निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने बढ़ाई दरें, पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगाऋषिकेश के मुख्य बाजारों में वेडिंग वियर के चार बड़े ठिकानेरियल एस्टेट में भारी टैक्स और बढ़ती लागत से सस्ते फ्लैटों का निर्माण अटका, क्रेडाई ने की नीतिगत बदलाव की मांगघर पहुंचने से 40 किमी पहले सड़क दुर्घटना में सेना के जवान मोतीसिंह तंवर का निधन, रामदेवरा में सैन्य सम्मान से विदाईदेवघर में खाद खरीद की बदली व्यवस्था, अब बिना ऑनलाइन पंजीकरण और क्यूआर कोड के नहीं मिलेगा उर्वरकपूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण के लिए क्यों चुना जाता है दोपहर का कुतुप कालमत्स्य पालन में मुनाफा बढ़ाने के आधुनिक तरीके, सीमित जमीन और पानी में भी तैयार होगा बंपर उत्पादनघर पर पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा तैयार करने की आसान विधि और इसके स्वास्थ्य लाभमछली खरीदते समय इन 7 तरीकों से पहचानें कि वह ताजी है या बासीद पैराडाइज के लिए हैदराबाद में तैयार हुआ 30 एकड़ का ऐतिहासिक सेट, नानी और श्रीकांत ओडेला ने नकारी कंप्यूटर ग्राफिक्स की राह
कानपुर में चार दिनों से लापता कानून की छात्रा का रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों में मिला क्षत-विक्षत शव, परिजनों ने पुलिस पर लगाया टालमटोल का आरोपअपराध
3 अक्तू॰ 2026, 2:27 pm (28 मिनट पहले)· 0

कानपुर में चार दिनों से लापता कानून की छात्रा का रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों में मिला क्षत-विक्षत शव, परिजनों ने पुलिस पर लगाया टालमटोल का आरोप

कानपुर के दबौली वेस्ट इलाके से लापता 23 वर्षीय एलएलबी छात्रा रुचि पाल का शव रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में बरामद हुआ, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित दबौली वेस्ट क्षेत्र से चार दिनों से लापता चल रही 23 वर्षीय कानून की छात्रा रुचि पाल का क्षत-विक्षत शव रेलवे लाइन के पास झाड़ियों से बरामद किया गया है। शुक्रवार को रेलवे ट्रैक के निकट छात्रा की चप्पल मिलने के बाद जब परिजनों ने दबाव बनाया, तब पुलिस के साथ मिलकर आसपास तलाशी अभियान चलाया गया। चप्पल वाली जगह से करीब 200 मीटर की दूरी पर झाड़ियों के भीतर युवती का शव पड़ा मिला। इस बरामदगी के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और परिजनों में कोहराम मच गया। मृतका के परिवार ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर खोजबीन में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मौके पर भारी विरोध जताया। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम परीक्षण के लिए भेज दिया।

ट्यूशन पढ़ाने निकली थी रुचि, रात में बंद मिला मोबाइल फोन

दबौली वेस्ट इलाके के निवासी विमल पाल फैक्ट्री एरिया में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके परिवार में पत्नी गुड्डी देवी, बेटा विनय और बेटी रुचि थे। रुचि कानून द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का हाथ बंटाने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी। परिजनों के अनुसार, 28 सितंबर की शाम करीब छह बजे वह रोज की तरह ट्यूशन पढ़ाने के लिए अपने घर से निकली थी। उसका तय समय शाम 6:30 से 7:30 बजे तक पहली कोचिंग और फिर 7:30 से 8:30 बजे तक दूसरी कोचिंग पढ़ाने का था। आमतौर पर वह रात करीब नौ बजे तक सुरक्षित घर वापस लौट आती थी।

ये भी पढ़ें

उस दिन जब रात दस बजे तक रुचि घर नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने तुरंत उसके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन पूरी तरह से बंद आ रहा था। अनहोनी की आशंका के चलते परिजनों ने आसपास के रास्तों और जान-पहचान वालों के यहां खोजबीन शुरू की। रात करीब 12 बजे उन्होंने आपातकालीन सेवा 112 पर फोन करके मामले की सूचना दी। पुलिस मौके पर आई और सामान्य पूछताछ करके लौट गई, जिसके बाद पूरी रात परिजन खुद ही अपनी बेटी को इधर-उधर तलाशते रहे।

