लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक विधेयक 2026, राजनाथ सिंह ने परीक्षा तंत्र मजबूत होने पर जताया संतोषहरियाणा के नूंह में ग्रामीण सर्कस का खौफनाक अंत, 3 दिन की 'जीवित समाधि' के दौरान 27 वर्षीय दीपक की घुटकर मौतमिथुन राशिफल 30 जुलाई 2026: आर्थिक मामलों में बरतें सावधानी, वाणी के संयम से सुलझेंगे पारिवारिक मुद्देकर्क राशिफल 30 जुलाई 2026: सूर्य और गुरु देंगे तरक्की और जिम्मेदारी, चंद्रमा की स्थिति से बरतें सावधानीटेलीग्राम संस्थापक पावेल दुरोव पर रूस का शिकंजा, एफएसबी ने आतंकवाद के आरोपों में अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी कियारॉयल एनफील्ड और बीएसए को चुनौती देने आ रही CB500, त्योहारी सीजन से पहले अनऑफिशियल बुकिंग शुरूचैटजीपीटी के दौर में लेखक और प्रकाशन एल्गोरिद्म को मात देने के लिए अपना रहे हैं अनूठी मानवीय शैलीनाइटकॉल से दुनिया को दिवाना बनाने वाले फ्रांसीसी डीजे काविंस्की का 50 की उम्र में पेरिस में निधनघर पर मिनटों में बनाएं होटल जैसा रेस्टोरेंट स्टाइल टोमेटो पुलाव, जानें हर दाना खिला-खिला बनाने का आसान तरीकाराजा चौधरी का दावा: शादी के दौरान कभी नहीं मारा श्वेता तिवारी को, ग्रेजुएशन की डिग्री पर उठाए सवाल
बाबू देवकीनंदन जिस हवेली को बनवाकर कभी लौटे ही नहीं, जानें वजहकल्चर
4 जुल॰ 2026, 8:29 am (26 दिन पहले)· 2

बाबू देवकीनंदन जिस हवेली को बनवाकर कभी लौटे ही नहीं, जानें वजह

वाराणसी की मशहूर देवकीनंदन हवेली को बाबू देवकीनंदन ने 10 बीघे जमीन पर बनवाया था, लेकिन एक लिफ्ट न मिलने के गुस्से में वो इसे छोड़कर हमेशा के लिए चले गए।

बनारस की गलियों में ऐसी कई हवेलियां छिपी हैं जिनके पत्थरों में सदियों पुरानी कहानियां दफन हैं। इन्हीं में से एक है बाबू देवकीनंदन की वह आलीशान हवेली, जिसे उन्होंने बड़े शौक से बनवाया लेकिन एक रात भी वहां नहीं गुजारी। इस हवेली की नक्काशी और बनावट आज भी लोगों को हैरान कर देती है।

कौन थे बाबू देवकीनंदन?

सीनियर जर्नलिस्ट हिमांशु राज पांडेय के मुताबिक, बाबू देवकीनंदन मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे। ब्रिटिश शासन में उनकी अंग्रेज अफसरों से गहरी नजदीकी थी, यही वजह रही कि अंग्रेजों ने उन्हें वाराणसी के रामापुरा इलाके की जिम्मेदारी सौंप दी। यहां वो टैक्स कलेक्टर के पद पर तैनात हुए। इसी नौकरी के चलते वो प्रयागराज छोड़कर वाराणसी आ बसे और यहीं 10 बीघे जमीन पर अपनी शानदार हवेली खड़ी करवाई।

ये भी पढ़ें

लिफ्ट की जिद ने बदल दी पूरी कहानी

उस दौर में अंग्रेज सरकार ने इंग्लैंड से खास ऑर्डर देकर तीन लिफ्ट भारत मंगाई थीं। बाबू देवकीनंदन की इच्छा थी कि इन तीन लिफ्ट में से एक उनकी अपनी हवेली में लगे। इसके लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया, लेकिन किसी वजह से उन्हें वो लिफ्ट नसीब नहीं हुई। यह बात उन्हें इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने अपनी बनाई हुई इस आलीशान हवेली को हमेशा के लिए छोड़ दिया। इसके बाद वो कभी वापस बनारस नहीं लौटे और न ही कभी दोबारा इस हवेली में कदम रखा।

150 साल पुरानी यह हवेली आज भी है धरोहर

देवकीनंदन हवेली को बने करीब 150 साल हो चुके हैं। पत्थरों से बनी यह विशाल इमारत आज भी बनारस की धरोहर के तौर पर खड़ी है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा अब जर्जर हो चुका है। पांच मंजिला इस हवेली में कुल 48 कमरे हैं और हर कमरा हवादार बनाया गया है। हवेली में भारतीय स्थापत्य कला की झलक साफ दिखती है। यहां कई बरामदे हैं और एक विशाल आंगन भी मौजूद है। बनारस शहर में इतनी बड़ी और आलीशान हवेलियां अब बहुत कम बची हैं।

सवाल-जवाब

बाबू देवकीनंदन कौन थे?
वो मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे और ब्रिटिश शासन में वाराणसी के रामापुरा इलाके में टैक्स कलेक्टर के पद पर तैनात थे।
बाबू देवकीनंदन ने हवेली क्यों छोड़ दी?
इंग्लैंड से मंगाई गई तीन लिफ्ट में से एक अपनी हवेली में न लगवा पाने की वजह से वो इतने दुखी हुए कि उन्होंने हवेली हमेशा के लिए छोड़ दी।
देवकीनंदन हवेली कब बनी थी?
इस हवेली का निर्माण करीब 150 साल पहले हुआ था।
हवेली में कुल कितने कमरे हैं?
इस हवेली में कुल 48 कमरे हैं और हर कमरा हवादार बनाया गया है।
हवेली कितने बीघे जमीन पर बनी है?
यह हवेली 10 बीघे जमीन पर बनाई गई थी।
क्या यह हवेली आज भी मौजूद है?
हां, यह आज भी धरोहर के तौर पर मौजूद है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा जर्जर हो चुका है।
हवेली कितनी मंजिल की है?
यह पांच मंजिला हवेली है, जिसमें कई बरामदे और एक विशाल आंगन है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR