ओडिशा के मलकानगिरि जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। शनिवार को की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में पैंगोलिन की खालें बरामद की गई हैं और इसके साथ ही छह आरोपियों को भी दबोचा गया है। यह पूरा मामला जंगलों में सक्रिय तस्करों के नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। वन विभाग इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है।
गुप्त सूचना के बाद घेराबंदी और जब्ती
मलकानगिरि के संभागीय वन अधिकारी (DFO) साई किरण डीएन के निर्देशन में वन विभाग की टीम को एक बेहद सटीक खुफिया इनपुट मिला था। जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग भारी मात्रा में वन्यजीवों के अंगों को लेकर पद्मागिरि-पांड्रीपानी मार्ग से गुजरने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के मिलते ही वन विभाग की टीम मुस्तैद हो गई और संबंधित मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई। रास्ते से गुजरने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से जांच शुरू कर दी गई।
चेकिंग के दौरान टीम को तीन गाड़ियां आती हुई दिखाई दीं, जिन पर अधिकारियों को शक हुआ। जब इन तीनों वाहनों को रोककर उनकी गहन तलाशी ली गई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। गाड़ियों के अंदर से पैंगोलिन की खालें बरामद हुईं। गिनती करने पर कुल 352 खालें पाई गईं, जिनका कुल वजन लगभग दो किलोग्राम है। वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से ही छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही तीनों गाड़ियों को जब्त कर लिया। पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।
कानून में सख्त सजा का प्रावधान
आपको बता दें कि पैंगोलिन एक अत्यंत संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव है। इसे भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि पैंगोलिन को मारना, उसका शिकार करना, उसके शरीर के अंगों को पास रखना या उनका व्यापार करना एक बहुत ही गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस कानून के तहत दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।
पूरे नेटवर्क के खुलासे की कोशिश
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से अब वन विभाग के अधिकारी कड़ाई से पूछताछ कर रहे हैं। DFO साई किरण डीएन के मुताबिक, जांच टीम इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में पैंगोलिन की खालें आखिर कहां से लाई गई थीं और इन्हें आगे किस जगह भेजा जाना था। अधिकारियों को पूरा अंदेशा है कि इस मामले के पीछे वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़ा कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है। पकड़े गए तस्करों से मिलने वाले सुरागों के आधार पर इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।



















