देश की राजधानी में चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता को केंद्र में रखकर विपक्षी गठबंधन ने एक व्यापक जनआंदोलन की रूपरेखा जमीन पर उतारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तौर-तरीकों पर तीखे सवाल उठाते हुए कई राजनीतिक दल एक साझा मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। इस शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है।
शीर्ष नेताओं का काफिला और खुली गाड़ियों में मार्च
कार्यक्रम के तय समय चक्र के अनुसार विभिन्न दलों के सांसदों का जमावड़ा सुबह लगभग 11 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में तय किया गया है। वहीं गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के शीर्ष दिग्गज कांग्रेस अध्यक्ष के 10 राजाजी मार्ग स्थित सरकारी निवास पर रणनीति साझा करने पहुंचे। तय योजना के तहत यह काफिला पूर्वाह्न 11:45 बजे आवास से रवाना होने का कार्यक्रम तय हुआ। वरिष्ठ हस्तियों को जनता से रूबरू कराने के लिए खुली गाड़ियों का प्रबंध किया गया है, जिसके बाद दोपहर करीब 12 बजे मिंटो ब्रिज के इलाके से मार्च आगे बढ़ेगा।
मैदान की व्यवस्थाएं और बारिश का असर
आयोजन के लिए तय ऐतिहासिक मैदान में सुबह 5:30 बजे से ही दूरदराज के इलाकों से कार्यकर्ता पहुंचने लगे थे। यद्यपि मैदान में बैठने के लिए बड़ी संख्या में कुर्सियां बिछाई गई हैं, किंतु पिछले दिनों की बारिश के चलते कुछ हिस्सों में अब भी कीचड़ और ठहरा हुआ जल परेशानी का सबब बना हुआ है। आयोजकों ने निकासी के साधन लगाए, फिर भी मैदान को पूरी तरह सूखा नहीं किया जा सका। इसी जलभराव के चलते पहले तय की गई एक प्रतीकात्मक संसद की गतिविधि को भी एक दिन के लिए आगे खिसकाना पड़ा था। प्रशासनिक दिशानिर्देशों के तहत कार्यक्रम को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की समय सीमा में समेटना अनिवार्य किया गया है, तथा रात के समय वहां रुकने की सख्त मनाही है।
सुरक्षा का अभेद्य पहरा और प्रशासनिक निगरानी
सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक शांति और आवागमन बनाए रखने के लिए विस्तृत रणनीति अपनाई गई है। पूरे इलाके में 200 से 250 क्लोज-सर्किट कैमरों का जाल बिछाया गया है, जिससे प्रवेश मार्गों और भीड़ के हर हिस्से पर पैनी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बल ड्रोन कैमरों और वर्दी पर लगे कैमरों से भी लैस हैं। मैदान के कुल आठ फाटकों में से आम जनता के प्रवेश के लिए मात्र तीन गेट निर्धारित किए गए हैं, जबकि वीआईपी और पुलिस अधिकारियों के लिए पृथक मार्ग रखे गए हैं। मैदान के भीतर प्रवेश से पहले प्रत्येक व्यक्ति को दोहरे सुरक्षा घेरे से गुजरना होगा, जिसमें मेटल डिटेक्टर और सामान की गहन पड़ताल शामिल है।
सुरक्षा व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए मैदान में अलग-अलग हिस्से बनाए गए हैं, जहां पुलिसकर्मी तैनात हैं। डीसीपी रोहित राजबीर ने कहा कि आयोजकों ने स्वयं का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है और पूरा तंत्र मिलकर काम कर रहा है। इसके साथ ही सेवा दल, नागरिक सुरक्षा और स्थानीय आवासीय कल्याण संघों के स्वयंसेवक भी यातायात व भीड़ प्रबंधन में पुलिस का हाथ बंटा रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि घेराबंदी और रास्तों के कारण मैदान में 30 से 40 हजार लोग समा सकेंगे, हालांकि खाली मैदान की क्षमता 45 से 50 हजार तक आंकी जाती है।
रास्तों की नाकेबंदी और पंजाब से आने वालों की दिक्कतें
दूरदराज से वाहनों में सवार होकर आ रहे लोगों को अंतरराज्यीय सीमाओं पर खासी मशक्कत करनी पड़ी। पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे काफिलों को हरियाणा सीमा पर लगाई गई बैरिकेडिंग के कारण घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। फिरोजपुर के निवासी बलजिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब-हरियाणा कॉरिडोर पर बैरिकेडिंग के चलते हजारों वाहन रातभर फंसे रहे। मार्गों के अवरुद्ध होने से कई समर्थकों को समय पर पहुंचने में बड़ी देरी का सामना करना पड़ा।
चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची पर बढ़ता विवाद
इस पूरे जनविरोध की जड़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। विपक्षी खेमे का यह गंभीर आरोप है कि इस प्रशासनिक प्रक्रिया के बहाने वास्तविक और वैध नागरिकों के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर काटे जा रहे हैं। इसी कारण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई जा रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पूर्व में आयोजित प्रतीकात्मक संसद का एक दृश्य साझा करते हुए निर्वाचन आयोग के नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा और पर्याप्त प्रमाण होने की बात कही। दूसरी तरफ चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि केवल दिवंगत और स्थान बदल चुके व्यक्तियों के नाम ही हटाए जा रहे हैं।
व्यापारियों की चिंता और राहुल गांधी का संदेश
राजधानी के व्यावसायिक केंद्रों, जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग और चावड़ी बाजार में कारोबार प्रभावित होने की आशंका पहले उठाई गई थी। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने वाहनों के दबाव से बिक्री गिरने और जाम लगने का डर जताते हुए तिथि अथवा स्थान बदलने की मांग रखी थी। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और व्यापारिक गतिविधियां एक साथ चल सकती हैं। उन्होंने त्योहारों के मौसम में बाहर से आने वाले लोगों से अपील की कि वे स्थानीय दुकानों से सामान खरीदकर छोटे व्यापारियों की मदद करें, ताकि कारोबार को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
सत्ता पक्ष का पलटवार: पदयात्रा और तीखे आरोप
इस विशाल आयोजन के जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने भी समानांतर राजनीतिक अभियान छेड़ दिया है। हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने इस विरोध को संवैधानिक संस्थाओं का अनादर करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन देश के भीतर अस्थिरता और भ्रम का माहौल तैयार कर रहा है। इसी के साथ उन्होंने 1 नवंबर को हरियाणा दिवस के अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्य आगमन की जानकारी भी दी।
दूसरी ओर दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार किया और कहा कि 1984 के वो जख्म आज भी हमारे दिलों में ताजा हैं। सिरसा ने हरिनगर डिपो से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का आह्वान करते हुए इसे पीड़ित परिवारों के प्रति सम्मान बताया।
अन्य दलों का रुख और नागरिक समाज की भागीदारी
इस आंदोलन में न केवल राजनीतिक दल बल्कि सामाजिक संगठन और नागरिक मंच भी अपनी आवाज जोड़ रहे हैं। वहीं कुछ दलों ने सतर्क रुख अपनाया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस कार्यक्रम का समर्थन करती है, लेकिन एक निष्पक्ष और स्वतंत्र मंच की छवि बनाए रखने के उद्देश्य से वह व्यक्तिगत रूप से मैदान में शामिल नहीं होगी।



















