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गाजीपुर के 80 वर्षीय उमाकांत तिवारी नौ साल से निभा रहे रामलीला में ऋषियों की भूमिकाकल्चर
17 अक्तू॰ 2026, 1:51 pm (11 दिन पहले)· 0

गाजीपुर के 80 वर्षीय उमाकांत तिवारी नौ साल से निभा रहे रामलीला में ऋषियों की भूमिका

गाजीपुर के 80 वर्षीय उमाकांत तिवारी नौ साल से रामलीला के मंच पर महर्षि विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ जैसे ऋषियों के किरदार निभा रहे हैं। सरकारी शिक्षक के रूप में दो दशक तक सेवा देने वाले तिवारी रामचरितमानस और रामकथा के प्रति अपनी गहरी आस्था के कारण इस परंपरा से जुड़े हुए हैं।

गाजीपुर में रामलीला के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले 80 वर्षीय उमाकांत तिवारी पिछले नौ वर्षों से लगातार ऋषियों के किरदार निभा रहे हैं। सरकारी प्राथमिक विद्यालय में करीब दो दशक तक बच्चों को पढ़ाने वाले उमाकांत तिवारी का कहना है कि जब तक भगवान उन्हें शक्ति देंगे, वह रामलीला करते रहेंगे। उनकी यह यात्रा उम्र के इस पड़ाव पर भी उतनी ही सक्रिय है और मंच के प्रति उनका जुड़ाव आज भी पूरी तरह से कायम है।

शिक्षक से रामलीला के मंच तक का सफर

उमाकांत तिवारी ने वर्ष 1971 से लगभग 20 वर्षों तक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। नौकरी के दौरान भी उनका झुकाव रामकथा और धार्मिक परंपराओं की तरफ हमेशा बना रहा। अपने गृहग्राम में आयोजित होने वाली रामलीला की जिम्मेदारी उन्होंने करीब नौ वर्षों तक संभाली और गांव में नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ भी कराया। रामचरितमानस के प्रति उनका पुराना लगाव आज भी कम नहीं हुआ है।

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सेवा निवृत्ति के बाद जब लोगों ने उनसे पूछा कि वह आगे क्या करेंगे, तो उनका सीधा जवाब था कि अब वह केवल राम-राम जपेंगे। इसी गहरी आस्था ने उन्हें पेशेवर और सांस्कृतिक रूप से रामलीला के मंच से जुड़ने की प्रेरणा दी और उन्होंने ऋषि-मुनियों के पात्रों को जीवंत करना शुरू कर दिया। उनके लिए यह केवल कोई सामान्य अभिनय नहीं है, बल्कि प्रभु राम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करने का एक सार्थक माध्यम है।

महर्षि विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ के किरदार

उमाकांत तिवारी कभी महर्षि विश्वामित्र बनकर भगवान राम का मार्गदर्शन करते नजर आते हैं तो कभी गुरु वशिष्ठ की भूमिका में दिखाई देते हैं। वह बताते हैं कि महर्षि विश्वामित्र का किरदार उनके लिए केवल एक भूमिका नहीं बल्कि ज्ञान और सही मार्गदर्शन का प्रतीक है। रामायण में विश्वामित्र ने भगवान राम को रास्ता दिखाया और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार किया था। उनके अनुसार आज के समय में भी इन पात्रों से यह संदेश मिलता है कि अनुभवी लोगों को हमेशा नई पीढ़ी का सही मार्गदर्शन करना चाहिए।

इन सभी भूमिकाओं में गुरु वशिष्ठ का किरदार उन्हें सबसे अधिक पसंद है। इन चरित्रों के माध्यम से वह समाज में ज्ञान, संयम, उचित मार्गदर्शन और संस्कारों का संदेश प्रसारित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि रामकथा में गुरु का स्थान सबसे ऊपर होता है और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी व्यक्ति बड़ी से बड़ी कठिनाई को पार करके अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।

गाजीपुर की धार्मिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उमाकांत तिवारी गाजीपुर के इतिहास और उसकी धार्मिक पृष्ठभूमि को सीधे तौर पर ऋषि-मुनियों की प्राचीन परंपरा से जोड़कर देखते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने ताड़का वन का विशेष रूप से जिक्र किया और महर्षि विश्वामित्र से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को साझा किया। उन्होंने याद दिलाया कि इसी क्षेत्र में ताड़का का वध हुआ था और यह पूरी भूमि हमेशा से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रही है।

80 वर्ष की उम्र में भी उनका यह समर्पण इस बात का प्रमाण है कि आस्था और लगन उम्र की सीमाओं से परे होती है। जब तक शरीर में ऊर्जा और ईश्वर की कृपा बनी रहेगी, वह मंच पर ऋषियों का रूप धारण करते रहेंगे। उनके लिए यह कला राम के चरणों में समर्पित जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है।

सवाल-जवाब

उमाकांत तिवारी की उम्र कितनी है?
उमाकांत तिवारी की उम्र 80 वर्ष है।
वह कितने वर्षों से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं?
वह पिछले नौ वर्षों से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं।
उमाकांत तिवारी पहले क्या काम करते थे?
वह सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और उन्होंने करीब दो दशक तक बच्चों को पढ़ाया।
उन्हें रामलीला में कौन से किरदार निभाना पसंद है?
उन्हें महर्षि विश्वामित्र और गुरु वशिष्ठ के किरदार निभाना पसंद है, जिनमें गुरु वशिष्ठ की भूमिका उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है।
वह किस क्षेत्र से संबंधित हैं?
वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से संबंधित हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·11 दिन पहले

उम्र के इस पड़ाव पर भी ऐसी मानसिक सक्रियता और कला के प्रति लगाव वाकई गजब का है। बुढ़ापे में किसी शौक या रचनात्मक काम से जुड़े रहना मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए बहुत जरूरी होता है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·11 दिन पहले

पूजा जी, एकदम सही कहा आपने! उम्र के साथ पैशन ज़िंदा रखना ही असली मेंटल हेल्थ है, खासकर जब आप रिटायरमेंट के बाद भी कुछ ऐसा करते हैं जिससे दिमाग और दिल दोनों बिजी रहें।

Priya Sharma@priya-sharma·11 दिन पहले

उमाकांत जी की ऊर्जा और रामकथा के प्रति उनका यह समर्पण वाकई दिल को छू लेने वाला है। अस्सी साल की उम्र में भी मंच पर इतनी सक्रियता और स्पष्टता बनाए रखना आसान नहीं होता। क्या उनके परिवार के बाकी लोग भी कभी इस रामलीला में उनके साथ मंच पर आए हैं?

Neha Verma@neha-verma·11 दिन पहले

प्रिया जी, सच कहा आपने! और ताड़का वध वाले इलाके से जुड़े होने की उनकी बात ने तो मुझे भी हैरान कर दिया।

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