दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही स्पिरिट एयरलाइंस द्वारा अपने डिजिटल रिकॉर्ड्स को गूगल को बेचे जाने के फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रस्तावित सौदे के तहत कंपनी के पास मौजूद विशाल डेटाबेस को तकनीकी दिग्गजों को सौंपने की तैयारी है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम्स और मॉडल्स को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। गूगल के एक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि इस लेनदेन में ग्राहकों का कोई भी डेटा शामिल नहीं होगा और कंपनी को इस सेट से किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त नहीं होगी। यह विजयी प्रस्ताव, जिसे मर्सर के सात दशमलव पांच मिलियन डॉलर के मुकाबले चुना गया है, अब एक जज की औपचारिक मंजूरी के इंतजार में है।
कर्मचारी संघ का कड़ा विरोध और कानूनी आपत्तियां
यदि स्पिरिट एयरलाइंस के पूर्व फ्लाइट अटेंडेंट्स की चली, तो यह सौदा इतनी आसानी से सिरे नहीं चढ़ पाएगा। अदालत द्वारा गूगल की जीत की घोषणा किए जाने के ठीक कुछ दिनों बाद, पांच हजार पांच सौ पूर्व स्पिरिट एयरलाइंस फ्लाइट अटेंडेंट्स का प्रतिनिधित्व करने वाले श्रम संघ ने इस बिक्री के खिलाफ आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज करा दी है। एसोसिएशन ऑफ फ्लाइट अटेंडेंट्स के वकीलों का तर्क है कि इस खरीदारी में कर्मचारियों से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील और निजी जानकारियां बड़े पैमाने पर शामिल हैं। उनका मानना है कि गूगल द्वारा दिए जाने वाले सुरक्षा के आश्वासन भी दशकों पुराने उन फ्लाइट अटेंडेंट्स की प्राइवेसी के हनन को रोकने में नाकाम साबित होंगे, जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके दफ्तर के रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल एआई सिस्टम्स को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा।
एसोसिएशन ऑफ फ्लाइट अटेंडेंट्स की अध्यक्ष सारा नेल्सन ने एक लिखित बयान में इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कर्मचारी डेटा बेचने का कोई तुक नहीं बनता और यह पूरी तरह से अनुचित है। यह कानूनी विरोध एआई डेटा युद्ध के मोर्चे पर एक नया विवाद पैदा कर रहा है, क्योंकि गूगल, ओपनएआई, एंथ्रोपिक और मर्सर जैसी बड़ी कंपनियां अपने उत्पादों को प्रशिक्षित करने के वास्ते नए डेटा स्रोतों की तलाश में जुटी हुई हैं।
उपभोक्ता बनाम श्रमिक डेटा सुरक्षा का गंभीर संकट
यह मामला उपभोक्ता डेटा और श्रमिक डेटा के बीच की सुरक्षात्मक खाई को पूरी तरह से उजागर करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना कॉर्पोरेट घरानों और श्रम संगठनों के बीच कर्मचारी डेटा की बिक्री और उसके एआई प्रशिक्षण में इस्तेमाल को लेकर हुआ पहला सार्वजनिक टकराव है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के कानून के प्रोफेसर सीमा पटेल, जो श्रम और तकनीक मामलों का अध्ययन करती हैं, का कहना है कि कर्मचारी द्वारा उत्पादित सूचना और उसकी निजी जानकारी के बीच कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं है और कानून इस मामले में अभी काफी पीछे चल रहा है।
पिछले कुछ महीनों के दौरान उन स्टार्टअप्स ने भारी मुनाफा कमाया है जो दिवालिया हो चुकी कंपनियों के पुराने स्लैक संदेश, गिटहब सामग्री और गूगल ड्राइव्स को एआई कंपनियों को बेच रहे हैं। इसके साथ ही, एलीसेंट्रिक डेटा संग्रह के प्रयास भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां कंपनियां इंसानों को खाना पकाने, रसोई साफ करने और फैक्ट्री लाइनों पर काम करते हुए रिकॉर्ड कर रही हैं ताकि मशीनों को प्रशिक्षित किया जा सके।
