सड़क सुरक्षा और बाइक दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में बिहार के पूर्णिया स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के चार विद्यार्थियों ने एक अनोखा तकनीकी मॉडल पेश किया है। इस संस्थान के युवा नवाचारियों ने एक ऐसा सुरक्षात्मक स्मार्ट हेलमेट विकसित किया है, जिसके बिना दोपहिया वाहन चालू ही नहीं हो सकेगा। यह सिस्टम चालक को केवल चालान से बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब के सेवन की जांच करने, चोरी रोकने और आपातकालीन दुर्घटनाओं का संकेत देने जैसी बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणालियों से लैस है।
चार दिनों की मेहनत और ₹1500 का किफायती मॉडल
इस अनूठे प्रोजेक्ट को राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र गौतम कुमार, आशीष रंजन, गौतम कुमार और अंकित कुमार की चार सदस्यीय टीम ने मिलकर अंजाम दिया है। छात्रों ने सुरक्षा के कड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे प्रोटोटाइप को महज 4 दिन के भीतर तैयार किया है। सबसे खास बात इस उपकरण की उत्पादन लागत है, जिसे विद्यार्थियों ने सिर्फ ₹1500 के खर्च में बनाकर तैयार किया है। इससे पहले भी इस संस्थान के छात्र एआई रोबोट और ऑटोनॉमस लेजर बेस्ड वायरलेस पावर ट्रांसफर जैसे नवाचारों पर सफलतापूर्वक काम कर चुके हैं।
तकनीकी पुर्जे और काम करने का तरीका
इस सुरक्षा हेलमेट को दोपहिया वाहन के साथ एकीकृत करने के लिए छात्रों ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संयोजन किया है। इस हार्डवेयर सेटअप में मुख्य रूप से आरसी ट्रांसमीटर, आरसी रिसीवर, 9 वोल्ट की बैटरी, सर्वो मोटर, कनेक्टिंग वायर, स्विच, रिले और एलईडी डिस्प्ले को आपस में जोड़ा गया है। यह पूरा सिस्टम वाहन के इग्निशन सिस्टम से वायरलेस तरीके से जुड़ा रहता है।
सड़क पर आम तौर पर देखा जाता है कि लोग बिना हेलमेट पहने जल्दबाजी में बाइक लेकर निकल जाते हैं। इस डिवाइस के वाहन में इनबिल्ट हो जाने के बाद, जब तक सवार हेलमेट को सिर पर ठीक से नहीं पहनेगा और उसका स्ट्रैप लॉक नहीं करेगा, तब तक बाइक स्टार्ट ही नहीं होगी। इसके अलावा हेलमेट में लगा अल्कोहल डिटेक्टर यह सुनिश्चित करता है कि यदि चालक ने शराब पी रखी है, तो सिस्टम इंजन को शुरू होने की अनुमति नहीं देगा।
पेटेंट और सुरक्षा कवच को लेकर उम्मीदें
प्रोजेक्ट बनाने वाले छात्रों का मानना है कि यदि इस सुरक्षा तकनीक को सरकार की ओर से पेटेंट और प्रोत्साहन मिले, तो यह आने वाले दिनों में हर दोपहिया चालक के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा नियम बन सकता है। पूर्णिया राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य (डॉ.) प्रोफेसर मुनीफ लतीफ ने इस आविष्कार को देखकर पूरी छात्र टीम की सराहना की और उन्हें बधाई दी। प्राचार्य ने जोर देकर कहा कि यदि शासन स्तर पर इस तरह के तकनीकी प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो भविष्य में यह उपकरण बाइक सवारों के लिए जीवन रक्षक कवच साबित हो सकता है।


















