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मतदाता सूची से 13.39 करोड़ नाम हटने पर निर्वाचन आयोग की सफाई, बताया सूची में दोबारा नाम शामिल कराने का तरीकाभारत
7 अक्तू॰ 2026, 2:20 pm (1 घंटे पहले)· 1

मतदाता सूची से 13.39 करोड़ नाम हटने पर निर्वाचन आयोग की सफाई, बताया सूची में दोबारा नाम शामिल कराने का तरीका

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 13 करोड़ से अधिक नाम हटने के आरोपों पर भारतीय निर्वाचन आयोग ने आंकड़े जारी कर स्थिति साफ की है। आयोग ने बताया कि यह नाम एएसडीडी श्रेणी के तहत चिन्हित हुए हैं और पात्र नागरिक फॉर्म 6 के जरिए दोबारा जुड़ सकते हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने पूरी प्रक्रिया पर अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने साफ किया है कि सूची की गहन समीक्षा के दौरान ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जो या तो अपने पते पर मौजूद नहीं थे, हमेशा के लिए कहीं और चले गए थे, जिनका देहांत हो चुका था या फिर जिनके नाम एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज थे। इन सभी नामों को नियमों के तहत एएसडीडी श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

समीक्षा के तीन चरणों में परखे गए 95.40 करोड़ मतदाता

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर के तीन अलग-अलग चरणों में कुल 95.40 करोड़ मतदाताओं के पूरे रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई। इस राष्ट्रव्यापी पड़ताल के दौरान कुल 13.39 करोड़ मतदाताओं को विभिन्न श्रेणियों में चिन्हित किया गया। आयोग का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नागरिक का नाम एएसडीडी श्रेणी में दर्ज होने का यह अर्थ कतई नहीं है कि उसका मताधिकार हमेशा के लिए छीन लिया गया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाना था।

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10 लाख बीएलओ और 22 लाख बीएलए की रही भागीदारी

राज्यों में चलाए गए इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के संचालन के लिए ज़मीनी स्तर पर भारी प्रशासनिक तंत्र लगाया गया था। आयोग के मुताबिक, देश भर में 10 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ ने घर-घर जाकर यह एएसडीडी सूची तैयार की। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए राजनीतिक दलों के 22 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंटों यानी बीएलए को भी बूथवार एएसडीडी सूचियां सौंपी गईं, ताकि सभी दल अपने स्तर पर इन नामों का स्वतंत्र सत्यापन कर सकें।

हटाए गए नामों का आधिकारिक वर्गीकरण

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, चिन्हित किए गए 13.39 करोड़ नामों में सबसे बड़ी तादाद उन लोगों की थी जो स्थायी तौर पर अपना निवास स्थान बदल चुके थे। ऐसे स्थानांतरित मतदाताओं की कुल संख्या 6.30 करोड़ दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, अनुपस्थित पाए गए या जिनका कोई अता-पता नहीं चल सका, ऐसे मतदाताओं की संख्या 3.01 करोड़ पाई गई। बाकी श्रेणियों में मृत मतदाताओं और एक से अधिक जगहों पर दर्ज दोहरे नामों को शामिल किया गया था।

दावे और आपत्तियों के लिए मिला था एक महीने का मौका

निर्वाचन आयोग ने रेखांकित किया कि मसौदा मतदाता सूची सार्वजनिक किए जाने के बाद सभी नागरिकों को लगभग एक महीने का समय दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दिया गया था। यदि किसी वैध मतदाता का नाम त्रुटिवश सूची से बाहर रह गया था, तो उसे फॉर्म 6 भरकर अपना नाम दोबारा दर्ज कराने का पूरा अवसर उपलब्ध कराया गया था। एसआईआर व्यवस्था के तहत यह स्पष्ट प्रावधान रखा गया है कि कोई भी पात्र नागरिक फॉर्म 6 जमा करके अपना पंजीकरण करा सकता है।

अपात्रों पर आपत्ति और अपील का वैधानिक रास्ता

प्रक्रिया के नियमों की जानकारी देते हुए आयोग ने बताया कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम गलती से सूची में दर्ज रह गया हो, तो उसके विरुद्ध औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा भी मौजूद है। इसके साथ ही, अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी यदि किसी व्यक्ति का नाम उसमें शामिल नहीं हो पाया है, तो वह जिला निर्वाचन अधिकारी यानी डीएम अथवा मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ के समक्ष विधिवत अपील दायर कर सकता है। आयोग का कहना है कि समूची प्रणाली का एक ही लक्ष्य है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में रहे और कोई भी अपात्र नाम इसमें न छूटे।

मतदाता सूची का अद्यतनीकरण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया

राजनीतिक विवाद और विपक्ष के आरोपों के बीच आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाना कोई एक बार की समयबद्ध प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह साल भर निरंतर चलने वाला कार्य है। जिन लोगों के नाम किसी कारणवश वर्तमान सूची से अलग हो गए हैं, वे कभी भी फॉर्म 6 भरकर अपना नाम फिर से दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से आवेदन कर अपने मताधिकार को पुनः सक्रिय कर सकता है।

सवाल-जवाब

निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से 13.39 करोड़ नाम किस श्रेणी में रखे हैं?
आयोग ने इन नामों को एएसडीडी श्रेणी में रखा है, जिसमें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहरे नाम वाले मतदाता शामिल हैं।
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कुल कितने मतदाताओं की जांच की गई?
विशेष गहन पुनरीक्षण के तीन चरणों में कुल 95.40 करोड़ मतदाताओं के आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा की गई थी।
हटाए गए नामों में स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की संख्या कितनी है?
आंकड़ों के अनुसार, 6.30 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जो अपने पते से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके थे।
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से कट गया है, तो वह क्या कर सकता है?
कोई भी पात्र मतदाता फॉर्म 6 भरकर कभी भी अपना नाम मतदाता सूची में दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।
मतदाता सूची में नाम न होने पर अपील कहां की जा सकती है?
अंतिम सूची में नाम न होने पर प्रभावित नागरिक जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) या मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के समक्ष अपील कर सकता है।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·25 मिनट पहले

13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटना वाकई चौंकाने वाला आंकड़ा है, इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे शिफ्ट हो गए।

Aisha Khan@aisha-khan·24 मिनट पहले

रविकश, सच में आंकड़ा बड़ा है, पर शिफ्ट होने वाले लोग और डबल नाम भी तो इतने ही होंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

छह करोड़ से ज्यादा लोग पक्का हमेशा के लिए घर बदल चुके थे, यह सोचकर हैरानी होती है कि हमारे देश में कितनी बड़ी आबादी रोज़गार के पीछे भटक रही है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 मिनट पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी। छह करोड़ लोग जगह बदल लें, तो सोचिए कितने परिवार हर साल बस रोजी-रोटी के चक्कर में धक्के खाते हैं।

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