चौकियों के चक्कर और परिजनों द्वारा खुद सीसीटीवी फुटेज की जांच

पिता विमल पाल का आरोप है कि उसी रात वे रतनलाल चौकी पहुंचे और बेटी के अचानक लापता होने की लिखित सूचना दी। वहां मौजूद कर्मियों ने उन्हें फैक्ट्री एरिया चौकी जाने की बात कहकर टाल दिया। अगले दिन जब परिजन फैक्ट्री एरिया चौकी पहुंचे और अधिकारियों से बेटी को तलाशने के लिए प्रभावी कदम उठाने की गुहार लगाई, तब भी उन्हें इंतजार करने की सलाह दी गई। पुलिस की ओर से तुरंत सक्रियता न दिखने पर परिवार ने खुद ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल शुरू की।

दबौली वेस्ट में स्थित एक कैमरे की फुटेज में रुचि सड़क पर जाती हुई साफ दिखाई दी, लेकिन उस रास्ते के आगे लगे कैमरों में उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते तकनीक और जमीनी स्तर पर व्यापक तलाशी अभियान चलाती, तो शायद उनकी बेटी का सुराग पहले ही लग जाता और उसकी जान बचाई जा सकती थी। पुलिस की ढिलाई के कारण महत्वपूर्ण शुरुआती घंटे बेकार चले गए।

डायरी से मिले फोन नंबर और दो युवकों से पूछताछ

घर में तलाशी के दौरान परिजनों को रुचि की एक निजी डायरी हाथ लगी। इस डायरी के पन्नों पर ओमवीर नाम के एक युवक का फोन नंबर दर्ज था। जब परिवार वालों ने ओमवीर से संपर्क किया, तो उसने बताया कि लगभग एक साल पहले उसकी रुचि से बातचीत हुआ करती थी। इसके साथ ही ओमवीर ने आदर्श मिश्रा नाम के एक अन्य युवक के बारे में जानकारी दी और उसका मोबाइल नंबर भी परिजनों को उपलब्ध कराया।

परिजनों ने बिना देर किए दोनों युवकों के संपर्क नंबर पुलिस को सौंप दिए। परिजनों का गंभीर आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उन दोनों युवकों को केवल चौकी बुलाकर रस्मी पूछताछ की और कुछ ही देर में छोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि अब इन दोनों युवकों के बयानों के साथ-साथ रुचि के संपर्कों और उसकी आखिरी दिनों की गतिविधियों की नए सिरे से गहराई से जांच की जा रही है ताकि हत्या की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

ट्रैक किनारे मिली चप्पल, 200 मीटर आगे झाड़ियों में पड़ा मिला शव

शुक्रवार को हताश परिजन एक बार फिर रेलवे लाइन के आसपास अपनी बेटी की खोजबीन में जुटे थे। इसी दौरान उन्हें रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास रुचि की एक चप्पल लावारिस हालत में पड़ी दिखाई दी। परिजन उस चप्पल को लेकर तुरंत पुलिस के पास पहुंचे। पिता का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने चप्पल देखकर तुरंत हरकत में आने के बजाय परिजनों से ही यह सवाल दाग दिया कि वे पहले साबित करें कि यह चप्पल रुचि की ही है।

परिजनों द्वारा लगातार दबाव बनाने और आक्रोश जताने के बाद पुलिस की एक टीम उनके साथ रेलवे ट्रैक की ओर बढ़ी। चप्पल मिलने वाले स्थान से लगभग 200 मीटर आगे घनी झाड़ियों के बीच रुचि का क्षत-विक्षत शव पड़ा मिला। अपनी लाडली का शव देखते ही परिजन फफक पड़े और बिलखने लगे। सूचना मिलने पर उच्चाधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से मिट्टी, फिंगरप्रिंट और अन्य जरूरी साक्ष्य एकत्र किए।

