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80वें स्वतंत्रता दिवस पर CJI सूर्यकांत ने संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर, पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का दोहराया संकल्पदिल्ली
15 अग॰ 2026, 2:41 pm (1 घंटे पहले)· 0

80वें स्वतंत्रता दिवस पर CJI सूर्यकांत ने संवैधानिक मूल्यों पर दिया जोर, पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का दोहराया संकल्प

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानून के शासन और लोकतंत्र को देश की प्रगति का आधार बताया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का आह्वान किया.

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय गौरव और लोकतांत्रिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला. देश के सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारत के सशक्त और उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त कीं. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की वास्तविक उन्नति केवल भौतिक या तकनीकी पैमानों से तय नहीं होती, बल्कि उसकी असली ताकत लोकतंत्र, कानून के शासन, सामाजिक समानता और संवैधानिक सिद्धांतों की दृढ़ता में समाहित होती है. CJI सूर्यकांत का यह संदेश देशवासियों को अपनी लोकतांत्रिक जड़ों से जुड़े रहने और संविधान की भावना के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान करता है.

संवैधानिक सिद्धांतों और कानून के शासन पर CJI का संदेश

नई दिल्ली में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी. उन्होंने अपनी शुभकामनाओं में इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ता रहे. उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं. हमारा देश ताकत, लोकतंत्र, कानून के शासन, समानता और हमारे सभी संवैधानिक सिद्धांतों के साथ लगातार प्रगति करता रहे." CJI ने आगे उम्मीद जताई कि भारत एक अधिक मजबूत और उज्ज्वल भविष्य की ओर अपने कदम बढ़ाता रहेगा.

न्यायपालिका के प्रमुख के इस वक्तव्य का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है. उनका मानना है कि जब तक न्याय प्रणाली, समता और संवैधानिक मूल्य अक्षुण्ण रहेंगे, तब तक देश की प्रगति की नींव अडिग रहेगी. यह संबोधन आर्थिक और सामाजिक विकास को संवैधानिक मर्यादाओं के साथ जोड़ने की एक दूरदर्शी दृष्टि प्रस्तुत करता है.

लाल किले की प्राचीर से विकसित भारत 2047 का संकल्प

दूसरी ओर, ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र में बदलने के महासंकल्प का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद देश के 140 करोड़ नागरिकों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अटूट संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब देश अपनी आजादी की शताब्दी मनाएगा, यानी वर्ष 2047 में, तब भारत को विकसित राष्ट्र बनाकर ही दम लिया जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि अब छोटे-छोटे लक्ष्यों से काम चलने वाला नहीं है. देश को अपनी सोच का दायरा बढ़ाना होगा, क्योंकि बड़े सपने ही व्यापक सोच को जन्म देते हैं. जब सोच बड़ी होगी और संकल्प दृढ़ होंगे, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी देश के कदम नहीं रोक पाएंगी. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का बीड़ा उठाता है, तो वैश्विक पटल पर भारत को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल जाता है.

स्वदेशी तोपों की सलामी और 1721 फील्ड बैटरी का गौरव

इस 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारतीय सेना के सेरेमोनियल गनर्स की भूमिका भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही. लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण के ठीक बाद 1721 फील्ड बैटरी के जांबाज सेरेमोनियल गनर्स ने 21 तोपों की भव्य सलामी दी. इस अवसर पर आत्मनिर्भर भारत की झलक भी देखने को मिली, क्योंकि सलामी के दौरान पूरी तरह स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया. स्वदेशी तोपों की यह गूंज भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता और तकनीकी सामर्थ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण बनी.

ऐतिहासिक क्षण: लाल किले पर गूंजी वंदे मातरम की पूरी प्रस्तुति

इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह एक और ऐतिहासिक घटना का गवाह बना. स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त के अवसर पर पहली बार लाल किले के प्राचीर पर 'वंदे मातरम' की संपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस ऐतिहासिक क्षण का विशेष रूप से उल्लेख किया और इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए एक अत्यंत गौरवशाली क्षण बताया. वंदे मातरम की संपूर्ण धुनों ने पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचार कर दिया.

2036 ओलंपिक और प्रतिभा खोज अभियान का बड़ा ऐलान

खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और देश के युवाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने "जो खेले, वो खिले" के मूल मंत्र के साथ देश भर में एक व्यापक टैलेंट हंट अभियान शुरू करने का बड़ा ऐलान किया. इस पहल के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से खेल प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान की जाएंगे, ताकि 2036 के ओलंपिक में भारत नया इतिहास रच सके.

न्यायपालिका और कार्यपालिका के संदेशों का साझा विजन

80वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधनों ने मिलकर राष्ट्र निर्माण का एक संपूर्ण रोडमैप देश के सामने रखा है. एक तरफ जहां न्यायपालिका के शीर्ष पद से संवैधानिक गरिमा, समानता और विधि के शासन को बनाए रखने का संदेश मिला, वहीं दूसरी तरफ कार्यपालिका के प्रमुख ने विकास, नवाचार, सैन्य स्वावलंबन और खेल प्रतिभाओं के संवर्धन का रोडमैप पेश किया. यह दोहरा संदेश भारत को लोकतांत्रिक मूल्यों से समृद्ध करते हुए 2047 तक विश्व पटल पर एक अग्रणी और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

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सवाल-जवाब

80वें स्वतंत्रता दिवस पर CJI सूर्यकांत ने क्या संदेश दिया?
CJI सूर्यकांत ने लोकतंत्र, कानून के शासन, समानता और संवैधानिक सिद्धांतों के साथ भारत के मजबूत और उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
लाल किले पर 21 तोपों की सलामी में किस तोप का इस्तेमाल हुआ?
1721 फील्ड बैटरी के सेरेमोनियल गनर्स ने स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल कर 21 तोपों की सलामी दी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 को लेकर क्या संकल्प दोहराया?
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने पर भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया.
2036 ओलंपिक को लेकर पीएम मोदी ने किस अभियान की घोषणा की?
पीएम मोदी ने 'जो खेले, वो खिले' मंत्र के साथ देश भर में युवा खेल प्रतिभाओं को खोजने और तराशने के लिए टैलेंट हंट अभियान की घोषणा की.
इस बार स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर वंदे मातरम की क्या खासियत रही?
आजादी के बाद 15 अगस्त को पहली बार लाल किले के प्राचीर पर 'वंदे मातरम' की संपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति गूंजी.
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·32 मिनट पहले

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यायपालिका और कार्यपालिका के शीर्ष नेतृत्व का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत की आगामी शताब्दी की प्रगति केवल आर्थिक आंकड़ों पर नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं और कानून के शासन पर टिकी होगी। 2047 के 'विकसित भारत' लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थागत संतुलन और सामाजिक समरसता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती और आवश्यकता होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 मिनट पहले

स्वतंत्रता दिवस पर न्यायपालिका प्रमुख और प्रधानमंत्री के इन बयानों से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने में कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका केंद्रीय होगी। एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि जब तक आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता, समानता और त्वरित न्याय सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक विकास के बड़े सपने को धरातल पर उतारना कठिन रहेगा।

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