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दुर्गा पूजा पर कोलकाता के फ्लाईओवर रंगने के बाद फिसलने लगीं बाइक, सुरक्षा और सजावट पर खड़ा हुआ सियासी घमासानभारत
16 अक्तू॰ 2026, 3:38 pm (18 मिनट पहले)· 0

दुर्गा पूजा पर कोलकाता के फ्लाईओवर रंगने के बाद फिसलने लगीं बाइक, सुरक्षा और सजावट पर खड़ा हुआ सियासी घमासान

दुर्गा पूजा के उपलक्ष्य में कोलकाता के गड़ियाहाट और चिंगरीघाटा फ्लाईओवर की सड़कों को चमकीले रंगों से सजाए जाने के बाद बारिश में बाइक फिसलने की घटनाओं ने सड़क सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक फैसले पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर महानगर कोलकाता को उत्सव के रंग में ढालने के लिए बड़े पैमाने पर सजावट अभियान चलाया जा रहा है। शहर के अलग-अलग कोनों में रोशनी की चकाचौंध और पारंपरिक अल्पना की झलक देखने को मिल रही है। इसी उत्सव के माहौल को भव्य बनाने के उद्देश्य से कोलकाता नगर निगम और हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स (HRBC) ने शहर के प्रमुख ब्रिजों और फ्लाईओवरों की सड़कों पर विशेष रंग-रोगन करने की योजना तैयार की। गड़ियाहाट और चिंगरीघाटा फ्लाईओवर की सड़कों पर चमकीले रंगों की कोटिंग का काम शुरू भी कर दिया गया था। शुरुआत में जहां कुछ नागरिकों ने शहर के इस बदले हुए स्वरूप की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ कई जानकारों और वाहन चालकों ने यह अंदेशा जताया कि इन बहुरंगी सड़कों पर गाड़ी चलाते वक्त रोशनी और दृश्यता संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा काफी बढ़ सकता है।

बारिश के बीच बाइक फिसलने का वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप

यह पूरा मामला तब गरमा गया जब बुधवार दोपहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें एक के बाद एक कई दोपहिया वाहन चालक सड़क पर अनियंत्रित होकर गिरते दिखाई दिए। फुटेज में देखा गया कि सड़क पर ऑयल पेंट किए जाने और साथ में हुई बारिश के चलते सतह पर फिसलन बहुत बढ़ गई, जिसके कारण लगातार तीन बाइकें स्किड होकर दुर्घटना की शिकार हो गईं। इस कथित 'रेनबो फ्लाईओवर' पर रंगीन और गीले हिस्से से गुजरते वक्त चालकों का संतुलन बिगड़ता साफ नजर आ रहा था। 14 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, इन घटनाओं के दौरान वास्तव में क्या घटित हुआ और क्या कोई व्यक्ति घायल हुआ, यह शुरुआती स्तर पर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका। संबंधित वीडियो की प्रामाणिकता तथा बाइक फिसलने के सटीक तकनीकी कारणों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

प्रशासनिक जांच के निर्देश और विभागीय सफाई

हादसों का दृश्य सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल के विभाग को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्निमित्रा पॉल ने पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जांच के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को मौके का मुआयना करने और उन सभी कारणों का बारीकी से पता लगाने का निर्देश दिया है जिनकी वजह से वाहन चालक गिर पड़े। अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पॉल ने कहा कि सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत सड़क पर फिसलन रोकने वाले यानी 'एंटी-स्किड' पेंट का प्रयोग किया गया था। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि इस कोटिंग की वजह से सड़क पर चलने वालों को दृश्यता या वाहन नियंत्रण में किसी भी तरह की व्यावहारिक दिक्कत आ रही है, तो प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं और आवश्यक बदलावों पर तुरंत विचार करेगा। जांच टीम इस बात का तकनीकी परीक्षण करेगी कि वाहनों के फिसलने के पीछे सड़क की कोटिंग थी, बारिश का पानी था या कोई अन्य कारक जिम्मेदार था।

