यूरोपीय नीति निर्माताओं द्वारा मौद्रिक नीति को सख्त करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राबोबैंक के रणनीतिकारों बास वैन गेफेन और एलविन डी ग्रूट के अनुसार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी आने वाले दिसंबर के महीने में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर यह वृद्धि लागू होती है, तो केंद्रीय बैंक की प्रमुख डिपॉजिट फैसिलिटी दर मौजूदा स्तर से चढ़कर 2.75 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का यह नया आकलन मुख्य रूप से हालिया समय में ऊर्जा कीमतों के बढ़े हुए अनुमानों पर आधारित है, जिसने नीति निर्माताओं के सामने मुद्रास्फीति से निपटने की तात्कालिक चुनौती पेश कर दी है।
ऊर्जा के झटके और महंगाई के बीच संतुलन की चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों में यह संभावित कदम केंद्रीय बैंक द्वारा किसी आक्रामक मौद्रिक सख्ती के नए दौर की शुरुआत नहीं है। इसके बजाय, यह बढ़ी हुई ऊर्जा लागतों के कारण अर्थव्यवस्था में उत्पन्न होने वाले तात्कालिक दबावों को नियंत्रित करने की एक नपी-तुली कवायद है। बास वैन गेफेन और एलविन डी ग्रूट ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा की कीमतों में आया नया उछाल व्यापक आर्थिक गतिविधियों की तुलना में मुद्रास्फीति के आंकड़ों को कहीं ज्यादा तेजी और गहराई से प्रभावित कर रहा है। ऐसी स्थिति में, केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार में भविष्य की महंगाई से जुड़ी उम्मीदें अनियंत्रित न हों।
यदि नीति निर्माता इस समय सुधारात्मक कदम नहीं उठाते हैं, तो ऊर्जा का यह झटका अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है। विश्लेषकों ने आगाह किया कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें जितनी लंबी अवधि तक बनी रहेंगी, तथाकथित दूसरे दौर के प्रभाव यानी सेकंड राउंड इफेक्ट्स का खतरा उतना ही गंभीर होता चला जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें धीरे-धीरे विनिर्माण, परिवहन, दैनिक सेवाओं और श्रमिकों की मजदूरी तक को प्रभावित करने लगती हैं। दिसंबर में होने वाली संभावित बढ़ोतरी और इससे पहले हुई दो लगातार ब्याज दर वृद्धि का मुख्य उद्देश्य इसी प्रक्रिया को रोकना है। जब तक आधिकारिक आर्थिक आंकड़े और सर्वेक्षण व्यापक स्तर पर इस तरह के दूसरे दौर के प्रभावों के फैलने का संकेत नहीं देते, तब तक केंद्रीय बैंक को बहुत आक्रामक ढंग से दरों में बढ़ोतरी करने की आवश्यकता नहीं होगी।
मार्च से राहत की उम्मीद और नीतिगत ठहराव का रुख
दिसंबर में संभावित वृद्धि के बावजूद, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक का यह कदम पूरी तरह से अस्थायी साबित हो सकता है। राबोबैंक के विश्लेषकों ने रेखांकित किया कि आगामी वर्ष में मार्च के महीने से ऊर्जा की कीमतों में गिरावट शुरू होने की संभावना है। जैसे ही कमोडिटी बाजारों में दबाव हल्का होगा, केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरों को और ऊपर ले जाने का दबाव भी स्वतः समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नीति निर्माताओं को दरें बढ़ाने के इस रुख को बहुत लंबे समय तक जारी रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
इस विश्लेषण के आधार पर केवल एक अतिरिक्त बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, जिसके बाद दर वृद्धि के इस पूरे चक्र पर विराम लग सकता है। हालांकि, यदि मुद्रास्फीति केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित न रहकर अर्थव्यवस्था के अन्य व्यापक अंगों में फैलती है, तो नीतिगत जोखिम ऊपर की ओर झुक सकते हैं। फिर भी, आधारभूत परिदृश्य यही दर्शाता है कि दिसंबर का संभावित कदम इस चक्र की अंतिम वृद्धि होगा।
वैश्विक वित्तीय बाजारों और केंद्रीय बैंकों का परिदृश्य
यूरोप में नीतिगत बदलावों की इस चर्चा के बीच दुनिया भर के अन्य प्रमुख वित्तीय बाजारों में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। जापान के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय मौद्रिक नीति समिति की 7-2 के बहुमत वाली वोटिंग से लिया गया। हालांकि कई हफ्तों से बाजार इस फैसले की उम्मीद कर रहा था, लेकिन दर वृद्धि के खिलाफ पड़े दो आश्चर्यजनक असहमति वोटों के कारण जापानी मुद्रा पर दबाव देखा गया। नतीजतन, शुक्रवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन में कमजोरी बढ़ी और यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी दो सप्ताह के उच्चतम स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब जा पहुंची, जबकि गवर्नर उएदा की टिप्पणियां सख्त रुख की ओर इशारा कर रही थीं।
मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत समर्थन मिलता दिखा। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान एयूडी/यूएसडी लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करता रहा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने डॉलर की बढ़त को सीमित किया, जबकि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक की आक्रामक टिप्पणियों ने दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत दृष्टिकोण और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर की गिरावट पर अंकुश लगाया, जिससे इस करेंसी पेयर की बढ़त एक सीमित दायरे में सिमट गई।
कमोडिटी और परिसंपत्ति बाजारों में, सोने की कीमतों में तेजी का रुख बना रहा। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र के पूर्वार्ध में सोना लगातार दूसरे कारोबारी दिन चढ़ते हुए नए साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जहां खरीदार 4,400 डॉलर प्रति औंस के पार टिकने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी बांड यील्ड में गिरावट ने सर्राफा बाजार को सहारा दिया। डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो बिटकॉइन यानी BTC ने जुलाई के 57,800 डॉलर के निचले स्तर से मजबूत वापसी दर्ज की है। जुलाई और अगस्त के लगातार दो महीनों में आई बढ़त के साथ यह करीब 33 प्रतिशत उछला है, हालांकि इसके बावजूद यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 40 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।


















