निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय विचार-विमर्श में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। जूम कॉल के जरिए चर्चा में शामिल हुए ठाकरे ने लगभग 10 मिनट तक अपनी बात रखी और विपक्षी खेमे के विभिन्न दलों द्वारा अलग-अलग विरोध कार्यक्रम चलाने पर सवाल खड़े किए। उनका मानना था कि बंटे हुए आयोजनों से जनसमर्थन और दबाव कमजोर पड़ता है, इसलिए सभी दलों को एकजुट होकर एक साझा मंच तैयार करना चाहिए।
विभाजित कार्यक्रमों के बजाय एक संयुक्त आंदोलन की जरूरत
बैठक के दौरान ठाकरे ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग प्रांतों में बिखरे हुए प्रदर्शन आयोजित करने से कोई खास असर पैदा नहीं होता। इसके स्थान पर गठबंधन के संयुक्त बैनर तले एक व्यापक और राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाना चाहिए। उन्होंने गठबंधन के घटकों को सलाह दी कि दलों का अपने स्तर पर स्वतंत्र कार्यक्रम करना राजनीतिक दृष्टि से उचित नहीं है। जब तक सभी सहयोगी दल पूरी ताकत के साथ एक बैनर के नीचे जमीन पर नहीं उतरेंगे, तब तक सत्तापक्ष या संवैधानिक संस्थाओं पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं डाला जा सकेगा।
कांग्रेस की रणनीति और महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर सवाल
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने किसी दल का खुला नाम लिए बिना अकेले आगे बढ़ने की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया। उन्होंने महाराष्ट्र में कांग्रेस की ओर से स्वतंत्र रूप से आयोजित किए जा रहे धरना-प्रदर्शनों का हवाला दिया और कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शन गठबंधन के साझा झंडे तले ही होने चाहिए। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेतृत्व ने निर्वाचन आयोग से जुड़े मामले में अपनी राज्य इकाइयों को पूरे देश में आंदोलन छेड़ने के निर्देश दिए थे, जिसके चलते विभिन्न राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र प्रदर्शन किए थे। ठाकरे की मुख्य आपत्ति इसी बात को लेकर थी कि इससे गठबंधन की सामूहिक ताकत दिखाई देने के बजाय बिखराव नजर आता है।
4 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन और भविष्य की रूपरेखा
अपनी कार्ययोजना की घोषणा करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि 4 अक्टूबर को महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) की ओर से निर्वाचन आयोग के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आह्वान किया कि आगे चलकर पूरे विपक्षी गठबंधन को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मिलकर मैदान में उतरना होगा। उन्होंने दोहराया कि विपक्षी दलों का यह संघर्ष तभी सार्थक और प्रभावी साबित होगा जब सभी घटक दल एक मंच पर खड़े होकर जनता के बीच जाएंगे।



