पिता का दर्द: चार दिन तक हम भटकते रहे और पुलिस सबूत मांगती रही

पोस्टमार्टम गृह के बाहर मौजूद पिता विमल पाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि वे चार दिनों तक दर-दर भटकते रहे और पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। परिवार बार-बार इलाके के रेलवे ट्रैक और झाड़ियों में तलाशी लेने की विनती करता रहा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि पहले ही प्रभावी सर्च ऑपरेशन चलाया गया होता, तो नतीजा कुछ और हो सकता था।

विमल पाल ने बताया कि परिवार ने खुद सीसीटीवी फुटेज खंगाली, युवकों के नंबर जुटाए और अंततः रेलवे ट्रैक पर चप्पल भी खुद ही ढूंढी। इसके बावजूद पुलिस उनसे सबूत मांगती रही। पिता का कहना है कि पुलिस का काम पीड़ित परिवार को ही करना पड़ा, जिससे साफ जाहिर होता है कि शुरुआती जांच में कितनी बड़ी लापरवाही बरती गई है।

वकील बनकर पिता की चाय की दुकान बंद कराना चाहती थी रुचि

रुचि एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और उसका सपना एक सफल वकील बनने का था। वह पढ़ाई में बेहद होनहार और परिवार की जिम्मेदारियों को समझने वाली बेटी थी। पिता विमल पाल ने नम आंखों से याद करते हुए बताया कि रुचि अक्सर उनसे कहती थी कि पापा, जब मैं वकील बन जाऊंगी तो आपको यह चाय की दुकान नहीं लगाने दूंगी, आपको आराम कराऊंगी। वह अपने दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहती थी।

मृतका की मां गुड्डी देवी भी बेटी को याद कर बार-बार बेहोश हो रही थीं। उन्होंने बताया कि उस शाम घर से निकलते समय रुचि ने हंसते हुए चाय पी थी और सामान्य दिनों की तरह विदा लेकर ट्यूशन पढ़ाने गई थी। परिवार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी का इस तरह से शव वापस आएगा। बेटी की असमय और दर्दनाक मौत से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है।

अधिकारियों का रुख: हत्या का मुकदमा दर्ज, लापरवाही के आरोपों की भी होगी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि युवती का शव रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों से बरामद हुआ है। परिजनों द्वारा हत्या की आशंका व्यक्त किए जाने के बाद उनकी लिखित तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 103 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

डीसीपी साउथ ने यह भी स्पष्ट किया कि परिजनों द्वारा स्थानीय पुलिस पर लगाए गए लापरवाही और टालमटोल के तमाम आरोपों की भी अलग से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। पुलिस की विशेष टीमें अब हत्या के सटीक कारणों, युवती के उस सुनसान स्थान तक पहुंचने के हालात, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों और मृतका के संपर्क में रहे सभी लोगों की गहनता से पड़ताल कर रही हैं।

सवाल-जवाब

मृतका रुचि पाल कौन थीं और वह क्या करती थीं?
रुचि पाल 23 वर्षीय एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं, जो कानून की पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम करती थीं।
रुचि पाल कब और कहां से लापता हुई थीं?
वह 28 सितंबर की शाम करीब छह बजे कानपुर के दबौली वेस्ट स्थित अपने घर से कोचिंग पढ़ाने के लिए निकली थीं और उसके बाद नहीं लौटीं।
छात्रा का शव कहां और किस स्थिति में मिला?
शुक्रवार को दबौली वेस्ट में रेलवे ट्रैक किनारे झाड़ियों में उनकी चप्पल मिलने वाली जगह से करीब 200 मीटर दूर क्षत-विक्षत अवस्था में उनका शव मिला।
परिजनों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि पुलिस चार दिनों तक चौकियों के चक्कर कटवाती रही, सबूत मांगती रही और समय पर प्रभावी तलाशी अभियान नहीं चलाया।
पुलिस ने मामले में क्या कानूनी कार्रवाई की है?
डीसीपी साउथ के अनुसार परिजनों की तहरीर पर बीएनएस की धारा 103 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस लापरवाही के आरोपों की भी जांच कर रही है।
डायरी से किन लोगों के नाम सामने आए थे?
रुचि की डायरी से ओमवीर और आदर्श मिश्रा नाम के युवकों के मोबाइल नंबर मिले थे, जिनसे पुलिस ने चौकी में बुलाकर पूछताछ की थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp