क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अत्यधिक लीवरेज लेकर दांव लगाने वाले ट्रेडर्स पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिसके चलते प्रमुख डिजिटल संपत्ति बिटकॉइन बुधवार को लुढ़ककर 84,500 डॉलर के दायरे से नीचे आ गई। इस कारोबारी हफ्ते के दौरान इसमें अब तक 2.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जबकि दिन के निचले स्तरों पर यह 84,100 डॉलर से भी नीचे फिसल गई। पिछले 24 घंटों में 101,831 ट्रेडर्स के सौदे जबरन बंद यानी लिक्विडेट कर दिए गए, जिनका कुल मूल्य 550.65 मिलियन डॉलर बैठता है। हैरानी की बात यह है कि बंद किए गए सौदों में 90.54 प्रतिशत लॉन्ग पोजीशन थीं। इसका साफ अर्थ है कि बाजार के एकतरफा तेजी में रहने के अनुमान ने खुदरा व सटोरिया ट्रेडर्स को तगड़ा झटका दिया है।
संस्थागत मांग में असमंजस और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स का रुख
कीमतों में आई इस हालिया नरमी के पीछे केवल डेरिवेटिव सौदों का कटना ही वजह नहीं है, बल्कि बड़े निवेशकों की संकोची चाल भी जिम्मेदार है। हाजिर यानी स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) के प्रवाह में इस हफ्ते मिला-जुला रुख देखने को मिला है। संस्थागत पूंजी की रफ्तार धीमी पड़ने से यह संशय पैदा हो गया है कि क्या तेजी का यह चक्र अपनी गति बरकरार रख पाएगा। हालांकि, वर्तमान सुस्ती के बावजूद व्यापक संरचनात्मक ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। लाइव आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में बिटकॉइन का भाव 84,011 डॉलर के आसपास चल रहा है, जो पिछले बंद भाव 85,558 डॉलर से 1.81 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर 57,748 डॉलर और उच्चतम स्तर 89,201 डॉलर रहा है। वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 20 दिनों के औसत का 1.04 गुना दर्ज किया गया है।
तकनीकी संकेतकों और चार्ट पर महत्वपूर्ण स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो गिरावट के बाद भी यह डिजिटल मुद्रा लंबी अवधि के मजबूती के दायरे में टिकी हुई है। यह अभी भी अपनी 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से काफी ऊपर बनी हुई है, जिनका दायरा लगभग 79,600 डॉलर से 75,300 डॉलर के बीच स्थित है। लाइव डेटा के मुताबिक 20-दिवसीय ईएमए 83,556 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 79,576 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 75,686 डॉलर पर है। इसके साथ ही 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI (14) का स्तर ठंडा होकर 56 पर आ गया है, जो पहले की अत्यधिक खरीदारी की स्थिति के सामान्य होने का संकेत देता है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) शून्य के नीचे चला गया है, जहां 1747.80 का स्तर इसके सिग्नल स्तर 1978.64 से नीचे है और हिस्टोग्राम -230.84 के साथ बियरिश गति दर्शाता है। एडीएक्स (14) का स्तर 43 पर है, जो सक्रिय ट्रेंड को रेखांकित करता है। बोलिंगर बैंड्स 81,037 डॉलर से 87,397 डॉलर के बीच फैले हैं और भाव उनके मध्य 84,217 डॉलर के नजदीक है।
