त्योहारों का मौसम अपने साथ खुशियां और उल्लास लेकर आता है, लेकिन कई बार परंपराओं की आड़ में बेजुबान जीवों पर भारी अत्याचार भी किए जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने 20 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण और सख्त अपील जारी की है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि अगर उन्हें कहीं भी नीलकंठ पक्षी पिंजरे में बंद दिखाई दे, तो वे तुरंत टोल-फ्री नंबर 18004255364, 9803338666 या 112 पर कॉल करके पुलिस को इसकी सूचना दें। उनका मुख्य उद्देश्य इस पावन पर्व को पूरी तरह से क्रूरता-मुक्त बनाना और राज्य पक्षी की रक्षा करना है।
तेलंगाना के राजकीय पक्षी पर मंडराता खतरा
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए वीसी सज्जनार ने स्पष्ट किया कि त्योहार का असली अर्थ खुशी, आजादी और सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा का भाव रखना है। इसके बावजूद, दशहरे के शुभ अवसर पर कुछ लोग तेलंगाना के राजकीय पक्षी यानी इंडियन रोलर के पंख काटकर उसे व्यापार के उद्देश्य से पिंजरों में कैद कर लेते हैं। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि किसी बेजुबान जीव को उसकी स्वतंत्रता से वंचित कर, उसे बिना भोजन और पानी के तड़पता देखना आखिर किसी के लिए भी फायदेमंद कैसे हो सकता है? किसी को भी उस बेकसूर पक्षी की पीड़ा में अपनी भलाई या सौभाग्य कैसे नजर आ सकता है?
शुभता की मान्यता और पर्यावरण में महत्व
समाज में यह पुरानी मान्यता चली आ रही है कि विजय दशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना बेहद शुभ होता है और इससे घर में सौभाग्य आता है। इसी अंधी आस्था के चलते पक्षियों को जंगल से बेरहमी से पकड़ लिया जाता है, उनके पंखों पर गोंद लगा दिया जाता है या उनके पैरों को चिपका दिया जाता है ताकि वे उड़ न सकें। इस अमानवीय व्यवहार के कारण पक्षियों को भयानक पीड़ा सहनी पड़ती है और अक्सर कुछ ही समय में उनकी मौत हो जाती है। वीसी सज्जनार ने याद दिलाया कि नीलकंठ पक्षी असल में हमारे पर्यावरण का सच्चा रक्षक और किसानों का पक्का मित्र है। जब यह सुंदर पक्षी खुले नीले आसमान में स्वतंत्र रूप से उड़ान भरता है, तभी प्रकृति की असली सुंदरता और हमारे समाज का असली सम्मान झलकता है।
कानूनी कार्रवाई और कड़े निर्देश
कानून की नजर में भी इस तरह के कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत इंडियन रोलर पक्षी को पकड़ना, बेचना या अपने पास प्रदर्शित करना पूरी तरह से अवैध है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाने की अपील की है ताकि इन बेजुबान जीवों को आजादी मिल सके। किसी भी परिस्थिति में पिंजरे में बंद पक्षियों के प्रदर्शन को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। लोगों से साफ कहा गया है कि यदि उन्हें कोई भी व्यक्ति इस तरह के अवैध कार्यों में लिप्त मिले, तो वे बिना किसी देरी के निर्धारित हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।
पोस्टर विमोचन और वन विभाग की चेतावनी
इस अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के लिए वीसी सज्जनार ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में 'अभी कार्रवाई करें, नीलकंठ को बचाएं' शीर्षक से विशेष पोस्टर भी जारी किए हैं। इसके साथ ही तेलंगाना वन विभाग ने भी आम जनता से आगे आने की अपील की है ताकि राज्य पक्षी का संरक्षण किया जा सके और दशहरा पर्व को पूरी तरह अहिंसक और क्रूरता-मुक्त बनाया जा सके। विभाग ने भी अपने आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर नीलकंठ को पकड़े जाने या पिंजरे में रखने की सूचना देने का निर्देश दिया है।
अस्तित्व पर मंडराते बड़े खतरे
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, देश भर में इस प्रजाति को लगातार गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इसकी घटती संख्या को लेकर पर्यावरणविदों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। हालिया अध्ययनों और रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्राकृतिक आवासों का तेजी से नष्ट होना, कृषि में कीटनाशकों का अत्यधिक इस्तेमाल और धड़ल्ले से चल रहा अवैध शिकार इस पक्षी के अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे बन चुके हैं। यदि समय रहते इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इस अनमोल प्रजाति को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।



















