राजस्थान के बारां जिले में डिजिटल निवेश के नाम पर एक स्थानीय व्यापारी की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अंतरराज्यीय जालसाजों के नेटवर्क पर पुलिस ने शिकंजा कसा है। ऑनलाइन ट्रेडिंग के झूठे प्लेटफॉर्म पर भारी मुनाफा दिलाने का सपना दिखाकर पीड़ित से करीब 92.75 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। इस मामले की पड़ताल करते हुए कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने एक डॉक्टर, कंप्यूटर इंजीनियर और फिजियोथेरेपिस्ट समेत चार नए आरोपियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए ये लोग सीधे पीड़ितों से संवाद करने के बजाय ठगी की रकम को खपाने के लिए बैंक खाते, पासबुक किट और चालू मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने का काम करते थे।
मुनाफे का झांसा देकर फंसाया जाल में
यह पूरा मामला बारां के रहने वाले कारोबारी विष्णु गालव से जुड़ा हुआ है। कुछ समय पहले अज्ञात साइबर अपराधियों ने अलग-अलग डिजिटल माध्यमों और संचार माध्यमों से विष्णु से संपर्क साधा था। उन्हें एक कथित ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर पूंजी लगाने के लिए प्रेरित किया गया और भरोसा दिलाया गया कि बेहद सीमित समय में उन्हें कई गुना रिटर्न हासिल होगा। सुनियोजित तरीके से विश्वास में लेने के बाद जालसाजों ने अलग-अलग किस्तों में व्यापारी से कुल 92.75 लाख रुपये विभिन्न खातों में जमा करवा लिए। जब रकम निकासी में अड़चनें आईं और मुनाफा नहीं मिला, तब पीड़ित ने स्थानीय थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
कमीशन का प्रलोभन और खातों का सौदा
दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जब पुलिस की तकनीकी टीम ने वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों के विवरण खंगाले, तो एक फिजियोथेरेपिस्ट राज पडसाला की व्यावसायिक फर्म का खाता जांच के दायरे में आया। पूछताछ और साक्ष्यों से उजागर हुआ कि राज ने प्रत्येक लेनदेन पर दो से तीन प्रतिशत तक मिलने वाले कमीशन के लालच में आकर अपनी फर्म का बैंक खाता गिरोह को सौंप दिया था। वित्तीय विश्लेषण से यह भी पता चला कि इस विशेष बैंक खाते में महज 10 से 15 दिनों की अल्प अवधि के भीतर लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ था। इतनी भारी रकम के आवागमन ने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए, जिसके बाद पुलिस इस पैसे के वास्तविक उद्गम और इससे जुड़े अन्य वित्तीय तारों को जोड़ने में जुट गई।
नेपाल पहुंचकर सौंपा गया बैंक किट और सिम
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार तक फैले हुए हैं। मामले से जुड़े आरोपियों ने बैंक द्वारा दी जाने वाली जरूरी किट, चेकबुक और सक्रिय मोबाइल सिम कार्ड एकत्र किए और उन्हें लेकर नेपाल की यात्रा की। सीमा पार नेपाल में उन्होंने साइबर अपराध सिंडिकेट के एक सक्रिय सदस्य से मुलाकात कर ये सारे दस्तावेज और सिम कार्ड उसके हवाले कर दिए। इन विदेशी व दूरदराज के ठिकानों से ठगी का सिंडिकेट संचालित किया जा रहा था और पीड़ितों से ऐंठी गई धनराशि को इन्हीं खातों के जरिए तेजी से कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस रैकेट में भूमिका स्पष्ट होने पर पुलिस ने डॉ. जयदीप कुमार, कंप्यूटर विशेषज्ञ याज्ञनिक रामाणी, लक्ष्मण वाघेला और फिजियोथेरेपिस्ट राज पडसाला को दबोच लिया।
लाखों की रकम होल्ड और रिकवरी की कार्रवाई
डिजिटल अपराध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से संपर्क साधकर संदिग्ध खातों में पड़ी लगभग 20 लाख रुपये की धनराशि को फ्रीज यानी होल्ड करवा दिया है। इसके अलावा तत्परता दिखाते हुए जांच दल ने पीड़ित कारोबारी को 10 लाख रुपये की राशि वापस भी दिलवा दी है। पुलिस के अनुसार इस व्यापक प्रकरण में अब तक कुल 10 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा चुका है, जिनमें खाता धारक, बिचौलिए और सिंडिकेट के अन्य सहयोगी शामिल हैं।
अनजान निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहने का परामर्श
जांच अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपियों ने कुल कितने बैंक खाते और सिम कार्ड नेपाल में बैठे गिरोह को सौंपे थे, और ठगी का बाकी पैसा किन-किन अंतिम खातों में ट्रांसफर किया गया। साथ ही आम नागरिकों को आगाह किया गया है कि सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स पर अल्पकालिक निवेश में अस्वाभाविक लाभ का दावा करने वाले किसी भी अज्ञात प्लेटफॉर्म पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी फर्म या व्यक्ति के खाते में रकम जमा करने से पहले संबंधित वित्तीय संस्था और ऐप की प्रामाणिकता की पूरी पड़ताल अवश्य कर लें।



















