दिवाली के पावन पर्व से ठीक पहले देश के विभिन्न हिस्सों में हुए दो अलग-अलग धमाकों ने सुरक्षा और खुफिया तंत्र की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। सबसे पहले राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर एक विस्फोट की खबर सामने आई थी और अब उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी परिसर में एक तेज धमाका हुआ है। गाजियाबाद की इस घटना के बाद से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या फिर त्योहारी सीजन के दौरान किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने का प्रयास किया गया था। धमाका इतना भीषण था कि इसके असर से चौकी भवन के दो कांच के शीशे पूरी तरह चटक गए और इमारत की एक दीवार में भी हल्की दरार उभर आई।
कबाड़ वाहनों की पार्किंग के पास हुआ संदिग्ध विस्फोट
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली वसुंधरा पुलिस चौकी के ठीक पीछे यह धमाका हुआ। यह वह स्थान है जहां पुलिस द्वारा जब्द किए गए कबाड़ वाहन खड़े किए जाते हैं। विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया और स्थानीय निवासी तुरंत मौके की तरफ दौड़ पड़े। गनीमत यह रही कि इस अप्रत्याशित घटना में किसी भी पुलिसकर्मी या आम नागरिक के हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लेते हुए घटनास्थल की घेराबंदी कर दी ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
एसी कंप्रेसर फटने की आशंका खारिज
घटना के शुरुआती दौर में यह कयास लगाए जा रहे थे कि शायद पुलिस चौकी पर लगा कोई एयर कंडीशनर यानी एसी का कंप्रेसर फट गया हो, जिसकी वजह से यह तेज आवाज सुनाई दी। लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अब तक की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर इस संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौके के हालात और नुकसान के तरीके को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यह विस्फोट किसी कंप्रेसर के फटने से हुआ है। इस खुलासे के बाद मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि अब यह साफ है कि धमाके के पीछे कोई अन्य बाहरी कारण या विस्फोटक सामग्री थी।
सीसीटीवी कैमरों के बंद मिलने से जांच में अड़चन
इस पूरे मामले की तह तक जाने में पुलिस के सामने एक बहुत बड़ी तकनीकी बाधा यह आ रही है कि चौकी के आसपास कोई भी काम करने वाला सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं है। पुलिस चौकी के मुख्य द्वार पर जो कैमरे लगाए गए थे, वे भी तकनीकी खराबी या किसी अन्य वजह से बंद पड़े हैं। इस वजह से पुलिस के लिए यह पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है कि धमाके से ठीक पहले या उसके तुरंत बाद उस इलाके में कौन आया था और कौन वहां से गुजरा। उल्लेखनीय है कि चौकी के दोनों तरफ व्यस्त सड़कें हैं जो इंदिरापुरम को गाजियाबाद से जोड़ती हैं और इसके ऊपर से दिल्ली से राजनगर की ओर जाने वाला एलिवेटेड रोड भी गुजरता है, जिसके कारण वहां दिन-रात वाहनों और लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
फोरेंसिक जांच के लिए आगरा भेजे गए अवशेष
धमाके की सूचना मिलने पर बम निरोधक दस्ते यानी बीडीएस की टीम भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की। हालांकि शुरुआती मुआयने में बम निरोधक दस्ता यह स्पष्ट नहीं कर सका कि आखिर यह विस्फोट किस प्रकृति का था और इसमें किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस टीमों ने घटनास्थल से कुछ संदिग्ध अवशेष और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिन्हें उच्च स्तरीय फोरेंसिक जांच के लिए आगरा भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक आगरा से फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि धमाका किस वस्तु से हुआ था। पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है और किसी भी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
आतंकी संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने का दावा
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पुलिस उस सोशल मीडिया दावे की भी गहराई से पड़ताल कर रही है जिसमें इस धमाके की जिम्मेदारी ली गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गाजी 2 नाम के एक अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिसमें ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन-ए-हिन्दुस्तान’ नामक संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस वायरल पोस्ट में यह दावा किया गया है कि तथाकथित भगवा हुकूमत के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस को निशाना बनाया गया है। हालांकि पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस दावे की सत्यता की पुष्टि करने के लिए तकनीकी सर्विलांस और अन्य माध्यमों का सहारा ले रही हैं और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।
श्रीगंगानगर घटना से जुड़ाव की आशंका
गाजियाबाद की इस घटना से ठीक पहले राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुए विस्फोट की घटना भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। श्रीगंगानगर मामले में भी अभी तक इस्तेमाल की गई सामग्री और घटना के असली कारणों की जांच जारी है। त्योहारी सीजन के दौरान देश के दो अलग-अलग कोनों में हुई इस तरह की संदिग्ध घटनाओं ने तमाम सुरक्षा और खुफिया तंत्रों की नींद उड़ा दी है। अधिकारी इस बात की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्या इन दोनों वारदातों के बीच कोई पुराना या नया आपसी कनेक्शन है या फिर दोनों घटनाएं पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। फिलहाल पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस चरण में किसी भी जल्दबाजी में नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।



















