वर्ष 2018 में राजस्थान की सीमा में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना के मामले में दिल्ली स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले एक ट्रक चालक के पीड़ित परिवार को 14.49 लाख रुपये से अधिक का कुल मुआवजा अदा करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी विजय कुमार झा ने मामले से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह स्पष्ट किया कि दुर्घटना पूरी तरह से ट्रेलर चालक की अनियंत्रित गति और लापरवाही का नतीजा थी। इस प्रकरण में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि जिस ट्रेलर से टक्कर हुई थी, उसका बीमा दस्तावेज फर्जी पाया गया, जिसके चलते ट्रिब्यूनल ने संबंधित बीमा कंपनी को किसी भी प्रकार की वित्तीय देनदारी से पूरी तरह बरी कर दिया और मुआवजे का समूचा भार ट्रेलर के पंजीकृत मालिक और उसके चालक के कंधों पर डाल दिया।
जयपुर-दिल्ली मार्ग पर आधी रात को हुई थी घातक भिड़ंत
यह दुखद घटनाक्रम 20 अक्टूबर 2018 का है, जब ट्रक चालक पूरन मल आवश्यक माल से लदे एक आइशर कैंटर ट्रक को सुरक्षित रूप से जयपुर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की दिशा में ले जा रहे थे। जब उनका वाहन रात के लगभग 2 बजे मनोहरपुर पुलिया के समीप स्थित सरस्वती कॉलेज के आसपास पहुंचा, तभी एक भारी ट्रेलर के साथ उनकी भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कैंटर के परखच्चे उड़ गए और चालक पूरन मल को शरीर के कई हिस्सों में जानलेवा चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल पूरन मल ने दुर्घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। इसके पश्चात मृतक चालक के असहाय परिजनों ने न्याय और आर्थिक संबल पाने के लिए न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और क्षतिपूर्ति याचिका दायर की।
ट्रेलर चालक की लापरवाही और अदालत में गैरहाजिरी पड़ी भारी
पीठासीन अधिकारी विजय कुमार झा की अदालत ने 28 अक्टूबर को जारी अपने विस्तृत आदेश में याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत दलीलों और पुलिस रिकॉर्ड को पूरी तरह से स्वीकार किया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहियों से यह निर्विवाद रूप से साबित होता है कि पूरन मल की मौत सामने से आ रहे ट्रेलर के चालक द्वारा अंधाधुंध गति और घोर लापरवाही से वाहन चलाने के चलते हुई थी। न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी की उस दलील को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें यह आरोप लगाने की कोशिश की गई थी कि हादसे में मृतक ट्रक चालक की भी आंशिक गलती या लापरवाही शामिल थी। ट्रिब्यूनल ने रेखांकित किया कि बीमा कंपनी अपनी इस थ्योरी के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य अदालत के सामने नहीं रख सकी।
बीमा कंपनी के तर्कों में साक्ष्यों का अभाव
न्यायाधिकरण ने इस बात पर कड़ा संज्ञान लिया कि बीमा कंपनी यह सिद्ध करने में पूरी तरह नाकाम रही कि टक्कर के क्षण दोनों वाहनों के बीच वास्तविक फासला कितना था अथवा दोनों वाहनों की सटीक गति क्या थी। इसके अतिरिक्त घटना के वक्त मार्ग की वास्तविक चौड़ाई कितनी थी, ट्रेलर की टेल लाइटें जल रही थीं या नहीं, और क्या ब्रेक लाइटें चालू हालत में थीं, इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बीमा कंपनी कोई तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई। अदालत ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि आरोपी ट्रेलर चालक स्वयं अदालत में पेश होकर अपना बयान दर्ज कराने या गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा सका। जब कोई पक्षकार सच्चाई सामने रखने के लिए अदालत में नहीं आता, तो कानूनन उसके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाता है। अदालत ने स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि मृतक चालक की ओर से लापरवाही का कोई भी संकेत या प्रमाण नहीं मिला है।
फर्जी पॉलिसी के चलते मालिक और चालक को खुद भुगतना होगा हर्जाना
कार्यवाही के दौरान जांच में जब ट्रेलर की बीमा पॉलिसी का सत्यापन किया गया, तो यह बात पुख्ता हो गई कि प्रस्तुत किया गया बीमा दस्तावेज पूरी तरह से जाली और फर्जी था। वाहन का वास्तविक पंजीकृत मालिक भी अदालत में कोई वैध मूल पॉलिसी, प्रीमियम भुगतान की आधिकारिक रसीद या ऐसा कोई अन्य कानूनी साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा, जिससे यह साबित हो सके कि 20 अक्टूबर 2018 को दुर्घटना के दिन वाहन का कोई वैध और प्रभावी बीमा कवर मौजूद था। धोखाधड़ी से तैयार दस्तावेज सामने आने के बाद अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त कर दिया। न्यायाधिकरण ने पूरन मल के आश्रितों के पक्ष में 9.82 लाख रुपये की मूल क्षतिपूर्ति राशि तय की है, जिस पर याचिका दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देय होगा। ब्याज को जोड़ने के बाद यह कुल राशि 14.49 लाख रुपये से अधिक बनती है। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रेलर चालक और उसके पंजीकृत मालिक को संयुक्त और अलग-अलग रूप से इस संपूर्ण धनराशि का भुगतान पीड़ित परिवार को करने का कानूनी आदेश जारी किया है।



















