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स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा, लाल किले पर एआई तकनीक और 25,000 जवानों की तैनातीदिल्ली
15 अग॰ 2026, 11:20 am (4 घंटे पहले)· 2

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा, लाल किले पर एआई तकनीक और 25,000 जवानों की तैनाती

स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर देश की राजधानी दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। लाल किले सहित पूरी दिल्ली में 25,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं, जिनकी निगरानी एआई कैमरों से की जा रही है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के बीच देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दिल्ली पुलिस और विभिन्न अर्धसैनिक बलों के 25,000 से अधिक जवानों को रणनीतिक स्थलों पर तैनात किया गया है। ऐतिहासिक लाल किले के आसपास सुरक्षा का बहुस्तरीय घेरा तैयार किया गया है, जहां मुख्य समारोह आयोजित होना है। जमीनी बल के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी प्रणालियों का भी व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।

एआई तकनीक और 1,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लाल किले के अंदर और बाहरी परिसरों में 1,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये सभी कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित वीडियो एनालिटिक्स प्रणाली से लैस हैं। इन कैमरों से प्राप्त होने वाली लाइव फीड पर नज़र रखने के लिए एक विशेष कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यह आधुनिक सर्विलांस सिस्टम सुरक्षा कर्मियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अवांछित भीड़ या कानून-व्यवस्था से जुड़ी आपात स्थिति की रियल-टाइम में पहचान करने में मदद करेगा, जिससे क्विक रिस्पॉन्स टीमें बिना किसी देरी के मौके पर कार्रवाई कर सकेंगी।

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बहुस्तरीय चेकिंग और एंटी-टेरर रिस्पॉन्स सिस्टम

राजधानी की सीमाओं तथा लाल किले की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों और प्रवेश द्वारों पर कई स्तरों की चेकिंग और स्क्रीनिंग प्रक्रिया लागू की गई है। किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे या आपातकालीन परिस्थिति का तुरंत मुकाबला करने के लिए एक विशेष एंटी-टेरर रिस्पॉन्स सिस्टम भी सक्रिय किया गया है। इसके अतिरिक्त, रिस्पॉन्स टीमों को संवेदनशील स्थानों पर अलर्ट मोड में तैनात रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

अंतर-एजेंसी समन्वय और मॉक ड्रिल

पुलिस उपायुक्त (उत्तर) राजा बंथिया के अनुसार, बीते वर्ष की घटनाओं और उभरती सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ये व्यापक प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए पहले से ही विस्तृत सूचना साझाकरण व्यवस्था और संयुक्त अभ्यास किए गए हैं। शहर के प्रमुख बाजारों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों, बस टर्मिनलों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण परिसरों में भी सुरक्षा जवान मुस्तैदी से निगरानी रख रहे हैं। मॉक ड्रिल के माध्यम से सभी कर्मियों को आपातकालीन संचालन प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया गया है ताकि किसी भी परिस्थिति में त्वरित और समन्वित कदम उठाए जा सकें।

सवाल-जवाब

स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में कितने सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं?
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 25,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं।
लाल किले पर सुरक्षा के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है?
लाल किले के आसपास 1,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वीडियो एनालिटिक्स और लाइव कंट्रोल रूम निगरानी से जुड़े हैं।
सुरक्षा व्यवस्था तय करते समय किन बातों का ध्यान रखा गया है?
पुलिस उपायुक्त (उत्तर) राजा बंथिया के अनुसार, बीते वर्ष की घटनाओं और संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय चेकिंग, मॉक ड्रिल और अंतर-एजेंसी समन्वय किया गया है।
क्या दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी निगरानी बढ़ाई गई है?
हां, लाल किले के अलावा शहर के प्रमुख बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की सुरक्षा में एआई कैमरों और 25,000 जवानों का यह बहुस्तरीय घेरा केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह भी जरूरी है कि इस हाई-टेक तकनीक और अंतर-एजेंसी समन्वय का असर उत्तर प्रदेश से सटी सीमाओं और महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट्स पर भी दिखाई दे, क्योंकि त्योहारों के समय क्षेत्रीय आवाजाही और भीड़भाड़ बढ़ने से जमीनी पुलिसिंग की परीक्षा राष्ट्रीय राजधानी के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों में भी होती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर केवल राजधानी के भीतर घेराबंदी पर्याप्त नहीं होती। पड़ोसी राज्यों से सटी सीमाओं पर तैनात अर्धसैनिक बलों और एआई-सक्षम निगरानी प्रणालियों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करना सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थानीय पुलिस के बीच त्वरित संदेश और डेटा का आदान-प्रदान निर्बाध नहीं होगा, तब तक इस बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र की पूर्ण प्रभावशीलता सुनिश्चित करना कठिन रहेगा।

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