मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में पुलिस ने हवाला और फर्जी दस्तावेजों के जरिए 2 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह की साजिश नाकाम कर दी है। ब्यावरा शहर के निवासी देवेंद्र पालीवाल से पैसे दोगुने करने के नाम पर हुई इस विशाल ठगी की गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। इस आपराधिक तंत्र का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस बल ने देश के विभिन्न हिस्सों से 14 आरोपियों को अपनी कस्टडी में लिया है। राजगढ़ के एसपी अमित कुमार तोलानी ने पुलिस नियंत्रण कक्ष में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए इस पूरे घटनाक्रम और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की।
जांच के लिए बनीं 10 टीमें, 3000 किलोमीटर तक चला पीछा
इस केस की जांच के लिए पुलिस विभाग ने एक विशेष रणनीति तैयार की, जिसमें 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल कर 10 अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। जांच दल ने लगातार एक महीने तक मेहनत करते हुए महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित लगभग 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दबिश दी। अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस कर्मियों ने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और विभिन्न रास्तों व संदिग्ध ठिकानों पर लगे करीब 3000 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। कड़ी मशक्कत के बाद टीमों ने अलग-अलग राज्यों से 14 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई।
ब्रांडेड कंपनियों और महंगी गाड़ियों का सहारा लेकर जीतते थे भरोसा
एसपी अमित कुमार तोलानी ने ठगी के तरीके का ब्योरा देते हुए बताया कि गिरोह के सदस्य सबसे पहले आर्थिक रूप से समृद्ध या पैसों की आवश्यकता वाले लोगों की पहचान करते थे। इसके बाद आरोपी उनसे संपर्क साधकर खुद को बड़ी-बड़ी प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे। शिकार को प्रभावित करने के लिए वे महंगी गाड़ियों में यात्रा करते थे और आलीशान होटलों में बैठकें आयोजित करते थे। भरोसा मजबूत करने के लिए वे फर्जी ईमेल आईडी, जाली स्वीकृति पत्र और फर्जी भुगतान संदेश दिखाते थे। जब पीड़ित पूरी तरह उनके जाल में फंस जाता था, तो वे उनसे भारी भरकम नकदी ऐंठ लेते थे।
हवाला और आंगड़िया नेटवर्क से पैसों की हेराफेरी
पीड़ित से नकदी हासिल करने के बाद गिरोह इस राशि को हवाला और आंगड़िया माध्यमों के जरिए अलग-अलग शहरों और लोगों तक पहुंचाता था। ब्यावरा निवासी देवेंद्र (पिता कृपाशंकर पालीवाल) के साथ 24 जुलाई 2026 को हुई 2 करोड़ रुपये की ठगी में भी इसी तरीके का इस्तेमाल किया गया था। रकम अलग-अलग जगहों पर पहुंचने के बाद सभी सदस्य उसे आपस में बांट लेते थे और पहचान छिपाने के लिए अपने फोन नंबर तुरंत बदल लेते थे। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास से 4 वाहन और 19 एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपियों की पहचान
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों में ठाणे का रहने वाला आरिफ (पिता साजोद्दीन हुसैन), मुंबई निवासी अशोक (पिता मांगीलाल चौधरी), जोधपुर का रहने वाला नवीन जैन तथा पश्चिम बंगाल के सन्नी उर्फ शमीम मंडल और मुस्कीम मंडल शामिल हैं। इनके अलावा गिरोह के अन्य सहयोगियों को भी कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि राजगढ़ क्षेत्र में हाल ही में टेलीग्राम के जरिए 28 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला भी सामने आया था, जिसे पुलिस ने सुलझा लिया था।



















