प्रयागराज में हुए चर्चित उमेश पाल हत्याकांड की जांच में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अतीक अहमद गिरोह से जुड़े जिस शार्प शूटर मोहम्मद अरमान की तलाश उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष कार्यबल पिछले तीन साल से कर रहे थे, वह बिहार के गया स्थित सेंट्रल जेल में बंद पाया गया है। उस पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने 5 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित कर रखा था। मामले की जानकारी मिलने के बाद अब जांच अधिकारी उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रयागराज लाने की कवायद में जुट गए हैं।
प्रयागराज पुलिस ने जेल रिकॉर्ड खंगालकर की पहचान
अरमान के गया जेल में निरुद्ध होने की सूचना मिलने के बाद प्रयागराज के धूमनगंज थाने की एक विशेष पुलिस टीम 30 सितंबर को बिहार के गया पहुंची। वहां स्थानीय जेल प्रशासन के सहयोग से जब पुराने बंदियों के रिकॉर्ड और दास्तावेजों की गहन पड़ताल की गई, तो अरमान की शिनाख्त पुख्ता हो गई। पुलिस अधिकारियों ने जेल परिसर में ही उसकी अद्यतन तस्वीरें लीं और बायोमेट्रिक पुष्टि के लिए अंगूठे के निशान दर्ज किए। पहचान की पूरी प्रक्रिया विधिवत संपन्न होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने हत्याकांड के सिलसिले में पूछताछ के लिए उसे अपनी हिरासत में लेने की कानूनी तैयारी शुरू कर दी।
घटना के तुरंत बाद गया लौटकर स्थानीय मामले में किया था सरेंडर
मोहम्मद अरमान मूल रूप से बिहार के गया शहर अंतर्गत कठोकर तालाब मोहल्ले का निवासी है। प्रयागराज में वारदात को अंजाम देने के बाद वह उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संभावित दबिश से बचने के लिए सीधे अपने गृह नगर गया भाग गया था। गया पहुंचने के बाद स्थानीय स्तर पर कठोकर तालाब मोहल्ले के पास भोलू अंडा वाले पर गोलीबारी की एक घटना हुई, जिसमें अरमान का नाम नामजद आरोपी के तौर पर दर्ज हुआ। इस स्थानीय केस में गिरफ्तारी के डर से उसने गया की स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत के आदेश पर उसे 27 फरवरी 2023 को गया सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। यानी वारदात के ठीक तीसरे दिन से वह लगातार जेल की सलाखों के पीछे था, जबकि उत्तर प्रदेश की जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में उसकी तलाश में छापे मारती रहीं।
दिनदहाड़े हुए हत्याकांड में अरमान पर दर्ज हैं गंभीर आरोप
प्रयागराज में 24 फरवरी 2023 को वकील उमेश पाल और उनकी सुरक्षा में तैनात दो सरकारी गनरों की दिनदहाड़े अंधाधुंध गोलीबारी और बमबारी कर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद घटना स्थल के आसपास लगे विभिन्न सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई थी। फुटेज और आरंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने अरमान की पहचान शूटर के तौर पर की थी। जांच के अनुसार, वारदात के समय इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल को अरमान चला रहा था, जबकि उसके पीछे अतीक गैंग का बमबाज गुड्डू मुस्लिम सवार था। आरोप है कि अरमान द्वारा बाइक दौड़ाए जाने के दौरान पीछे बैठे आरोपी ने सड़क पर बम और गोलियां चलाई थीं।
ट्रांजिट रिमांड पर सुनवाई और उत्तर प्रदेश लाने की तैयारी
उमेश पाल हत्याकांड में नाम आने के बाद अरमान को राज्य के वांछित अपराधियों की सूची में शामिल कर दिया गया था और गिरफ्तारी में मदद के लिए 5 लाख रुपये का इनाम घोषित हुआ था। इस दौरान असद और गुलाम के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद जांच एजेंसियां अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन और गुड्डू मुस्लिम की टोह लेने में जुटी रहीं, जबकि अरमान एजेंसियों के रडार से पूरी तरह बाहर रहा और उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी थी। अब गया सेंट्रल जेल में उसकी मौजूदगी स्पष्ट होने पर प्रयागराज पुलिस ने 1 अक्टूबर को गया सिविल कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के लिए विधिवत याचिका दाखिल की है। पुलिस का उद्देश्य उसे न्यायिक अभिरक्षा में प्रयागराज ले जाकर हत्याकांड की पूरी साजिश, हथियारों के स्रोत और बाकी फरार आरोपियों के संबंध में विस्तार से पूछताछ करना है। वर्तमान में अदालत में इस अर्जी पर कानूनी सुनवाई चल रही है।
परिजनों का दावा और बचाव पक्ष की दलीलें
दूसरी तरफ, अरमान के पिता शमीम और माता असगरी खातून ने अपने बेटे को पूरी तरह बेकसूर करार दिया है। माता-पिता का कहना है कि अरमान प्रयागराज में केवल साधारण मजदूरी और छोटा-मोटा कामकाज करता था और उसका किसी संगठित आपराधिक सिंडिकेट से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने भी अपनी बात रखने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। वहीं अरमान के अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता ने आशंका जताई है कि यदि अरमान को उत्तर प्रदेश ले जाया गया तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने अदालत से मांग की थी कि उसकी पेशी उत्तर प्रदेश ले जाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाए, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को जानबूझकर बड़े मामले में फंसाया जा रहा है और निचली अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद वे पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल सभी पक्ष गया सिविल कोर्ट के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।



















