अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में सोने की चाल को लेकर एक बार फिर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की भूमिका केंद्र में आ गई है। कच्चे तेल के भाव में आई नरमी और बांड बाजार की मजबूती ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को कुछ हद तक शांत किया, जिससे ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आशंकाएं कमजोर हुईं और मंगलवार को सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए पीली धातु को सबसे बड़ा आधार विभिन्न देशों के मौद्रिक प्राधिकरणों द्वारा की जा रही निरंतर खरीदारी से मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी क्षेत्र की यह मांग सोने के भाव ऊंचे रहने के बावजूद बेहद मजबूत बनी हुई है, क्योंकि केंद्रीय बैंकों का ध्यान अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की बजाय लंबी अवधि के विदेशी मुद्रा भंडार विविधीकरण पर टिका हुआ है।
अगस्त में केंद्रीय बैंकों का शुद्ध संचय और प्रमुख खरीदार देश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में भी केंद्रीय बैंक शुद्ध खरीदार बने रहे। इस एक महीने के दौरान विभिन्न मौद्रिक प्राधिकरणों ने अपने आधिकारिक भंडार में कुल 39 टन सोना जोड़ा, जिसके साथ ही वर्ष की शुरुआत से अब तक कुल आधिकारिक संचय 170 टन के आंकड़े तक पहुंच गया है। इस पूरी खरीदारी में चीन सबसे आगे रहा, जिसने अगस्त में अकेले 20 टन सोने का संचय किया। इसके साथ ही चीन की लगातार खरीदारी का यह सिलसिला बढ़कर 22 महीनों तक पहुंच गया है। इसके अलावा पोलैंड और उज्बेकिस्तान ने भी अपने भंडार को मजबूत करते हुए 8-8 टन सोना अपने आधिकारिक खजाने में शामिल किया।
तुर्की ने भी इस अवधि में सोने के बाजार में वापसी की है। लगातार तीन महीनों तक शुद्ध बिकवाली करने के बाद अगस्त में तुर्की फिर से खरीदार बना और उसने 3 टन सोना खरीदा। इसके अतिरिक्त कजाकिस्तान, चेक गणराज्य, बोलीविया और घाना ने भी अपने विदेशी भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई। दूसरी तरफ, रूस ने अपने रुख में विपरीत कदम उठाते हुए अपने सोने के कुल भंडार में से 6 टन की कटौती दर्ज की। इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित परिसंपत्तियों में विविधता लाने की होड़ अभी थमी नहीं है।
मुद्रास्फीति की चिंताएं घटने और बांड यील्ड का संतुलन
कमोडिटीज विशेषज्ञ वारेन पैटरसन और ईवा मंथे की अगुवाई वाली टीम के अनुसार, तेल की कम कीमतों ने वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव को थोड़ा हल्का किया है। जब ऊर्जा लागत गिरती है, तो केंद्रीय बैंकों पर आक्रामक मौद्रिक सख्ती करने का दबाव भी कम होता है। इसके साथ ही बांड बाजारों में आई स्थिरता ने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की संभावना कम हो सकती है। हालांकि, बाजार की यह राहत एकतरफा नहीं रही है। अमेरिकी बांड यील्ड में ताजा उछाल के बाद अमेरिकी डॉलर को गिरावट के स्तरों पर फिर से समर्थन मिला, जिससे सुरक्षित धातु पर दबाव भी लौटता दिखा।
यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोने में हल्की मंदी का रुख बना रहा, जहां कीमतें पिछले दिन छुए गए 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर के आसपास मंडराती रहीं। डॉलर में सुधार आने से धातु की रफ्तार पर ब्रेक लगा और व्यापारी आगे के स्पष्ट रुख के लिए एफओएमसी (FOMC) की बैठक के मिनट्स का इंतजार करने लगे। तकनीकी मोर्चे पर वर्तमान लाइव बाजार में सोना 4,164 डॉलर पर देखा जा रहा है, जो पिछले बंद स्तर 4,187 डॉलर की तुलना में 0.56 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के मुकाबले 0.20 गुना दर्ज किया गया है।
विदेशी मुद्रा और वैश्विक परिसंपत्तियों में खींचतान
सोने के अलावा वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी उथल-पुथल साफ देखी जा रही है। एशियाई सत्र में बुधवार को एयूडी/यूएसडी (AUD/USD) जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार करती रही और अपने हालिया सुधार को बनाए रखने में असमर्थ रही। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक अपेक्षाओं के बावजूद अमेरिकी डॉलर की मांग ने इस मुद्रा जोड़ी को दबाव में रखा। वहीं यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर के पास टिकी रही, जहां बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और अमेरिकी यील्ड में आई तेजी ने डॉलर को मजबूती दी।
भारतीय रुपये में भी भारी कमजोरी देखी गई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद कोई विशेष उत्साह न दिखने से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.72 के स्तर तक गिर गया, जो पिछले चार महीनों का सबसे निचला स्तर है। इस नीतिगत बैठक में रिजर्व बैंक ने अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। दूसरी ओर यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने एक नई दुविधा खड़ी हो गई है। सामान्य तौर पर जब महंगाई तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी हो, तो दरें बढ़ाना सीधा कदम होता है, लेकिन बांड बाजार की अपनी सख्ती पहले ही मौद्रिक कसावट का काम कर रही है, जिससे ईसीबी के लिए निर्णय लेना जटिल हो गया है।
डिजिटल परिसंपत्तियों और बाजार की तकनीकी स्थिति
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी दबाव कम नहीं हुआ है। डॉगकॉइन (DOGE) में इस हफ्ते 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया। डेरिवेटिव्स आंकड़ों के अनुसार शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और बाजार में अत्यधिक ओवरहीटेड परिस्थितियां बन गई हैं, जिससे इस डिजिटल टोकन में आगे और नुकसान की संभावना बढ़ रही है।
सोने के तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) वर्तमान में 36 के स्तर पर है, जो अत्यधिक कमजोरी की ओर इशारा करता है। एमएसीडी (MACD) -67.96 पर सिग्नल लाइन -52.70 के नीचे बना हुआ है, जिसका हिस्टोग्राम -15.26 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। प्रमुख मूविंग एवरेज में ईएमए20 (EMA20) 4,273 डॉलर, ईएमए50 (EMA50) 4,326 डॉलर और ईएमए200 (EMA200) 4,439 डॉलर पर हैं, जिसमें ईएमए50 का ईएमए200 के नीचे जाना एक स्पष्ट डेथ क्रॉस का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,092 डॉलर से 4,490 डॉलर के दायरे में हैं। तत्काल सपोर्ट स्तर एस1 (S1) 4,145 डॉलर और एस2 (S2) 4,127 डॉलर पर स्थित हैं, जबकि पिवट स्तर 4,172 डॉलर और रेजिस्टेंस आर1 (R1) 4,190 डॉलर तथा आर2 (R2) 4,216 डॉलर पर बने हुए हैं। जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तब तक केंद्रीय बैंकों की वास्तविक खरीदारी ही सोने को सबसे बड़ा रक्षा कवच प्रदान करती रहेगी।






