सौदे में शामिल विशाल डेटा का विवरण
अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, स्पिरिट एयरलाइंस के इस डेटा लेनदेन में दस लाख से अधिक टाइम-कार्ड रिकॉर्ड, एक लाख पचहत्तर हजार से ज्यादा कर्मचारी रिकॉर्ड, लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों के टैक्स फॉर्म, रोजगार अनुबंध और मुकदमेबाजी की फाइलें शामिल हैं। इसके अलावा अस्सी हजार ईमेल खाते, सत्रह मिलियन व्यक्तिगत रूप से स्वामित्व वाली माइक्रोसॉफ्ट वनड्राइव आइटम्स, बीस दशमलव छह मिलियन साझा माइक्रोसॉफ्ट शेयरपॉइंट फाइलें और पांच सौ मिलियन माइक्रोसॉफ्ट टीम्स रिकॉर्ड भी इस दायरे में आते हैं।
अदालत के कागजातों में उस प्रक्रिया का जिक्र किया गया है जिसके तहत खरीदार यानी गूगल एक तीसरे पक्ष का चयन करेगा जो डेटा से उन तत्वों को हटाएगा जिनका उपयोग किसी विशेष उपभोक्ता से जानकारी जोड़ने के लिए किया जा सकता है। इस डेटा बिक्री से संबंधित एक सुनवाई को अब नौ सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है।
कर्मचारियों की व्यक्तिगत चिंताएं और गोपनीयता का डर
एक पूर्व स्पिरिट एयरलाइंस फ्लाइट अटेंडेंट ने इस संभावित डेटा बिक्री को बेहद चिंताजनक करार दिया है। नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए उस कर्मचारी ने बताया कि उन्हें इस बात का अंदेशा था कि उपभोक्ता डेटा बेचा जा सकता है, लेकिन यह कभी नहीं सोचा था कि वे कर्मचारियों की निजी जानकारी को एआई के लिए बेचने की इतनी हिम्मत दिखाएंगे।
कर्मचारी ने खुलासा किया कि उनके और अन्य साथियों के ईमेल खातों तथा माइक्रोसॉफ्ट फाइलों में अत्यंत संवेदनशील व्यक्तिगत और चिकित्सीय जानकारियां दर्ज थीं, जिन्हें उन्होंने एयरलाइंस और बीमा समझौतों के तहत साझा किया था। इनमें गर्भपात से लेकर घरेलू हिंसा की घटनाओं और यूनियन अनुबंध वार्ताओं तक का ब्योरा शामिल है। उन्होंने कहा कि इस पूरी स्थिति को लेकर कर्मचारियों के मन में खुद को बेहद आहत महसूस करने की एक आम सहमति बन चुकी है।
अदालत में बहस और भविष्य के कानूनी निहितार्थ
अपनी कानूनी आपत्ति में यूनियन का तर्क है कि कर्मचारी डेटा को डीआइडेंटिफ़ाई करना गोपनीयता प्रदान करने के समान नहीं है, क्योंकि एआई की मदद से विशिष्ट नामों के बिना भी विभिन्न डेटासेट से निजी जानकारियों को दोबारा जोड़ना बहुत आसान हो जाता है। वकीलों ने लिखा है कि इस लेनदेन का प्राइवेसी आर्किटेक्चर उपभोक्ता-उन्मुख है, लेकिन इसका असर अनुपातहीन रूप से कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन के कानून के प्रोफेसर एरी एज्रा वाल्डमैन का कहना है कि यद्यपि यह विरोध दिवाला प्रक्रिया का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन इसका परिणाम भविष्य में श्रम संघों और कंपनियों के सोचने के तरीके पर गहरा प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया में जहां बड़े भाषा मॉडल पर खरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं, वहां शब्द आधारित हर चीज मुनाफे के दायरे में आ जाती है।
बकाया वेतन की मांग और कर्मचारियों का आक्रोश
इस बीच, पूर्व कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें उनका बकाया पैसा मिलना चाहिए। एक अलग मोर्चे पर, यूनियन ने दिवाला अदालत में हस्तक्षेप करते हुए लगभग अड़सठ मिलियन डॉलर के अवैतनिक अवकाश, स्वास्थ्य देखभाल और पिछले वेतन की मांग की है।
एक पूर्व कर्मचारी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके बकाया वेतन का इंतजार करना और दूसरी तरफ स्पिरिट एयरलाइंस द्वारा उनकी निजी जानकारी से दस मिलियन डॉलर का मुनाफा कमाना उनके लिए एक और बड़ा तमाचा जैसा है।


















