लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के निराशाजनक नतीजों को लेकर अपनी छात्र इकाई के शीर्ष नेताओं को तलब किया। उन्होंने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के प्रभारी कन्हैया कुमार और संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की मौजूदगी में चुनाव परिणामों की समीक्षा की और दोनों नेताओं से संगठन के लचर प्रदर्शन पर सीधे और कड़े सवाल किए। इस बैठक के दौरान छात्र संघ चुनाव में पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक खामियों और उम्मीदवारों के चयन को लेकर गहन बातचीत हुई।
चार सदस्यीय सेंट्रल पैनल में खाता भी नहीं खोल सकी कांग्रेस की छात्र इकाई
कुछ सप्ताह पहले संपन्न हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन को गहरा झटका लगा था, जहां चार सदस्यीय सेंट्रल पैनल में संगठन का एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका। दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के तीनों अहम पदों पर अपना परचम लहराया। पूरे पैनल में कांग्रेस की छात्र इकाई का पूरी तरह सफाया होना पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जिससे नेतृत्व बेहद असहज है।
युवा संवाद अभियान के बीच हार ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता
यह चुनावी हार ऐसे समय में सामने आई है जब कांग्रेस पार्टी देश भर के युवाओं और नई पीढ़ी के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए सक्रिय अभियान चला रही है। राहुल गांधी स्वयं युवाओं और विद्यार्थियों के मुद्दों को समझने और उनसे सीधा संवाद स्थापित करने के मकसद से 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक के छात्र चुनाव में एक भी सीट न जीत पाना कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी छात्र संवाद अभियान की विश्वसनीयता के लिए एक बड़ा धक्का साबित हुआ है।
दीपांशु शौकीन के टिकट और बगावत पर उठे सवाल
समीक्षा बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से खासतौर पर दीपांशु शौकीन के प्रकरण को लेकर जवाब-तलब किया। उन्होंने पूछा कि संगठन छोड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन को समय रहते मनाकर पार्टी में शामिल क्यों नहीं रखा गया और उन्हें आधिकारिक टिकट क्यों नहीं दिया गया। उल्लेखनीय है कि संगठन से अलग होकर निर्दलीय लड़े दीपांशु शौकीन ने छात्र संघ के उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। इस सवाल के जवाब में दोनों नेताओं ने नेतृत्व को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी और स्पष्टीकरण दिया कि शौकीन द्वारा रखी गई शर्तें संगठन के नियमों के लिहाज से अनुचित थीं।
नेताओं के स्पष्टीकरण से असहज दिखा शीर्ष नेतृत्व
नेताओं की दलीलों के बावजूद राहुल गांधी इस पूरे विवाद और चुनावी प्रबंधन के तौर-तरीकों से असंतुष्ट नजर आए। उनका मानना था कि पूरे मामले को जिस तरह से संभाला गया, उसने संगठन की कमजोरी को उजागर किया और विपक्ष को सीधे तौर पर बढ़त दिला दी। इस हार ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि संगठन के स्तर पर जमीनी तालमेल और कार्यकर्ताओं के असंतोष को दूर करने में कहां चूक हुई, जिसके चलते प्रमुख छात्र इकाई राजधानी के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में भी विफल रही।


















