फरीदाबाद से होकर बहने वाली दिल्ली-आगरा सिंचाई नहर स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। खेतों को सींचने के उद्देश्य से तैयार की गई इस नहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आत्महत्या के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी गई है। पारिवारिक स्तर पर होने वाले छोटे-मोटे कलह या मामूली विवादों के बाद भी लोग मानसिक तनाव में आकर सीधे इस नहर की तरफ दौड़ पड़ते हैं और इसमें छलांग लगाकर अपनी जान गंवा देते हैं। इस तरह की दर्दनाक घटनाओं के लगातार बढ़ने के कारण फरीदाबाद के विभिन्न इलाकों में रहने वाले लोग अब दहशत और दुख के साए में जीने को मजबूर हैं। इसी वजह से स्थानीय लोग काफी समय से नहर के किनारे पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग उठा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में गंभीरता दिखाए, तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
नहर का मार्ग और लगातार होते हादसे
नहर की भौगोलिक स्थिति और इसके बढ़ते खतरों के बारे में स्थानीय निवासी बबलू हुड्डा ने महत्वपूर्ण विवरण साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि यह आगरा कैनाल मुख्य रूप से दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके से निकलती है और फरीदाबाद होते हुए आगरा तक जाती है। दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा राज्य के भीतर इसका दायरा कर्मन बॉर्डर तक फैला हुआ है, जिसके आगे बढ़ते ही यह उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर जाती है। बबलू हुड्डा का दावा है कि यदि केवल फरीदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले पिछले छह महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए, तो इस नहर में कूदकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी है। मानसिक तनाव और अवसाद की वजह से लोग बिना सोचे-समझे यह आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। घर में होने वाली मामूली नोकझोंक भी लोगों को इस खौफनाक रास्ते पर ढकेल रही है, जिससे इस क्षेत्र में शोक का माहौल बना रहता है।
सुरक्षा के लिए 15 फीट ऊंची फेंसिंग की मांग
इस भयावह स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए स्थानीय लोग प्रशासन से ठोस कदम उठाने की गुहार लगा रहे हैं। बबलू हुड्डा ने सरकार और संबंधित विभाग से अपील की है कि इन घटनाओं पर तुरंत लगाम लगाई जानी चाहिए। इसके समाधान के रूप में उन्होंने नहर के किनारों पर लगभग 15 फीट ऊंची कटीले तारों वाली फेंसिंग लगाने की मांग की है। यह घेराबंदी इस तरह से की जानी चाहिए कि किसी भी व्यक्ति के लिए इस पर चढ़ना या इसे पार करना बिल्कुल नामुमकिन हो जाए। इसे देश की सीमाओं को सुरक्षित करने वाले बॉर्डर की तर्ज पर सील किया जाना चाहिए। एक अन्य स्थानीय निवासी विकास का भी मानना है कि नहर के पास सुरक्षा दीवार या 15 फीट ऊंची फेंसिंग न होने की वजह से लोग आसानी से इसमें कूद जाते हैं। शुभम नामक युवक ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि लगातार हो रही खुदकुशी की घटनाओं को टालने के लिए फेंसिंग बेहद जरूरी है। सुरक्षा के मजबूत इंतजाम ही लोगों को क्षणिक आवेग में आकर नहर में कूदने से रोक सकते हैं।
सिंचाई का साधन अब बन चुकी है 'खूनी नहर'
नहर की बदहाली और सुरक्षा संबंधी अन्य खतरों पर बात करते हुए स्थानीय नागरिक आकाश ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जो नहर कभी फसलों को नया जीवन देने के लिए पानी की आपूर्ति करती थी, वह आज एक डरावनी और 'खूनी नहर' में बदल चुकी है। पिछले दो-तीन सालों के दौरान यहां हादसों का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर गया है। बुजुर्गों की पुरानी यादों को साझा करते हुए आकाश बताते हैं कि एक समय इस नहर का पानी इतना स्वच्छ और निर्मल हुआ करता था कि लोग इसे सीधे पीने के काम में लाते थे। लेकिन वर्तमान समय में इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह पानी पीने योग्य तो दूर, खेतों की सिंचाई करने के लायक भी नहीं बचा है। जिन ग्रामीण क्षेत्रों से होकर यह नहर गुजरती है, वहां के पानी के दूषित होने के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां फैलने की खबरें भी सामने आ रही हैं। इसके अलावा, नहर के आसपास का सुनसान इलाका अब अपराधियों और लुटेरों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसलिए सरकार को बिना किसी देरी के नहर के दोनों किनारों पर मजबूत फेंसिंग करानी चाहिए।



