विपक्षी दलों के तीखे तेवर और राजनीतिक खींचतान

फ्लाईओवर की सतह पर रंगाई को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुणाल घोष ने प्रशासनिक निर्णय पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि अंततः इस अवैज्ञानिक और खतरनाक पेंट को हटाना ही पड़ रहा है, तो फिर इतनी बचकानी हरकत की ही क्यों गई थी। उन्होंने सवाल दागा कि इन हादसों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कौन संभालेगा और जनता के पैसों की जो बर्बादी हुई है उसका जवाबदेह कौन है। उन्होंने चिंगरीघाटा हादसे और गड़ियाहाट में पेंट हटाने की तस्वीरों का हवाला देते हुए फैसले की दूरदर्शिता पर हमला बोला। वहीं टीएमसी ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में जनादेश चुराकर सत्ता में आई भाजपा सरकार आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रही है। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि हाल ही में रंगा गया यह फ्लाईओवर एक 'मौत का जाल' बन चुका है, जहां पहली ही बारिश में दोपहिया वाहन फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। टीएमसी ने इस घोर लापरवाही के लिए सीधे तौर पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल को जवाबदेह ठहराते हुए कहा कि बंगाल की जनता को सुरक्षित बुनियादी ढांचा चाहिए, न कि जानलेवा व्यवस्था।

टायर की ग्रिप और सड़क की कोटिंग का वैज्ञानिक गणित

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस बुनियादी वैज्ञानिक पहलू पर नई बहस छेड़ दी है कि क्या सजावटी रंग-रोगन से टायरों की सड़क पर पकड़ कमजोर पड़ जाती है। किसी भी वाहन का सुरक्षित संचालन इस बात पर टिका होता है कि उसके पहिए सड़क की सतह के साथ कितना घर्षण यानी फ्रिक्शन बना पाते हैं। टायर के रबर और सड़क के बीच मौजूद यही घर्षण चालक को गति बढ़ाने, सटीक ब्रेक लगाने, दिशा मोड़ने और खासतौर पर घुमावदार मोड़ों पर स्थिरता बनाए रखने की क्षमता देता है। जब डामर वाली सामान्य सड़क पर पेंट की परत चढ़ाई जाती है, तो वह सड़क की प्राकृतिक बनावट और खुरदरेपन को बदल देती है। इस्तेमाल किए गए पेंट की संरचना, सामग्री की गुणवत्ता, उसकी ऊपरी फिनिश और डामर की पूर्व स्थिति के आधार पर नई रंगे सतह का घर्षण स्तर पुरानी सड़क की तुलना में उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। जब ऐसी सतह पर बारिश का पानी जमा होता है, तो पानी टायर और सड़क के बीच एक चिकनी परत बना देता है जिससे पकड़ और भी कमजोर हो जाती है। यदि सड़क की सतह आवश्यक ब्रेकिंग या स्टीयरिंग घर्षण देने में नाकाम रहती है, तो पहियों का स्किड होना स्वाभाविक हो जाता है, हालांकि सभी प्रकार की सड़क कोटिंग्स एक समान जोखिम पैदा नहीं करती हैं।

सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के बीच कैसे बने संतुलन

सड़क विशेषज्ञों और योजनाकारों का मानना है कि बुनियादी सुरक्षा से समझौता किए बिना भी सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि सड़क पर किसी भी प्रकार की कलाकृति केवल उन्हीं हिस्सों में बनाई जाए जहां वाहनों के टायरों का सीधा संपर्क न होता हो। कोलकाता की पारंपरिक अल्पना जैसे सुंदर डिजाइनों को मुख्य कैरिजवे के बजाय चौड़े फुटपाथों, पैदल यात्रियों के प्लाजा, सड़क किनारे की सुरक्षा दीवारों और ट्रैफिक आइलैंड के खाली हिस्सों पर उकेरा जा सकता है। इसके अलावा, यदि सड़क की सतह पर किसी सामग्री का उपयोग करना ही हो, तो अधिकारियों को केवल वही उत्पाद चुनने चाहिए जो विशेष रूप से भारी ट्रैफिक और वाहन सुरक्षा के लिए प्रमाणित हों। किसी भी सामग्री को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले गीली सतह पर उसकी फिसलन प्रतिरोध क्षमता, स्थायित्व, दृश्यता और डामर के साथ उसके तालमेल की कड़े प्रयोगशाला और मैदानी परीक्षणों में जांच होनी चाहिए। अधिक ब्रेकिंग और मोड़ों वाली जगहों पर इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार विशेष हाई-फ्रिक्शन सरफेसिंग सिस्टम लगाए जाने चाहिए, जिनमें टिकाऊ एग्रीगेट और मजबूत बाइंडर का मिश्रण हो।

