सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल को तगड़ा झटका देते हुए दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपनी सुनवाई के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। गोवा सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि सजा को चुनौती देने से पहले उन्हें समर्पण कर देना चाहिए था, जिस पर अदालत ने यह सख्त रुख अपनाया है।
शीर्ष अदालत का कड़ा निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया है कि तरुण तेजपाल को तय की गई दो सप्ताह की टाइमलाइन के भीतर ही सरेंडर करना होगा। इस मामले में उन्हें अब तक न्यायपालिका से कोई भी अंतरिम राहत या सुरक्षा नहीं मिल पाई है। गोवा सरकार की दलीलों को आधार बनाते हुए अदालत ने यह समयसीमा तय की है जिसके तहत उन्हें निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करना ही होगा।
क्या है पूरा मामला और सजा
गौरतलब है कि तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल को एक मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के खिलाफ उन्होंने कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही थी और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, अब शीर्ष अदालत के इस कड़े आदेश के बाद उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और उन्हें तय समय सीमा के भीतर पुलिस या अदालत के सामने पेश होना होगा।



















