सैन्य साजोसामान के अंतरराष्ट्रीय परिवहन में हुई एक बड़ी गड़बड़ी ने वाशिंगटन के रक्षा गलियारों में बेचैनी पैदा कर दी है। ऑस्ट्रेलिया की धरती से मरम्मत कार्य के वास्ते अमेरिका रवाना किया गया अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ युद्धक विमान F-35 का एक बेहद संवेदनशील पुर्जा अप्रत्याशित रूप से हांगकांग के बंदरगाह पर जा पहुंचा। यह खेप प्रशांत महासागर के समुद्री मार्ग से अमेरिकी ठिकाने की ओर बढ़ रही थी, परंतु बीच सफर में कार्गो का रुख बदल गया। इस पूरे वाकये ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि वर्तमान में यह पुर्जा किसके कब्जे में है और इसका मार्ग क्यों बदला गया, इसकी कोई पुख्ता वजह सार्वजनिक नहीं हो सकी है।
कॉकपिट कैनोपी की तकनीकी खासियत और खतरे का गणित
हांगकांग पहुंचे साजोसामान में विमान का पारदर्शी कॉकपिट कैनोपी मुख्य रूप से शामिल बताया गया है। देखने में यह केवल एक मजबूत शीशे जैसा आवरण प्रतीत होता है, मगर रक्षा विज्ञान के लिहाज से यह विमान को रडार की पकड़ से ओझल रखने वाली रीढ़ है। इस शीशे के ऊपर रडार तरंगों को सोखने वाले अत्यंत सूक्ष्म रासायनिक तत्वों की एक खास परत चढ़ाई जाती है। यही परत किसी भी विरोधी वायु रक्षा तंत्र को विमान की सही स्थिति भांपने से रोकती है। लंबे समय तक अत्यधिक दबाव और मौसमी परिस्थितियों में उड़ान भरने के कारण समय बीतने पर इस परत की मारक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है, जिसके चलते इसे गहन रखरखाव अथवा बदलाव के लिए भेजा जाता है। यदि यह वास्तविक उपकरण किसी प्रतिद्वंद्वी शक्ति के तकनीकी विशेषज्ञों के हाथ लग जाए, तो वे इसे रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए परख सकते हैं।
सैन्य उड्डयन विशेषज्ञ और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के पूर्व स्टाफ सदस्य जे.जे. गर्टलर ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि जासूसी के आंकड़ों को पुख्ता करने में ऐसा सामान मददगार साबित हो सकता है। जे.जे. गर्टलर ने कहा,
"अगर किसी के पास पहले से इस पार्ट की कुछ जानकारी है, तो असली पार्ट मिलने से वह जानकारी को जांचने और ज्यादा सटीक बनाने में मदद मिल सकती है।"यद्यपि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात का कोई अंतिम प्रमाण नहीं है कि यह टुकड़ा चीनी तंत्र के हाथ में जा चुका है, फिर भी ऐसी सामग्री का वहां पहुंचना अपने आप में एक बड़ा रणनीतिक जोखिम माना जा रहा है।
हांगकांग में मौजूदगी क्यों बनी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द
हांगकांग भौगोलिक और राजनीतिक तौर पर चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है, जहां पिछले कुछ सालों में बीजिंग के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का व्यापक प्रभाव स्थापित हो चुका है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर के पुर्जे का उतरना सीधे तौर पर अमेरिकी सामरिक बढ़त के लिए खतरे की घंटी है। पहले भी ऐसी चिंताएं जताई जाती रही हैं कि यदि यह तकनीक अनपेक्षित रास्तों से बाहर निकली, तो इसका सीधा फायदा प्रतिस्पर्धी ताकतों को मिलेगा, जैसा कि पूर्व में सऊदी अरब को बिक्री की संभावित चर्चाओं के दौरान भी रेखांकित किया गया था। इस ताजा घटनाक्रम पर चीनी दूतावास ने किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है, जबकि अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक स्तर पर कोई भी बयान देने से साफ मना कर दिया है।
कैपिटल हिल में बंद कमरों की बैठकों का दौर
यह पूरा मामला महीनों तक गुप्त रखा गया था और आम जनता के सामने नहीं आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश विभाग और रक्षा मुख्यालय के शीर्ष अधिकारी जून महीने से ही अमेरिकी संसद भवन यानी कैपिटल हिल में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी समितियों के प्रमुख सहयोगियों को लगातार स्थिति से अवगत करा रहे हैं। संवेदनशील जानकारियों के आदान-प्रदान का यह क्रम आने वाले समय में और तेज होने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले पर F-35 ज्वाइंट प्रोग्राम ऑफिस ने स्वीकार किया है कि अनुपयोगी पुर्जों के परिवहन के दौरान यह बाधा उत्पन्न हुई थी। विभाग अब औद्योगिक साझीदारों और खुफिया तंत्र के साथ मिलकर इस खोए हुए साजोसामान की बरामदगी, मार्ग भटकने की गहन जांच और भविष्य में ऐसी चूकों को रोकने की सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने में जुटा हुआ है। यह ढुलाई मुख्य निर्माता लॉकहीड मार्टिन के निर्देश पर काम करने वाली एक स्वतंत्र लॉजिस्टिक्स कंपनी के जिम्मे थी।
निगरानी तंत्र पर उठते गंभीर सवाल और पुराना रिकॉर्ड
यह संकट केवल एक शिपमेंट के गायब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विशाल रक्षा आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को भी बेनकाब करता है। वर्ष 2023 में जारी की गई गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की एक विस्तृत रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि महज पांच वर्षों की समयावधि में F-35 कार्यक्रम के 10 लाख से अधिक कलपुर्जे रिकॉर्ड से गायब दर्ज किए गए थे। उस जांच में स्पष्ट कहा गया था कि करोड़ों डॉलर मूल्य के इन साजोसामान के नुकसान की जवाबदेही तय करने में पेंटागन इसलिए नाकाम रहा, क्योंकि इन तमाम पुर्जों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग का पूरा नियंत्रण निजी ठेकेदार लॉकहीड मार्टिन के हाथों में था। सरकारी निगरानी प्रणाली के पास ऐसा कोई केंद्रीय डेटाबेस मौजूद नहीं है जो हर समय यह बता सके कि कौन सा पुर्जा दुनिया के किस कोने में पड़ा है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।



















