यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के लगातार बने रहने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के चलते केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषक साबिर सलाद ने चेक नेशनल बैंक (सीएनबी) के नीतिगत पथ को लेकर अपने पिछले अनुमानों को संशोधित किया है। नए आकलन के अनुसार, केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने के लिए बाध्य हो सकता है, जिससे यूरोपीय उभरते बाजारों में वित्तीय स्थितियां अधिक सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।
नीतिगत दरों में 75 आधार अंकों की कुल बढ़ोतरी की संभावना
विश्लेषण के मुताबिक, चेक नेशनल बैंक द्वारा नवंबर 2026 में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की दर वृद्धि की जा सकती है, जिसके बाद 2027 की पहली तिमाही में भी 25 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे पहले वित्तीय संस्थान का मानना था कि इस वर्ष या अगले वर्ष किसी अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, जून के पूर्व-प्रभावी 25 आधार अंकों के कदम के साथ मिलकर, यह चक्र कुल 75 आधार अंकों की सख्ती में तब्दील हो जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने पर 2027 की पहली तिमाही के अंत तक नीतिगत दर का उच्चतम स्तर 4.25 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है।
मुद्रास्फीति अनुमानों में संशोधन और भू-राजनीतिक चुनौतियां
दरों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा संबंध महंगाई के बढ़ते दबाव से है। संस्थान ने वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान को 2.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और उससे जुड़े अनिश्चित जोखिम हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहता है, तब तक कच्चे तेल और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहेगा, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करता है।
घरेलू कोर महंगाई और वित्तीय बाजारों का रुख
घरेलू मोर्चे पर, चेक अर्थव्यवस्था में नीति निर्माताओं के लिए सबसे अहम पैमाना मानी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति इस वर्ष लगभग 3 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। यह स्तर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे की ऊपरी सीमा को छूता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक मांग और सेवा क्षेत्र में मूल्य दबाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इसके साथ ही, वित्तीय बाजार वर्तमान में अधिक आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और अगले 12 महीनों के दौरान 100 आधार अंकों से अधिक की नीतिगत सख्ती की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक इस आक्रामक बाजार मूल्य निर्धारण का लाभ उठा सकता है, जिससे उसे स्वयं बहुत अधिक आक्रामक कदम उठाए बिना भी मौद्रिक परिस्थितियों को कड़ा रखने में मदद मिल सकती है। यदि यह बाजार प्रभाव पर्याप्त साबित होता है, तो सीएनबी को शायद उन सभी सख्तियों को लागू करने की आवश्यकता न पड़े जिनकी बाजार अपेक्षा कर रहा है, जिसके चलते इस अनुमान में जोखिम संतुलित बने हुए हैं।
वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में व्यापक उथल-पुथल
केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख का असर केवल यूरोप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया उछाल के बाद अमेरिकी डॉलर की मांग में जोरदार सुधार दर्ज हुआ है, जिससे कई प्रमुख मुद्रा जोड़े दबाव में आ गए हैं
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा, जहां रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आक्रामक उम्मीदों के बावजूद मजबूत डॉलर ने बढ़त को सीमित कर दिया।
- जापानी येन (USD/JPY): बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और अमेरिकी यील्ड में तेजी के चलते यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के पास डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के करीब बना रहा, जहां निवेशक 200-दिवसीय एसएमए के स्तर पर नजर रखे हुए हैं।
- सोना और कीमती धातुएं: अमेरिकी डॉलर में लौटी मजबूती ने सोने पर दबाव बनाए रखा है, जिससे पीली धातु अपने दो महीने के निचले स्तर लगभग 4,100 डॉलर के आसपास कमजोर स्थिति में टिकी रही।
- भारतीय रुपया (USD/INR): भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.72 के चार महीने के उच्चतम स्तर तक फिसल गया। यह फरवरी 2023 के बाद आरबीआई की पहली दर वृद्धि थी।
- क्रिप्टोकरेंसी बाजार: डिजिटल एसेट बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) दबाव का सामना कर रहा है, जो सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 0.090 डॉलर के आसपास आ गया है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, DOGE-USD वर्तमान में 0.0907 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 0.0937 डॉलर से 3.27 प्रतिशत नीचे है। इसका आरएसआई (14) 48 पर है, एमएसीडी हिस्टोग्राम मंदी के संकेत दे रहा है और 52-सप्ताह का दायरा 0.0680 से 0.1249 डॉलर के बीच है। डेरिवेटिव्स बाजार में शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
- यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी): मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी चलने के बावजूद यूरोपीय बॉन्ड बाजार पहले ही वित्तीय स्थितियों को सख्त कर रहा है, जिससे ईसीबी के सामने नीतिगत निर्णय को लेकर एक जटिल दुविधा उत्पन्न हो गई है।
आगे की राह: एफओएमसी मिनट्स पर टिकी नजरें
वैश्विक निवेशक अब आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो अमेरिकी ब्याज दरों की भविष्य की दिशा को लेकर नए संकेत प्रदान कर सकते हैं। जब तक प्रमुख केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहेंगे, तब तक बॉन्ड यील्ड, विनिमय दरों और अंतरराष्ट्रीय इक्विटी में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।






















