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सीकर का थोरासी खरसाडू गांव: एक भी मुस्लिम परिवार नहीं, फिर भी हिंदू ही जलाते हैं पीर बाबा की मजार पर अखंड ज्योतकल्चर
13 जून 2026, 6:52 am (92 दिन पहले)· 1

सीकर का थोरासी खरसाडू गांव: एक भी मुस्लिम परिवार नहीं, फिर भी हिंदू ही जलाते हैं पीर बाबा की मजार पर अखंड ज्योत

राजस्थान के सीकर जिले के थोरासी खरसाडू गांव में बसे पीर बाबा धाम की सेवा-पूजा पूरी तरह हिंदू समाज के हाथों में है, जबकि गांव में अब कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता. यहां चढ़ावे की रकम से स्कूल और फुटबॉल स्टेडियम तक खड़े किए गए हैं.

राजस्थान के सीकर जिले का थोरासी खरसाडू गांव इन दिनों सिर्फ अपने नाम से नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा की वजह से जाना जा रहा है जो धर्म की दीवारों को तोड़ती दिखती है. यहां गांव के पुराने जोहड़ (तालाब) के पास पीर बाबा की एक मजार है, और इसकी पूरी देखरेख, सुबह-शाम की सेवा-पूजा और व्यवस्था का जिम्मा हिंदू समाज के लोगों ने उठा रखा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी श्रद्धा से जिस मुस्लिम संत की मजार संभाली जा रही है, उसी गांव में आज एक भी मुस्लिम परिवार नहीं बसता.

एक घुड़सवार संत की कहानी, जो गांव की आस्था बन गई

गांव के बुजुर्ग और स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि सदियों पहले पीर बाबा एक जांबाज घुड़सवार के रूप में इस इलाके में आए थे. उनके निधन के बाद उन्हें इसी जगह सुपुर्द-ए-खाक किया गया और बाद में ग्रामीणों ने उनकी याद में यहां मजार बनवाई. बुजुर्गों की मानें तो उनके पूर्वज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी बाबा की चमत्कारी महिमा और उनसे जुड़ी आस्था के किस्से सुनाते आए हैं. शुरुआत में यहां सिर्फ एक साधारण पत्थर रखा हुआ था, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं का विश्वास गहराता गया, यह जगह बढ़ती चली गई. आज पूरे गांव के साझा सहयोग से यह एक भव्य और सुंदर धार्मिक स्थल का रूप ले चुकी है.

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भाद्रपद में तीन दिन का मेला, दोनों समुदायों की भीड़

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि से इस धाम पर तीन दिवसीय मेला शुरू होता है. इन दिनों यहां बड़े-बड़े झूले लगते हैं, फुटकर खिलौनों और मिठाइयों की दुकानें सजती हैं और कई सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम होते हैं. मेले में सीकर जिले के साथ-साथ राजस्थान के दूर-दराज के इलाकों से हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. लोग बाबा के दर पर मत्था टेकते हैं, मजार पर चादर चढ़ाते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगते हैं.

मंदिर जैसी अखंड ज्योत और परिक्रमा

इस मजार की एक खासियत इसे आम दरगाहों से अलग कर देती है. यहां हिंदू सनातन परंपरा की ही तरह घी और तेल की अखंड ज्योत दिन-रात लगातार जलती रहती है. आने वाले श्रद्धालु मजार की परिक्रमा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पात्र में चढ़ावा अर्पित करते हैं. जाति और धर्म से परे, यह स्थान हर वर्ग के लोगों के लिए गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है. खास बात यह है कि यहां जो भी दान-दक्षिणा और चढ़ावा आता है, वह किसी एक व्यक्ति के काम नहीं आता, बल्कि पूरे गांव के सामूहिक और सामाजिक विकास पर पारदर्शी ढंग से खर्च किया जाता है.

चढ़ावे से खड़ा हुआ स्कूल और फुटबॉल स्टेडियम

धाम के सुचारू संचालन के लिए गांव के प्रबुद्ध हिंदू लोगों ने बाकायदा ‘पीर बाबा सेवा समिति’ बनाई है, और इसी समिति के जरिए मंदिर तथा मजार की सारी व्यवस्थाएं संभाली जाती हैं. ग्रामीण बताते हैं कि चढ़ावे से मिलने वाली बड़ी रकम से गांव के सरकारी स्कूल, खेल मैदानों और आधुनिक खेल संसाधनों का तेजी से विस्तार किया गया है. यही वजह है कि थोरासी गांव आज पूरे शेखावाटी क्षेत्र में बेहतरीन खेल गतिविधियों के लिए एक नई पहचान बना चुका है. इसी चढ़ावे की राशि से गांव में फुटबॉल का एक बड़ा और आधुनिक स्टेडियम तैयार हुआ है, जहां कई खेल सुविधाएं मौजूद हैं और गांव के युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के बेहतर मौके मिल रहे हैं.

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