ऊपर की तरफ तात्कालिक रुकावट 85,000 डॉलर के क्षैतिज स्तर पर है। इसके पार दैनिक क्लोजिंग मिलने पर भाव पुनः 87,000 डॉलर के हालिया शिखरों की ओर बढ़ सकता है। दैनिक पिवट बिंदु 84,461 डॉलर पर है, जबकि ऊपरी रेजिस्टेंस स्तर R1 85,120 डॉलर और R2 86,229 डॉलर पर आंके गए हैं। यदि दबाव और बढ़ता है, तो निचली तरफ पहला सहारा 50-दिवसीय ईएमए यानी 79,612 डॉलर पर मिलेगा, जिसके बाद 100-दिवसीय ईएमए 75,738 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 75,361 डॉलर मजबूत रक्षापंक्ति बनाएंगे। बेहद गहरी गिरावट की स्थिति में 66,500 डॉलर और 62,300 डॉलर के पुराने बेस टेस्ट हो सकते हैं। तात्कालिक दैनिक सपोर्ट S1 83,352 डॉलर तथा S2 82,694 डॉलर पर केंद्रित हैं।
डिजिटल एसेट्स की बुनियादी संरचना और बाजार का तंत्र
बाजार के इस मिजाज को समझने के लिए इसके बुनियादी स्वरूप को देखना जरूरी है। बिटकॉइन मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी आभासी मुद्रा है, जिसे विकेंद्रीकृत भुगतान प्रणाली के तौर पर तैयार किया गया था ताकि किसी भी तीसरे पक्ष या केंद्रीय संस्था के हस्तक्षेप के बिना वित्तीय लेनदेन संभव हो सकें। इसके अतिरिक्त जितनी भी अन्य क्रिप्टोकरेंसी हैं, उन्हें सामान्यतः ऑल्टकॉइन्स कहा जाता है। हालांकि कुछ विश्लेषक एथेरियम को इस श्रेणी से अलग रखते हैं क्योंकि इन दोनों मूल प्रोटोकॉल से कई अन्य परियोजनाएं निकली हैं। इस परिभाषा के अनुसार, लाइटकॉइन पहला ऑल्टकॉइन माना जाता है, जिसे बिटकॉइन कोडबेस में बदलाव करके तैयार किया गया था।
मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टेबलकॉइन्स की भूमिका बेहद अहम होती है। ये ऐसी डिजिटल परिसंपत्तियां हैं जिनका मूल्य अमेरिकी डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्राओं या अन्य वित्तीय संपत्तियों के साथ निश्चित अनुपात में स्थिर रखा जाता है। इनका प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों को क्रिप्टो ट्रेडिंग के भीतर पूंजी लाने और ले जाने के लिए सुरक्षित आधार देना है।
इसके साथ ही बिटकॉइन डॉमिनेंस यानी कुल क्रिप्टो बाजार पूंजीकरण में बिटकॉइन की हिस्सेदारी का अनुपात निवेशकों के रुझान को स्पष्ट करता है। तेजी के शुरुआती दौर में निवेशक अक्सर सुरक्षा के लिए बिटकॉइन में निवेश करते हैं जिससे इसकी हिस्सेदारी बढ़ती है। वहीं जब इसकी हिस्सेदारी में गिरावट आती है, तो इसका मतलब होता है कि निवेशक ज्यादा मुनाफे की तलाश में ऑल्टकॉइन्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनमें तेज उछाल देखा जाता है।
ऑल्टकॉइन्स में भी व्यापक बिकवाली का असर
बिटकॉइन की इस फिसलन ने व्यापक बाजार को भी अपनी चपेट में ले लिया। क्वांट के भाव पिछले महीने 350 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त तेजी के बाद अब बिकवाली के घेरे में हैं और बुधवार को 4 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 250 डॉलर के नीचे जाने का जोखिम बना रहे हैं। इसके ओपन इंटरेस्ट में 24 घंटों में 6 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।
चेनलिंक में भी 3 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। इससे जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में लगातार तीन दिनों तक कोई भी नया निवेश नहीं आया, जबकि इसके फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई जो सौदों के सिमटने का संकेत देती है। इसी क्रम में एथेरियम 2,620 डॉलर से नीचे चला गया और रिपल भी 1.500 डॉलर के स्तर के नीचे फिसल गया। इस कारोबारी हफ्ते में 2.88 प्रतिशत के करेक्शन के बीच प्रमुख टोकन्स के मोमेंटम संकेतक आने वाले दिनों में और गिरावट के जोखिम की ओर इशारा कर रहे हैं।



















