अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल से वायदा बाजार सुस्त, ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक के अगले कदम का इंतजारमतदाता सूची से 13.39 करोड़ नाम हटने पर निर्वाचन आयोग की सफाई, बताया सूची में दोबारा नाम शामिल कराने का तरीकापूर्णिया पॉलिटेक्निक के छात्रों ने तैयार किया स्मार्ट हेलमेट, शराब पीने या हेलमेट न पहनने पर स्टार्ट नहीं होगी बाइकबिना नीट क्वालिफाई किए भी बन सकते हैं प्राकृतिक चिकित्सा के डॉक्टर, पुणे स्थित एनआईएन ने बीएनवाईएस के लिए मांगे आवेदनअमेज़न सेल में लैपटॉप पर मिल रहा 63% तक का भारी डिस्काउंट, शुरुआती दाम ₹34,990अमेरिका के खान-पान और वेलनेस रूटीन में बढ़ी भारतीय मसालों की मांग, राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने रेखांकित किया सांस्कृतिक महत्वपुष्कर मेले में रेत पर सजेगा राजस्थान का गौरव, भगवान देवनारायण की भव्य सैंड आर्ट बनाएंगे अजय रावतमेघालय के तीन वैज्ञानिकों ने वैश्विक शोध सूची में बनाई जगह, दुनिया के शीर्ष 1,000 विद्वानों में हुए शामिलसार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे होने पर गुरुग्राम में गूंजा नरेंद्र मोदी का प्रशासनिक सफर, अमित शाह ने सराहासार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे होने पर भूटानी प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे ने नरेंद्र मोदी को बताया आज के दौर का अवतार
चेक नेशनल बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया अनुमान, महंगाई और वैश्विक तनाव से नीतिगत रुख सख्तबाज़ार
7 अक्तू॰ 2026, 2:23 pm (41 मिनट पहले)· 0

चेक नेशनल बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का नया अनुमान, महंगाई और वैश्विक तनाव से नीतिगत रुख सख्त

स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चेक नेशनल बैंक द्वारा नवंबर 2026 और 2027 की पहली तिमाही में 25-25 आधार अंकों की दो और दर वृद्धि की संभावना जताई है, जिससे कुल नीतिगत दर 4.25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

DOGE━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण7 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

Dogecoin अभी $0.09 पर है, जबकि EMA20 $0.09, EMA50 $0.09 और EMA200 $0.09 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA50 ($0.09) के ऊपर बंद होने पर तेजी, EMA200 ($0.09) टूटने पर गिरावट खुलती है।

यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के लगातार बने रहने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के चलते केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषक साबिर सलाद ने चेक नेशनल बैंक (सीएनबी) के नीतिगत पथ को लेकर अपने पिछले अनुमानों को संशोधित किया है। नए आकलन के अनुसार, केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने के लिए बाध्य हो सकता है, जिससे यूरोपीय उभरते बाजारों में वित्तीय स्थितियां अधिक सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

नीतिगत दरों में 75 आधार अंकों की कुल बढ़ोतरी की संभावना

विश्लेषण के मुताबिक, चेक नेशनल बैंक द्वारा नवंबर 2026 में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की दर वृद्धि की जा सकती है, जिसके बाद 2027 की पहली तिमाही में भी 25 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे पहले वित्तीय संस्थान का मानना था कि इस वर्ष या अगले वर्ष किसी अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, जून के पूर्व-प्रभावी 25 आधार अंकों के कदम के साथ मिलकर, यह चक्र कुल 75 आधार अंकों की सख्ती में तब्दील हो जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने पर 2027 की पहली तिमाही के अंत तक नीतिगत दर का उच्चतम स्तर 4.25 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है।

ये भी पढ़ें

मुद्रास्फीति अनुमानों में संशोधन और भू-राजनीतिक चुनौतियां

दरों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा संबंध महंगाई के बढ़ते दबाव से है। संस्थान ने वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के अपने पूर्वानुमान को 2.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और उससे जुड़े अनिश्चित जोखिम हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना रहता है, तब तक कच्चे तेल और परिवहन लागत में उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहेगा, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करता है।

घरेलू कोर महंगाई और वित्तीय बाजारों का रुख

घरेलू मोर्चे पर, चेक अर्थव्यवस्था में नीति निर्माताओं के लिए सबसे अहम पैमाना मानी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति इस वर्ष लगभग 3 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। यह स्तर केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे की ऊपरी सीमा को छूता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक मांग और सेवा क्षेत्र में मूल्य दबाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। इसके साथ ही, वित्तीय बाजार वर्तमान में अधिक आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और अगले 12 महीनों के दौरान 100 आधार अंकों से अधिक की नीतिगत सख्ती की संभावना को कीमतों में शामिल कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक इस आक्रामक बाजार मूल्य निर्धारण का लाभ उठा सकता है, जिससे उसे स्वयं बहुत अधिक आक्रामक कदम उठाए बिना भी मौद्रिक परिस्थितियों को कड़ा रखने में मदद मिल सकती है। यदि यह बाजार प्रभाव पर्याप्त साबित होता है, तो सीएनबी को शायद उन सभी सख्तियों को लागू करने की आवश्यकता न पड़े जिनकी बाजार अपेक्षा कर रहा है, जिसके चलते इस अनुमान में जोखिम संतुलित बने हुए हैं।

वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में व्यापक उथल-पुथल

केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख का असर केवल यूरोप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया उछाल के बाद अमेरिकी डॉलर की मांग में जोरदार सुधार दर्ज हुआ है, जिससे कई प्रमुख मुद्रा जोड़े दबाव में आ गए हैं

  • ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा, जहां रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आक्रामक उम्मीदों के बावजूद मजबूत डॉलर ने बढ़त को सीमित कर दिया।
  • जापानी येन (USD/JPY): बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और अमेरिकी यील्ड में तेजी के चलते यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के पास डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर के करीब बना रहा, जहां निवेशक 200-दिवसीय एसएमए के स्तर पर नजर रखे हुए हैं।
  • सोना और कीमती धातुएं: अमेरिकी डॉलर में लौटी मजबूती ने सोने पर दबाव बनाए रखा है, जिससे पीली धातु अपने दो महीने के निचले स्तर लगभग 4,100 डॉलर के आसपास कमजोर स्थिति में टिकी रही।
  • भारतीय रुपया (USD/INR): भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.72 के चार महीने के उच्चतम स्तर तक फिसल गया। यह फरवरी 2023 के बाद आरबीआई की पहली दर वृद्धि थी।
  • क्रिप्टोकरेंसी बाजार: डिजिटल एसेट बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) दबाव का सामना कर रहा है, जो सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 0.090 डॉलर के आसपास आ गया है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, DOGE-USD वर्तमान में 0.0907 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 0.0937 डॉलर से 3.27 प्रतिशत नीचे है। इसका आरएसआई (14) 48 पर है, एमएसीडी हिस्टोग्राम मंदी के संकेत दे रहा है और 52-सप्ताह का दायरा 0.0680 से 0.1249 डॉलर के बीच है। डेरिवेटिव्स बाजार में शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
  • यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी): मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी चलने के बावजूद यूरोपीय बॉन्ड बाजार पहले ही वित्तीय स्थितियों को सख्त कर रहा है, जिससे ईसीबी के सामने नीतिगत निर्णय को लेकर एक जटिल दुविधा उत्पन्न हो गई है।

आगे की राह: एफओएमसी मिनट्स पर टिकी नजरें

वैश्विक निवेशक अब आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो अमेरिकी ब्याज दरों की भविष्य की दिशा को लेकर नए संकेत प्रदान कर सकते हैं। जब तक प्रमुख केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहेंगे, तब तक बॉन्ड यील्ड, विनिमय दरों और अंतरराष्ट्रीय इक्विटी में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।

सवाल-जवाब

स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने चेक नेशनल बैंक की ब्याज दरों को लेकर क्या नया अनुमान लगाया है?
विश्लेषक साबिर सलाद के अनुसार, केंद्रीय बैंक जून के पूर्व-प्रभावी कदम के बाद नवंबर 2026 और 2027 की पहली तिमाही में 25-25 आधार अंकों की दो और दर वृद्धि कर सकता है।
इस प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद नीतिगत दर का उच्चतम स्तर क्या होगा?
इन दो अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद कुल सख्ती 75 आधार अंक हो जाएगी, जिससे नीतिगत दर 2027 की पहली तिमाही के अंत तक 4.25 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी।
वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) महंगाई का अनुमान कितना बढ़ाया गया है?
मध्य पूर्व के जोखिमों और ऊर्जा कीमतों की अनिश्चितता के कारण 2027 सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान को 2.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है।
चेक गणराज्य में वर्तमान में कोर मुद्रास्फीति की स्थिति क्या है?
घरेलू कोर मुद्रास्फीति लगभग 3 प्रतिशत पर बनी हुई है, जो केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे की ऊपरी सीमा है।
अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों और मुद्राओं पर इसका क्या प्रभाव दिख रहा है?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·8 मिनट पहले

मिडिल ईस्ट का तनाव सचमुच ग्लोबल इकॉनमी को हिला रहा है। चेक रिपब्लिक जैसे देशों में भी अब ब्याज दरें बढ़ाने की बात होने लगी है। क्या बाकी यूरोपीय देश भी महंगाई रोकने के लिए ऐसा ही कड़ा रुख अपनाएंगे?

Divya Reddy@divya-reddy·7 मिनट पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मिडिल ईस्ट की वजह से कच्चे तेल और बाकी चीज़ों के दाम जिस तरह बढ़ रहे हैं, उसका असर हर जगह दिख रहा है। बाक़ी यूरोपीय देशों के लिए भी इससे बचना मुश्किल होगा।

Michael Anderson@michael-anderson·30 मिनट पहले

साबिर सलाद का यह कहना कि मध्य पूर्व के तनाव से महंगाई बढ़ेगी, बिल्कुल सही लगता है। जब तक तेल के दाम ऊपर रहेंगे, तब तक ब्याज दरों को नीचे लाना किसी भी बैंक के लिए मुमकिन नहीं होगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·30 मिनट पहले

माइकल, बात तो सही है पर मुझे शक है कि सिर्फ मिडिल ईस्ट के तनाव से चेक बैंक 2026 तक ऐसे फैसले लेगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp