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चीन ने पीली नदी के नीचे बनाई विशाल डबल डेकर सुरंग, भारी वाहनों का संचालन हुआ शुरूतकनीक
25 अग॰ 2026, 2:59 pm (1 घंटे पहले)· 3

चीन ने पीली नदी के नीचे बनाई विशाल डबल डेकर सुरंग, भारी वाहनों का संचालन हुआ शुरू

चीन ने शेडोंग प्रांत के जिनान शहर में पीली नदी के नीचे दुनिया की सबसे बड़ी व्यास वाली डबल डेकर शील्ड सुरंग का निर्माण पूरा कर इसे आधिकारिक तौर पर यातायात के लिए खोल दिया है।

दुनियाभर में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी आधुनिक तकनीक और हैरान करने वाले निर्माण कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले देश चीन ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने सबको चौंका दिया है। एक समय था जब इस तरह के बड़े भूमिगत प्रोजेक्ट्स को असंभव माना जाता था, लेकिन अब तकनीक के दम पर नामुमकिन दिखने वाली चीजें भी धरातल पर उतर रही हैं। हाल ही में चीन ने अपने देश की एक बेहद प्रमुख नदी के अंदर से गुजरने वाली एक ऐसी डबल डेकर सुरंग तैयार कर ली है, जो अपनी विशालता और बनावट के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद अब इसे आधिकारिक तौर पर चालू भी कर दिया गया है, जिससे वहां के स्थानीय परिवहन को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यह पूरा आधुनिक इंजीनियरिंग चमत्कार पूर्वी चीन के शेडोंग प्रांत के जिनान शहर में स्थित है। यहां पानी के नीचे बनाई गई यह दुनिया की सबसे बड़ी व्यास वाली शील्ड सुरंग है, जिसे अब यातायात के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है। इस शानदार उपलब्धि की जानकारी हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से सामने आई है, जिसमें बताया गया कि इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। चीन की इंजीनियरिंग कंपनियों और निर्माण दलों ने इस विशाल परियोजना को तय समय और मानकों के भीतर पूरा करके एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया है, जिसकी गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है।

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उपलब्ध विवरण के अनुसार, चीन में तैयार की गई इस अंडरवॉटर शील्ड सुरंग की कुल लंबाई लगभग 5,755 मीटर है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका सिंगल-बोर यानी एक ही सुरंग के भीतर डबल-डेक डिजाइन होना है। इसका सीधा मतलब यह है कि एक ही मुख्य सुरंग के ढांचे के अंदर दो अलग-अलग मंजिलें बनाई गई हैं, जहां ऊपरी हिस्से और निचले हिस्से दोनों तरफ से वाहन गुजर सकेंगे। इस अनूठी संरचना की डिजाइन स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। इस तय रफ्तार पर वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से संचालित होगा, जिससे यात्रियों का कीमती समय बचेगा और परिवहन व्यवस्था को एक अलग स्तर की मजबूती मिलेगी।

सुरंग के ढांचागत विस्तार पर गौर करें तो इसका मुख्य शील्ड हिस्सा लगभग 3,290 मीटर लंबा है। इस विशालकाय और जटिल संरचना को जमीन के नीचे सुरक्षित रूप से तराशने के लिए 17.5 मीटर व्यास वाली एक बेहद शक्तिशाली और बड़ी टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम का इस्तेमाल किया गया था। इस मशीन के जरिए ही इतनी भारी-भरकम खुदाई और निर्माण का काम संभव हो पाया है, जो सामान्य इंजीनियरिंग के दायरे से काफी आगे की बात है।

यह अपनी तरह की पहली ऐसी सिंगल-बोर डबल-डेक शील्ड सुरंग है, जो सीधे पीली नदी यानी येलो रिवर के तल के नीचे से होकर गुजरती है। इस मार्ग का निर्माण कार्य नदी के संवेदनशील तटबंधों और खुद नदी के भीतर के अति-संवेदनशील भौगोलिक इलाकों को पार करते हुए पूरा किया गया है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान इंजीनियरों और तकनीकी टीमों के सामने कई गंभीर बाधाएं आईं। चीनी पक्ष की ओर से साझा की गई जानकारियों में यह बात बार-बार सामने आई कि इस मेगा प्रोजेक्ट में कदम-कदम पर बड़ी चुनौतियां थीं। निर्माण दल ने कुल 28 बड़ी तकनीकी अड़चनों को सफलतापूर्वक पार किया। इन जटिल मुश्किलों में खुदाई के दौरान जमीन की स्थिरता को बरकरार रखना, पीली नदी के तटबंध के ठीक नीचे से गुजरते वक्त भूस्खलन या जमीन धंसने जैसी घटनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण पाना, बड़े सेक्शन वाले सुरंग हिस्सों को किसी भी स्थिति में ऊपर उठने से रोकना और भारी मात्रा में निकलने वाले कीचड़ यानी स्लरी का पर्यावरण के अनुकूल व कुशल तरीके से निपटारा करना शामिल था।

