स्पेन के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी हलचल मच गई जब प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ की सरकार को देश में गहराते आवास संकट से निपटने के लिए लाए गए दो अहम अध्यादेशों पर संसद में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 87 साल की बुजुर्ग महिला मारिकार्मेन अबास्कल को उनके घर से बेदखल किए जाने के बाद पूरे मुल्क में भड़के विरोध प्रदर्शनों को शांत करने के इरादे से ये कानून पेश किए गए थे। संसद के निचले सदन में हुई इस हार ने अल्पमत सरकार की कमजोर पकड़ को उजागर कर दिया है, जिसके बाद समय से पहले आम चुनाव कराने का राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ने लगा है। सदन के बाहर जुटे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मतदान का नतीजा सामने आते ही अपना कड़ा आक्रोश जाहिर किया।
संसद में दोनों अध्यादेशों की हार और मतदान के आंकड़े
सदन में सरकार की ओर से पेश किए गए दोनों शाही अध्यादेशों को प्रभावी बने रहने के लिए संसदीय मंजूरी मिलना अनिवार्य था। पहले अध्यादेश पर हुए मतदान में पक्ष में 172 वोट पड़े, जबकि विरोध में 178 सांसदों ने मतदान किया। इस तरह पहला प्रस्ताव छह मतों के अंतर से खारिज हो गया। इसके तुरंत बाद लाए गए दूसरे और अधिक विवादास्पद मसौदे को और भी बड़े अंतर का सामना करना पड़ा। दूसरे अध्यादेश के खिलाफ 184 वोट पड़े, जबकि इसके समर्थन में सिर्फ 166 सांसद ही खड़े रहे।
इन नतीजों ने साफ कर दिया कि सोशलिस्ट नेता पेड्रो सांचेज़ के पास संसद में आवश्यक संख्याबल नहीं है। मौजूदा विधायी कार्यकाल के मुताबिक आम चुनाव अगले साल गर्मियों से पहले निर्धारित नहीं थे, लेकिन इस विधायी पराजय के बाद मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं गहरा गई हैं। सांचेज़ प्रशासन पहले से ही अपनी सोशलिस्ट पार्टी और अपने नजदीकी सहयोगियों से जुड़े कई अदालती मामलों तथा विभिन्न विवादों के चलते राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा था।
87 वर्षीय मारिकार्मेन अबास्कल का निष्कासन और भड़का जनाक्रोश
इस पूरे राजनीतिक तूफान की शुरुआत मध्य मैड्रिड के एक फ्लैट से हुई, जहां 87 साल की बुजुर्ग महिला मारिकार्मेन अबास्कल कई दशकों से रह रही थीं। फ्लैट की मालिक कंपनी उर्बागेस्तियोन ने किराए में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी, जिसे चुकाने में असमर्थ होने के कारण बुजुर्ग महिला को मकान से बेदखल कर दिया गया। पिछले सप्ताह जब निष्कासन की कार्रवाई की जा रही थी, तब सैकड़ों नागरिक उनके समर्थन में सड़कों पर उतर आए थे। इस घटना ने स्पेन के भीतर हाल के वर्षों में आसमान छूती किराए की दरों और किफायती घरों की कमी को लेकर लंबे समय से सुलग रहे असंतोष को बड़े आंदोलन में बदल दिया।
भारी सामाजिक दबाव और लगातार होते विरोध के चलते आखिरकार उर्बागेस्तियोन कंपनी को झुकना पड़ा और उसने अबास्कल को कम किराए पर उनके फ्लैट में वापस लौटने की पेशकश पर बातचीत की। हालांकि, बुजुर्ग महिला की वापसी का रास्ता साफ होने के बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। राजधानी मैड्रिड समेत देश के विभिन्न बड़े शहरों के प्रमुख चौराहों पर लोगों ने तंबू लगाकर डेरा डाल दिया और इस संकट के हल की मांग को लेकर सप्ताहांत में बड़े पैमाने पर मार्च निकालने का ऐलान कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की रणनीति और आम हड़ताल की तैयारी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किराएदारों के प्रमुख संगठन सिंडिकातो दे इंक्विलिनास ने संसद में बहस चलने के दौरान मैड्रिड के केंद्रीय चौराहे से तंबुओं का धरना समाप्त करने का फैसला किया। संगठन ने अपनी रणनीति बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि वे इस लड़ाई को किसी एक चौराहे तक सीमित रखने के बजाय मैड्रिड के हर मोहल्ले, रिहायशी इमारतों और आम घरों तक ले जाना चाहते हैं। संगठन का कहना है कि जहां भी किराए में अंधाधुंध बढ़ोतरी, मकानों से जबरन निष्कासन और मनमानी देखने को मिल रही है, वहां संघर्ष को खड़ा किया जाएगा ताकि बीते कुछ दिनों में सड़कों पर दिखी ऊर्जा को एक स्थायी ढांचे में बदला जा सके। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी आवास संकट को लेकर देशव्यापी आम हड़ताल की तैयारी में भी जुटे हैं।
