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उत्तर प्रदेश के विधायक बेदीराम का छत्तीसगढ़ पर्चा लीक कांड से क्या है नाता, क्यों कोर्ट से बरी हुए आरोपीअपराध
24 अग॰ 2026, 11:05 am (32 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश के विधायक बेदीराम का छत्तीसगढ़ पर्चा लीक कांड से क्या है नाता, क्यों कोर्ट से बरी हुए आरोपी

छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आते रहे परीक्षा पर्चा लीक मामलों और उत्तर प्रदेश के विधायक बेदीराम की भूमिका पर एक नजर। जानिए कैसे सबूतों के अभाव में मास्टरमाइंड बरी हो गए।

छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के पर्चे लीक होने की घटनाओं ने पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक करीब आधे दर्जन से अधिक बड़े पेपर लीक प्रकरण सामने आ चुके हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अदालतों में लंबी सुनवाई चलने के बावजूद ज्यादातर मामलों में किसी भी मुख्य साजिशकर्ता को ठोस सजा नहीं मिल पाई है। मजबूत सबूतों की कमी के कारण कई आरोपी बरी हो चुके हैं, जबकि कई अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी है। इसी फेहरिस्त में सबसे चर्चित छत्तीसगढ़ पीएमटी यानी CG-PMT पर्चा लीक कांड के मुख्य सूत्रधार बेदीराम और उनके भाई दीनाराम का नाम भी शामिल है, जिन्हें अदालत से पूरी तरह राहत मिल चुकी है।

कौन हैं बेदीराम और क्या था परीक्षा घोटाला

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जखनियां विधानसभा क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक बेदीराम वही व्यक्ति हैं, जिन पर देश भर में दो दर्जन से अधिक पेपर लीक कराने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। पुख्ता सबूतों के अभाव का फायदा उठाकर वह हर बार कानून के शिकंजे से बाहर निकलने में सफल रहे हैं और उन्हें आज तक किसी मामले में सजा नहीं हुई है। बेदीराम और उनके भाई दीनाराम के गिरोह ने जून 2011 में आयोजित हुई सीजी पीएमटी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक किया था। इस शातिर गिरोह ने परीक्षाार्थियों से तेरह-तेरह लाख रुपये ऐंठे थे और उन्हें अलग-अलग होटलों तथा निजी मकानों में ठहराकर वहीं पर्चा हल करवाया था। इस मामले में पुलिस ने कुल आधा दर्जन लोगों को दबोचा था। वारदात के पांच साल बाद 2018 में रायपुर की अदालत ने सबूतों के अपर्याप्त होने का हवाला देते हुए बेदीराम, उनके भाई दीनाराम, अखिलेश पांडेय और मनीष सिंह समेत अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

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आपराधिक इतिहास और चुनावी सफर

चुनावी दस्तावेजों के मुताबिक, जौनपुर थाने के हिस्ट्रीशीटर बेदीराम के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में आठ से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पीएमटी और नीट जैसी देशव्यापी परीक्षाओं के लीक मामलों में नाम उछलने के बावजूद उन्होंने राजनीतिक मैदान में कदम रखा और वर्ष 2019 में सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़कर गाजीपुर की जखनियां सीट से जीत हासिल कर विधायक बन गए। दूसरी तरफ, पीएमटी घोटाले के बूते अनुचित तरीके से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले कई छात्र अपनी शिक्षा पूरी कर चुके हैं और वर्तमान में विभिन्न सरकारी पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा, वर्ष 2022 के बहुचर्चित सीजी पीएससी पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की एंट्री हो चुकी है, जिसके तहत तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है। पिछले चार वर्षों से यह मामला अदालत में विचाराधीन है, मगर कानूनी प्रक्रियाओं की सुस्ती के चलते ज्यादातर मुख्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। बार-बार पर्चे लीक होने और दोषियों के बरी हो जाने की इन घटनाओं से मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य गहरे संकट में पड़ गया है।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ पीएमटी पर्चा लीक मामले का मुख्य आरोपी कौन था?
इस मामले के मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में बेदीराम और उनके भाई दीनाराम का नाम सामने आया था।
बेदीराम वर्तमान में किस राजनीतिक पद पर हैं?
बेदीराम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की जखनियां विधानसभा सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक हैं।
रायपुर कोर्ट ने आरोपियों को कब बरी किया था?
घटना के पांच साल बाद 2018 में रायपुर कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते बेदीराम और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
सीजी पीएससी 2022 पर्चा लीक मामले में किसकी गिरफ्तारी हुई थी?
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने तत्कालीन पीएससी चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था।
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