्सलियों ने घात लगाकर जानलेवा हमला किया था।
अदालत ने मुख्य आरोपियों को क्या सजा सुनाई है?
विशेष अदालत ने शीर्ष नक्सली प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को UAPA और बलवे की धाराओं के तहत 7-7 साल के सश्रम कठोर कारावास की सजा दी है।
दोषी नक्सली दंपत्ति पर कितना इनाम घोषित था?
प्रभाकर राव पर 25 लाख रुपये और उसकी पत्नी राजे कांगे पर 8 लाख रुपये यानी कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
प्रभाकर राव के खिलाफ कुल कितने आपराधिक मामले दर्ज थे?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रभाकर राव के खिलाफ अकेले कांकेर जिले में हत्या, डकैती और बारूदी विस्फोट जैसे 64 गंभीर मामले दर्ज थे।
यह फैसला किस अदालत द्वारा सुनाया गया है?
यह फैसला एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध की विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत द्वारा 9 साल की सुनवाई के बाद सुनाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह फैसला वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में कानून के लंबे हाथ और न्याय मिलने की प्रक्रिया को रेखांकित करता है। चार दशकों तक आतंक का पर्याय रहे 25 लाख के इनामी प्रभाकर राव और उसकी पत्नी को यूएपीए के तहत सजा मिलना बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों के बढ़ते मनोबल और पुख्ता कानूनी कार्रवाई का बड़ा प्रमाण है। हालांकि, ऐसे मामलों में सजा की अवधि और लंबी कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं, लेकिन यह फैसला आतंकवाद और उग्रवाद के मामलों में सख्त कानूनी शिकंजे की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह फैसला बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा के मामलों में यूएपीए जैसे कड़े कानूनों के तहत ठोस सबूत संकलित करने की चुनौती को उजागर करता है। चार दशकों के लंबे आपराधिक इतिहास के बावजूद महज सात साल की सजा यह दर्शाती है कि अभियोजन पक्ष को अदालतों में उच्चस्तरीय कैडरों के खिलाफ साजिश और प्रत्यक्ष सहभागिता के पुख्ता तकनीकी साक्ष्य पेश करने में कितनी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

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