इस टनल के निर्माण के सफर में टीम ने कई अद्भुत रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं। निर्माण कार्य के दौरान एक ही दिन में अधिकतम 18 मीटर तक की खुदाई करने का मील का पत्थर हासिल किया गया। इसके अलावा, एक महीने के भीतर 426 मीटर आगे बढ़ने का रिकॉर्ड भी बनाया गया। 17 मीटर क्लास की शील्ड टनलिंग के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा विश्व रिकॉर्ड माना जा रहा है, जिसने निर्माण क्षेत्र के पुराने सभी पैमानों को पीछे छोड़ दिया है।

पिछले कुछ वर्षों से देखा जाए तो चीन लगभग हर क्षेत्र में अपनी औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहा है। वहां का शील्ड टनलिंग उद्योग बेहद तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है। ड्रैगन के नाम से पहचाना जाने वाला यह देश वर्तमान में कई अन्य विशाल और जटिल प्रोजेक्ट्स पर भी एक साथ काम कर रहा है। इनमें समुद्र की अथाह गहराइयों के नीचे बनाई जाने वाली अंडरवॉटर टनल का काम भी शामिल है, जो आने वाले समय में आवागमन के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल कर रख सकता है।

तकनीकी जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय में चीन की तकनीकी दक्षता में अभूतपूर्व सुधार आया है और वैश्विक बाजार में उसकी पहुंच भी तेजी से बढ़ी है। भूमिगत निर्माण कार्यों के लिए अब शील्ड मशीनें तकनीक के एक बिल्कुल नए और उन्नत चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। देश के भीतर की भारी मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे निर्यात के अवसर दोनों ही इस क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। इस प्रकार की तेज तकनीकी प्रगति के कारण ही अब इतने बड़े और विशाल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स बहुत कम समय में धरातल पर उतर पा रहे हैं। चीन का टनल बोरिंग मशीन उद्योग अब केवल बड़े पैमाने पर घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उससे कहीं आगे निकलकर अधिक स्मार्ट, अत्यधिक कुशल और वैश्विक स्तर पर कड़ी टक्कर देने वाला बनता जा रहा है।

इन तमाम पहलुओं को देखते हुए यह बात स्पष्ट हो जाती है कि यह सुरंग केवल एक सामान्य निर्माण परियोजना भर नहीं है। यह चीन की उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग क्षमता, बेहद कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने की जिद्द और आधुनिक तकनीक के सर्वोत्कृष्ट इस्तेमाल का एक जीता-जागता उदाहरण है। पीली नदी जैसे विशाल, वेगवान और संवेदनशील इलाके के भूभाग के नीचे इस तरह की भव्य सुरंग का निर्माण करना अपने आप में एक बहुत बड़ा जोखिम भरा काम था। लेकिन अत्याधुनिक मशीनों के बेड़े, मजबूत साजो-सामान और कुशल इंजीनियरों की समर्पित टीम की बदौलत ही इस असंभव से दिखने वाले सपने को आखिरकार वास्तविकता में बदला जा सका है।

सवाल-जवाब

यह डबल डेकर सुरंग किस देश में बनाई गई है?
यह सुरंग चीन के शेडोंग प्रांत के जिनान शहर में बनाई गई है।
यह सुरंग किस नदी के नीचे से गुजरती है?
यह सुरंग चीन की प्रसिद्ध पीली नदी यानी येलो रिवर के नीचे से गुजरती है।
इस सुरंग की कुल लंबाई कितनी है?
इस अंडरवॉटर शील्ड सुरंग की कुल लंबाई लगभग 5,755 मीटर है।
सुरंग के निर्माण में किस व्यास की मशीन का इस्तेमाल हुआ?
इसे बनाने के लिए 17.5 मीटर व्यास वाली विशाल टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया था।
इस सुरंग की डिजाइन स्पीड कितनी तय की गई है?
इस सुरंग की डिजाइन स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।
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