बेंगलुरु की राजनीति में एक बार फिर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता आर. अशोक ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर डॉ. बीआर अंबेडकर विकास निगम यानी एडीसीएल में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी करने का गंभीर आरोप मढ़ा है। उनका दावा है कि हाशिए पर जीवन बसर करने वाले अनुसूचित जातियों के कल्याण और उत्थान के लिए आवंटित कुल 14.95 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को सुनियोजित तरीके से हड़प लिया गया। इसके लिए फर्जी बैंक खातों का जाल बिछाया गया, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और सावधि जमा यानी एफडी को नियमों के विरुद्ध समय से पहले ही बंद करा दिया गया।
वाल्मीकि निगम घोटाले के बाद एक और बड़ा मामला
भाजपा नेता आर. अशोक ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरा प्रकरण कर्नाटक के भीतर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में सामने आए कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय घोटालों की कड़ी का ही एक नया रूप है। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से 14 अक्टूबर को जारी की गई एक विज्ञप्ति का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि निगम के खाते में जमा जनता के इस धन को बेहद शातिर तरीके से धोखाधड़ी भरे लेनदेन के माध्यम से अन्यत्र डायवर्ट कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद से राज्य की प्रशासनिक मशीनरी और सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
राहुल गांधी की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल
इस सियासी घमासान के बीच भाजपा नेता ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष तौर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामाजिक न्याय से जुड़े बयानों और रुख पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने जनता के बीच यह सवाल रखा कि क्या कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उजागर हो रही ये कथित वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार राहुल गांधी के तथाकथित न्याय के सिद्धांत से मेल खाते हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि एक तरफ राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय और समानता का ढिंढोरा पीटा जाता है, तो वहीं दूसरी ओर राज्य के भीतर दलितों और पिछड़ों के हक का पैसा खुलेआम लूटा जा रहा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की साठगांठ और चुप्पी पर भी कड़ा एेतराज जताया है।
कानूनी कार्रवाई और ईडी की जांच का दायरा
इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने अंबेडकर विकास निगम के 14.95 करोड़ रुपये की इस कथित हेराफेरी के मामले में कड़े कदम उठाए हैं। जांच एजेंसी ने अयूब सैयद समेत कुल पांच प्रमुख आरोपियों के खिलाफ गत पांच अक्टूबर को धनशोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के प्रावधानों के अंतर्गत एक विशेष अदालत के समक्ष अपनी पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज कराई है। इस पूरी जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, बेंगलुरु द्वारा पूर्व में दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर हुई थी।
फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों का खेल
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। बेंगलुरु में स्थित स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की एचएएल द्वितीय चरण शाखा में पूरी चालाकी के साथ फर्जी दस्तावेजों को तैयार किया गया और पहचान की भारी धोखाधड़ी करते हुए निगम के नाम से एक फर्जी चालू खाता खोल दिया गया। इसके बाद निगम के नाम पर मौजूद पांच-पांच करोड़ रुपये की कुल चार सावधि जमाओं को जाली जमा रसीदों और फर्जी प्री-क्लोजर पत्रों का इस्तेमाल करते हुए मैच्योरिटी से पहले ही तुड़वा लिया गया। आधिकारिक दस्तावेजों और जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरी साजिश के जरिए कुल 14.95 करोड़ रुपये की भारी रकम को इधर-उधर किया गया।
धन की हेराफेरी और संपत्तियों की जब्ती
जांच एजेंसियों का यह स्पष्ट आरोप है कि इस ठगी से मिले पैसों को सीधे तौर पर ठिकाने लगाने के लिए कई अलग-अलग व्यक्तियों और संदिग्ध संस्थाओं के बैंक खातों में तेजी से स्थानांतरित किया गया। इसके बाद इस काले धन को नकद के रूप में निकालकर इसके असली स्रोत को पूरी तरह से छिपाने की नापाक कोशिश की गई। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इससे पहले भी कार्रवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को कुल 15 नामजद आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है, जिसमें इन तमाम लोगों की 6.02 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क करने या जब्त करने की मांग उठाई गई थी। इसके अलावा इसी कड़ी में गत 22 जुलाई को भी एक अन्य आरोपी की 24 लाख रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी तौर पर जब्त करने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।



















