भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को रफ्तार देने की दिशा में एक अहम प्रगति सामने आई है। अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को चार एफ404-आईएन20 लड़ाकू इंजनों की नई खेप सौंप दी है। यह आपूर्ति सितंबर 2026 में पूरी की गई। पिछले काफी समय से इंजनों के मिलने में हो रहे विलंब की वजह से तेजस एमके1ए विमानों का निर्माण कार्यक्रम अपनी तय समयसीमा से पीछे चल रहा था। नई खेप के आने से लड़ाकू जेट विमानों के असेम्बली कार्य में तेजी आने की उम्मीद जगी है, जिससे भारतीय वायुसेना के बेड़े को मजबूती मिलेगी।
2026 के तय लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
जीई एयरोस्पेस जून से दिसंबर 2026 के बीच कुल 20 इंजन भारत भेजने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, सितंबर में भेजे गए चार इंजनों से ठीक पहले अगस्त के महीने में भी तीन इंजन एचएएल को सौंपे जा चुके थे। इन लगातार हो रही आपूर्तियों के बाद कंपनी तय समयावधि में 20 इंजनों की डिलीवरी पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी का मुख्य ध्यान भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस को जरूरी ऊर्जा और शक्ति प्रदान करने वाले इंजनों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है, ताकि एचएएल और भारतीय वायुसेना के साथ स्थापित तालमेल बिना किसी बाधा के आगे बढ़ता रहे।
99 इंजनों का अनुबंध और उत्पादन से जुड़ी चुनौतियां
तेजस एमके1ए विमानों के लिए एचएएल ने वर्ष 2021 में जीई एयरोस्पेस के साथ 99 एफ404-आईएन20 इंजनों की खरीद का औपचारिक सौदा किया था। इस अनुबंध के तहत पहला इंजन 25 मार्च 2025 को भारत लाया गया था। हालांकि, इसके बाद आपूर्ति में कुछ व्यवधान आए। जीई एयरोस्पेस के अनुसार, जब यह अतिरिक्त आर्डर दिया गया था, तब एफ404-आईएन20 इंजन की मूल निर्माण लाइन लगभग पांच सालों से बंद पड़ी थी। कंपनी को न सिर्फ इस विनिर्माण संयंत्र को दोबारा सक्रिय करना पड़ा, बल्कि वैश्विक स्तर पर फैली कलपुर्जों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को भी नए सिरे से तैयार करना पड़ा। जीई के कॉम्बैट एंड ट्रेनर इंजन कारोबार के महाप्रबंधक शॉन वॉरेन ने स्पष्ट किया था कि कोविड-19 महामारी के कारण आपूर्ति श्रृंखला को दोबारा खड़ा करने का काम बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण साबित हुआ था। पूर्व एचएएल चेयरमैन डीके सुनील ने भी अप्रैल के दौरान आश्वस्त किया था कि कंपनी को साल के अंत तक 20 इंजनों की आपूर्ति मिल जाएगी।
दीर्घकालिक साझेदारी और अतिरिक्त 97 विमानों का विस्तार
भारतीय विमानन उद्योग के साथ जीई एयरोस्पेस का जुड़ाव हालिया आर्डर से कहीं अधिक पुराना है। सिंगल-इंजन वाले लड़ाकू विमान के लिए एफ404-आईएन20 इंजन को सबसे पहले वर्ष 2004 में चुना गया था। प्रारंभिक चरण में कंपनी ने वर्ष 2016 तक एचएएल को 65 इंजनों की आपूर्ति सफलतापूर्वक कर दी थी। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2025 में इस रक्षा कार्यक्रम को व्यापक विस्तार देते हुए एचएएल को 97 अतिरिक्त एलसीए एमके1ए विमानों के निर्माण के लिए 62,370 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल अनुबंध सौंपा था।
इस बड़े रक्षा सौदे में 68 लड़ाकू विमान और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल किए गए हैं। इन सभी विमानों की आपूर्ति 2027-28 से आरंभ होकर छह वर्षों की अवधि में पूरी करने का खाका तैयार किया गया है। विशेष बात यह है कि इन नए विमानों में 64 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
देश में ही बनेगा रखरखाव और मरम्मत का केंद्र
इंजनों की सीधी आपूर्ति के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव पर भी ठोस कदम उठाए गए हैं। अप्रैल 2026 में जीई एयरोस्पेस और भारतीय वायुसेना ने मिलकर भारत की सीमा के भीतर ही एक विशेष एफ404-आईएन20 इंजन डिपो स्थापित करने के औपचारिक समझौते की घोषणा की थी। यह डिपो पूरी तरह से भारतीय वायुसेना के स्वामित्व, संचालन और दैनिक प्रबंधन के अधीन रहेगा। वहीं अमेरिकी कंपनी जीई इस केंद्र के लिए आवश्यक तकनीकी परामर्श, कर्मियों का प्रशिक्षण, स्पेयर पार्ट्स और विशिष्ट तकनीकी उपकरण निरंतर उपलब्ध कराएगी, जिससे भविष्य में किसी भी तकनीकी खराबी को घरेलू स्तर पर ही दुरुस्त किया जा सकेगा।



