ढांचागत सुधारों और दृश्य कला को प्राथमिकता

शहरी बुनियादी ढांचे को खूबसूरत बनाने के लिए हाई-स्पीड लेन को रंगने के बजाय अन्य रचनात्मक विकल्पों को अपनाया जाना अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माना जाता है। सही ढंग से डिजाइन किए गए कर्ब, ऊंचे पैदल पारपथ और धीमी गति वाले जोन में पैटर्न वाली सतहों के जरिए रंगों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही रिटेनिंग दीवारों पर भित्ति चित्र, रंगीन खंभे, कलात्मक प्रकाश व्यवस्था, सजावटी रेलिंग और सुरक्षित स्थानों पर स्थापित सार्वजनिक कलाकृतियां वाहनों के पहियों के नीचे की सतह को बदले बिना फ्लाईओवरों को एक नया और आकर्षक रूप दे सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी सौंदर्यीकरण अभियान में गड्ढों की मरम्मत, समुचित जल निकासी, परावर्तक लेन मार्किंग, स्पष्ट यातायात संकेत, पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग और नियमित रखरखाव जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। सजावटी पेंटिंग किसी भी स्थिति में सड़क की भौतिक कमियों को छिपाने वाली नहीं होनी चाहिए और न ही उससे चालकों का ध्यान जरूरी लेन मार्किंग या संकेतों से भटकना चाहिए। किसी भी रंगे हुए मार्ग को आम जनता के लिए खोलने से पहले गीली और सूखी स्थिति में उसकी फिसलन प्रतिरोधक क्षमता, सतह की बनावट, जल निकासी और टिकाऊपन का विस्तृत मूल्यांकन किया जाना बेहद जरूरी है।

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सवाल-जवाब

कोलकाता के फ्लाईओवरों को रंगने का फैसला क्यों लिया गया था?
दुर्गा पूजा के अवसर पर शहर के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत कोलकाता नगर निगम और हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स (HRBC) ने फ्लाईओवरों को रंगने का काम शुरू किया था।
किन फ्लाईओवरों पर पेंटिंग का काम चल रहा था?
कोलकाता के गड़ियाहाट फ्लाईओवर और चिंगरीघाटा फ्लाईओवर की सड़कों पर रंगाई का काम किया जा रहा था।
सड़क पर रंगाई के बाद क्या हादसा हुआ?
सड़क पर ऑयल पेंट और बारिश के कारण फिसलन बढ़ गई, जिससे बुधवार दोपहर को एक के बाद एक तीन बाइकें फिसलकर गिर गईं।
हादसों पर शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने क्या सफाई दी?
मंत्री ने बताया कि काम में 'एंटी-स्किड' पेंट का उपयोग हुआ था और उन्होंने अधिकारियों को घटना की जांच करने तथा आवश्यकता पड़ने पर बदलाव के निर्देश दिए हैं।
टीएमसी और कुणाल घोष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कुणाल घोष ने अवैज्ञानिक तरीके से जनता के पैसे बर्बाद करने का आरोप लगाया, जबकि टीएमसी ने इसे जनता की जान जोखिम में डालने वाला 'मौत का जाल' बताया।
सड़क पर साधारण पेंट लगाने से वाहन क्यों फिसलते हैं?
पेंट सड़क के खुरदरेपन को ढक देता है जिससे टायर और डामर के बीच घर्षण कम हो जाता है, और बारिश के पानी के साथ मिलकर यह सतह को बेहद चिकना बना देता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सौंदर्यीकरण का सही तरीका क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कलाकृतियां केवल फुटपाथों, खंभों और दीवारों पर बनाई जानी चाहिए, न कि उस कैरिजवे पर जहां गाड़ियां तेज गति से चलती हैं।
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