अभिनेता इमरान खान ने कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से 10 अक्टूबर को आयोजित किए गए एक विरोध-प्रदर्शन में शिरकत की थी। इस दौरान मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी ले लिया था। बाद की जांच में यह बात सामने आई कि इमरान अमेरिका के नागरिक हैं और उनके पास अमेरिकी नागरिकता है। भारत में रहकर काम करने के लिए उन्हें ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया यानी OCI कार्ड मिला हुआ है। यह तथ्य स्पष्ट होने के बाद अधिकारियों ने उन्हें ‘लीव इंडिया’ नोटिस थमा दिया, जिसके तहत उन्हें 28 अक्टूबर तक का समय दिया गया था। इसी से मिलते-जुलते एक मामले में ठीक पांच साल पहले 2020 में पोलैंड के एक छात्र को भी देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था, जिसके खिलाफ वह कलकत्ता हाईकोर्ट चले गए थे और अदालत ने सरकार के उस नोटिस को रद्द कर दिया था।
साल 2020 के उस प्रकरण में पोलैंड के छात्र कामिल सिएडचिंस्की के खिलाफ ‘लीव इंडिया नोटिस’ जारी किया गया था, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था। उस छात्र ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के विरोध में कोलकाता में निकाली गई एक रैली में हिस्सा लिया था। उस वक्त विदेशी नागरिक कानून के नियमों के तहत सरकार ने यह प्रशासनिक कार्रवाई की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने नोटिस में कमियां पाते हुए उसे निरस्त कर दिया। अदालत ने उस समय के लागू कानूनों और दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट किया कि केवल किसी राजनीतिक रैली में शामिल हो जाना ही इस तरह की सख्त कार्रवाई को सही ठहराने के लिए काफी नहीं है। छात्र की तरफ से चुनौती दिए जाने पर अदालत ने माना कि जब तक पुख्ता कानूनी आधार न हो, केवल राजनीतिक प्रदर्शन में भाग लेने भर से किसी विदेशी नागरिक के खिलाफ देश छोड़ने का आदेश उचित नहीं ठहराया जा सकता।
इमरान खान के समक्ष यह कानूनी विकल्प खुला हुआ है कि वे ‘लीव इंडिया’ नोटिस को वापस लेने या उस पर नए सिरे से विचार करने के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय यानी FRRO या केंद्र सरकार के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। हालांकि, 2025 के आव्रजन कानून की धारा 7 में अपील करने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दी गई है। इसके उलट, नागरिकता अधिनियम की धारा 7-D के तहत ओसीआई रजिस्ट्रेशन को रद्द करने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का उचित मौका देने का नियम है। इसके अलावा इमरान खान के पास भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी मौजूद है। वे इस नोटिस की वैधता को अदालत में चुनौती दे सकते हैं और इसके अमल पर अंतरिम रोक लगाने की गुहार लगा सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खान के वकील इस मामले को लेकर पहले ही हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं।


















