राजस्थान के अलवर जिले से कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ बड़ौदामेव पुलिस थाने के ठीक बाहर एक युवक पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। इस हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति की शिनाख्त बड़ाबास बुटौली निवासी सेकुन के रूप में हुई है। हमलावर ने आपसी मारपीट के दौरान सेकुन के सिर पर पत्थरों से ताबड़तोड़ कई प्रहार किए, जिससे वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। गंभीर हालत में पुलिस कर्मियों ने उसे तुरंत अलवर स्थित राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ आपातकालीन चिकित्सकों ने प्रारंभिक परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
थाना परिसर के ठीक सामने घटित इस निर्मम हत्याकांड की सूचना मिलते ही समूचे इलाके में भारी आक्रोश छा गया। घटनास्थल के इर्द-गिर्द बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक इकट्ठा हो गए। दिनदहाड़े थाने की चौखट पर हुई इस बर्बर घटना को लेकर लोग स्तब्ध हैं, जबकि कत्ल के पीछे की असल वजह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस दल ने घटनास्थल का मुआयना करने के साथ ही आसपास के चश्मदीदों से बातचीत करके साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अस्पताल परिसर में परिजनों का प्रदर्शन और प्रशासन से मांगें
जैसे ही सेकुन की मौत का समाचार उसके परिजनों और गांव के बाशिंदों तक पहुँचा, अस्पताल परिसर में लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। उत्तेजित परिजनों और ग्रामीणों ने राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर एकत्रित होकर कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने दोटूक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर आकर उनकी मांगें नहीं सुनते, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। वर्तमान में मृतक का पार्थिव शरीर अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है।
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की तरफ से प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए सरकारी मुआवजे की व्यवस्था की जाए और इस पूरे मामले की सुनवाई त्वरित अदालत यानी फास्ट ट्रैक कोर्ट में संचालित की जाए, ताकि परिवार को अविलंब न्याय मिल सके।
एसआईटी से गहन जांच और पुलिसिया कार्रवाई का ब्योरा
परिजनों ने इस जघन्य हत्याकांड की तह तक पहुँचने के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी के गठन की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि वारदात के पीछे छिपे वास्तविक कारणों और संभावित साजिश की गहराई से पड़ताल होना अनिवार्य है ताकि सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके। ग्रामीण पूरी निष्पक्षता के साथ समयबद्ध जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक संदिग्ध आरोपी को अपनी हिरासत में ले लिया है। पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति से कड़ी पूछताछ कर रही है, साथ ही वारदात स्थल के पास मौजूद गवाहों के बयान कलमबद्ध किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हत्या की असली वजह पूरी जांच पड़ताल और पूछताछ मुकम्मल होने के उपरांत ही स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मोर्चरी के बाहर जुटे परिजनों को समझाने और पोस्टमार्टम के लिए सहमति बनाने के प्रयास में जुटे हैं।
विपक्ष ने भजनलाल सरकार की कानून व्यवस्था पर दागे सवाल
पुलिस थाने के सामने घटित इस हत्याकांड को लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया मंच पर इस घटना को उठाते हुए सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को निशाने पर लिया। बेनीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य की लचर कानून व्यवस्था को लेकर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने सवाल दागा कि जब पुलिस थाने के ठीक सामने खुलेआम किसी नागरिक की हत्या कर दी जाती है, तो यह आमजन की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर और चिंताजनक हालात बयां करता है। उन्होंने सरकार से कातिलों पर कठोर शिकंजा कसने की पुरजोर मांग की।
वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने भी घटना पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और पुलिस महकमे को आड़े हाथों लिया। जूली ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्थान में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब पुलिस थाने के बाहर भी कानून या पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा है। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि यदि पुलिस थाना ही सुरक्षित नहीं रह गया है, तो आम नागरिक अपनी जान की हिफाजत और न्याय की गुहार लगाने के लिए आखिर किस चौखट पर जाए।



