संसद भवन के बाहर भी जबरदस्त तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। मतदान के दौरान सैकड़ों की तादाद में जमा हुए लोग सरकार और सांसदों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। नतीजे घोषित होते ही भीड़ से 'शर्म करो' और 'तुम्हारा मुनाफा, हमारी तबाही' जैसे तीखे नारे गूंजने लगे। प्रदर्शनकारी इस बात से बेहद खफा थे कि जनप्रतिनिधि बेकाबू होते किराए पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
खारिज किए गए दोनों अध्यादेशों के मुख्य प्रावधान
सड़कों पर फैलते जनआक्रोश को थामने के लिए वामपंथी गठबंधन सरकार ने आनन-फानन में दो अध्यादेश तैयार किए थे। पहले अध्यादेश के तहत आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर किराएदारों के निष्कासन पर वर्ष 2030 तक रोक लगाने का प्रावधान शामिल था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2028 से पहले समाप्त होने वाले सभी आवासीय अनुबंधों की अवधि में दो वर्ष का स्वतः विस्तार देने, पर्यटकों को किराए पर दिए जाने वाले अपार्टमेंटों पर कर की दरें बढ़ाने और आवासीय संपत्तियों की खरीद में सक्रिय उन अंतरराष्ट्रीय निवेश इकाइयों पर सख्त पाबंदियां लगाने की बात कही गई थी जिन्हें सरकार गिद्ध कोष के रूप में चिह्नित करती है।
दूसरा अध्यादेश और अधिक संवेदनशील था, जिसमें आवासीय रेंटल अनुबंधों के स्वतः नवीनीकरण की अनिवार्यता रखी गई थी। यह मांग लंबे समय से वामपंथी दलों और सिंडिकातो दे इंक्विलिनास द्वारा उठाई जा रही थी, ताकि मकान मालिक मनमाने ढंग से किरायेदारों को बाहर निकालकर किराया न बढ़ा सकें।
संसद में टकराव, आखिरी अपील और क्षेत्रीय दलों का रुख
संसद में शुक्रवार का सत्र बेहद गरमागरम और तनावपूर्ण रहा। रूढ़िवादी पीपुल्स पार्टी और दक्षिणपंथी वोक्स ने पहले ही दोनों अध्यादेशों का खुलकर विरोध करने का फैसला ले लिया था। ऐसी स्थिति में अल्पमत सरकार पूरी तरह से कैटेलोनिया और बास्क क्षेत्र के छोटे राष्ट्रवादी दलों के समर्थन पर निर्भर हो गई थी। लेकिन सत्र की पूर्व संध्या पर केंद्र-दक्षिणपंथी और कैटलन स्वतंत्रता समर्थक दल टुगेदर फॉर कैटेलोनिया ने साफ कर दिया कि वह दोनों कानूनों के खिलाफ वोट देगा, जिससे सरकार के प्रस्तावों की विफलता तय हो गई थी।
मतदान शुरू होने से ऐन पहले प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने सांसदों से अत्यंत भावुक अपील की। सांचेज़ ने कहा कि मैं आपसे मांग नहीं कर रहा, बल्कि आपसे साहसी और सुसंगत होने की विनती करता हूं, क्योंकि ये सिर्फ महत्वाकांक्षी उपाय नहीं हैं बल्कि बेहद जरूरी कदम हैं। प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि सांसदों को आवास बाजार में व्यवस्था और मानवीय मूल्य स्थापित करने होंगे, क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह असंतुलन पूरे समाज को बर्बाद कर देगा।
गठबंधन सरकार में शामिल दल सुमार के सामाजिक मामलों के मंत्री पाब्लो बुस्टिनडुई ने भी सदन में बेहद आक्रामक दलीलें रखीं। बुस्टिनडुई ने कहा कि आज का मुकाबला एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कुलीन वर्ग के सामने खड़ा होने का है जो देश के कामकाजी तबके की खून-पसीने की कमाई से मिलने वाले वेतन को किराए के रूप में निचोड़ रहा है ताकि उसे लाभांश के तौर पर बांटा जा सके, जबकि वे स्पेन में कर तक नहीं चुकाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन अध्यादेशों के विरोध में वोट डालने का सीधा मतलब उस कुलीन तंत्र के हितों की रक्षा करना और अपनी ही जनता से मुंह मोड़ना है।
विपक्ष की आपत्तियां और मकानों की आपूर्ति का तर्क
विपक्षी दलों ने सरकार के रुख को सिरे से खारिज कर दिया। टुगेदर फॉर कैटेलोनिया की प्रतिनिधि मरियम नोगेरास ने कहा कि इन अध्यादेशों को बिना किसी तैयारी और जल्दबाजी में तैयार किया गया है, जिनमें कानूनी गंभीरता की भारी कमी है। नोगेरास ने तर्क दिया कि ये प्रावधान विदेशी निवेश फंडों को संपत्तियां खरीदने, मुनाफा कमाने के लिए सट्टेबाजी जारी रखने और मकान खाली कराने से नहीं रोक पाएंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर इन दोनों अध्यादेशों से वह उलटा असर पैदा होगा जिसे रोकने का दावा सरकार कर रही है।
वहीं, दक्षिणपंथी खेमे ने दलील दी कि बाजार में इस तरह का सीधा सरकारी हस्तक्षेप मकान मालिकों में डर पैदा करेगा। उनका मानना था कि सख्त पाबंदियों के डर से मकान मालिक अपने घरों को किराए के बाजार से बाहर खींच लेंगे, जिससे मकानों की कमी हो जाएगी और कीमतें गिरने के बजाय और तेजी से बढ़ेंगी। पीपुल्स पार्टी के जुआन ब्रावो ने सदन में इस नीतिगत अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकारी फरमानों से घर सस्ते नहीं होते, घर तब सस्ते होते हैं जब बाजार में अधिक घरों का निर्माण होता है।



















