दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साउथ-वेस्टर्न रेंज की टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ सफलता हासिल करते हुए टिल्लू ताजपुरिया और कौशल चौधरी उर्फ गुरविंदर बाबा गैंग के तीन सक्रिय शूटरों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 33 वर्षीय हेमंत उर्फ मोनू, 25 वर्षीय नयन अग्रवाल और 22 वर्षीय दुर्गेश राय उर्फ डेविल के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पंजाब और हरियाणा में रंगदारी वसूलने के उद्देश्य से की जाने वाली कई संभावित गोलीबारी की घटनाओं को समय रहते टाल दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 11 जिंदा कारतूस भी जब्त किए हैं। जांच में सामने आया है कि यह पूरा सिंडिकेट अमेरिका में बैठकर अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे गैंगस्टर गुरविंदर उर्फ बाबा के सीधे निर्देशों पर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
अंतरराज्यीय निगरानी के बाद रंगदारी और गोलीबारी की साजिशें नाकाम
इस आपराधिक गिरोह की हालिया गतिविधियों का खुलासा तब हुआ जब 30 जुलाई 2026 को गैंगस्टर दिनेश कराला के करीबी सहयोगी हरीश माथुर की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में टिल्लू ताजपुरिया, कौशल चौधरी और गुरविंदर बाबा गैंग के सदस्यों का नाम सामने आने के बाद स्पेशल सेल हरकत में आई। पुलिस टीम ने दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय इस सिंडिकेट के शूटरों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखना शुरू कर दिया। लगभग 10 दिनों तक लगातार ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए गुप्त जानकारियां एकत्र की गईं और संदिग्धों की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। इस सतर्कता का मुख्य उद्देश्य नेटवर्क के मुख्य शूटरों की पहचान कर उन्हें किसी भी नई वारदात को अंजाम देने से पहले गिरफ्तार करना था।
पश्चिम विहार में बिछाया गया जाल और हथियारों की बरामदगी
सघन निगरानी के दौरान 2 अगस्त को स्पेशल सेल को एक ठोस सूचना मिली कि गैंग के दो प्रमुख शूटर पश्चिम विहार इलाके में किसी मकसद से आने वाले हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए जिला पार्क के पास रणनीतिक घेराबंदी की और जाल बिछाया। जैसे ही हेमंत उर्फ मोनू और नयन अग्रवाल वहां पहुंचे, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 8 जिंदा कारतूस बरामद हुए। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे अमेरिका में मौजूद गुरविंदर बाबा के संपर्क में थे और उसी के दिए गए आदेशों का पालन कर रहे थे।
लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और चंडीगढ़ के सैलून पर हमले की नाकाम कोशिश
हिरासत में हुई गहन पूछताछ के दौरान आरोपियों ने गिरोह के काम करने के तरीके और अपनी पिछली गतिविधियों की पूरी जानकारी दी। आरोपियों ने बताया कि मई 2026 में गुरविंदर बाबा के निर्देश पर वे पंजाब के जीरकपुर पहुंचे थे। वहां एक खेत में छिपाकर रखी गई हथियारों और कारतूसों की खेप को उन्होंने उठाया और बाद में उसे दिल्ली में गुरविंदर बाबा के एक अन्य स्थानीय संपर्क को सौंप दिया। इसके अलावा मई महीने में ही दोनों शूटर रंगदारी वसूलने की नीयत से चंडीगढ़ के दो बड़े सैलून पर गोलीबारी करने गए थे, लेकिन उस समय किसी कारणवश घटना को अंजाम नहीं दे पाए थे। दोनों दोबारा उन सैलूनों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे, लेकिन उससे पहले ही स्पेशल सेल ने उन्हें पकड़ लिया।
सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वाले दुर्गेश राय उर्फ डेविल की गिरफ्तारी
कार्रवाई की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने 8 अगस्त को गैंग के तीसरे शूटर 22 वर्षीय दुर्गेश राय उर्फ डेविल को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में पाया गया कि दुर्गेश ने गुरविंदर बाबा के कहने पर हरियाणा के करनाल जिले में खेतों के बीच बने एक आवासीय मकान पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। दुर्गेश का पहले से भी आपराधिक इतिहास रहा है और वह अपहरण तथा लूटपाट के मामलों में नामजद आरोपी है। उसके खिलाफ राजस्थान में भी अपहरण और लूट का एक केस दर्ज है। वह इलाके में अपना खौफ कायम करने के लिए सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाकर खुद को बड़े गैंगस्टर और माफिया के रूप में पेश करता था। उसने अपनी खौफनाक छवि बनाने के मकसद से ही अपना नाम डेविल रखा था।
गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक बैकग्राउंड और आगे की जांच
पुलिस जांच में तीनों आरोपियों की पृष्ठभूमि से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। 33 वर्षीय हेमंत उर्फ मोनू 12वीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है, लेकिन जल्दी और आसान तरीके से पैसा कमाने की हसरत में उसने अपराध का रास्ता चुन लिया। वह पहले भी एक रेस्टोरेंट मालिक पर गोलीबारी करने के मामले में आरोपी रह चुका है और गैंग के लिए हथियार, फंडिंग तथा अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाता था। वहीं 25 वर्षीय नयन अग्रवाल पहली बार किसी आपराधिक वारदात में पकड़ा गया है, जो हेमंत के संपर्क में आने के बाद इस गिरोह में शामिल हुआ था। स्पेशल सेल का कहना है कि इस गिरोह के बाकी सदस्यों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच अभी जारी है।



















