राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता को गंभीर स्थिति में पहुंचने से पहले संभालने के लिए प्रशासन ने सक्रिय कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार के दिन राजधानी की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज हुई थी, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 129 पर रहा। हवा की इस स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को मंजूरी देकर इसकी पाबंदियां समय से पहले ही लागू कर दी हैं। अब प्रशासन प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर ही आवश्यक प्रतिबंध सक्रिय कर दिए जाएंगे।
शीतकालीन कार्ययोजना और चरणबद्ध व्यवस्था
प्रशासन की इस नई रणनीति के तहत प्रतिबंधों को अलग-अलग चरणों में 1 अक्टूबर और 1 नवंबर से धरातल पर उतारा जा रहा है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हवा की स्थिति बिगड़ने से पहले ही रोकथाम हो सके और विभिन्न चरणों के अचानक बदलने से आम जनता के बीच किसी तरह का संशय न फैले। दिल्ली सरकार की विंटर एक्शन प्लान और ग्रैप की यह व्यवस्था एक साथ समानांतर रूप से चलेगी। पूरे विंटर सीजन के दौरान 1 अक्टूबर से लेकर 28 फरवरी तक कई तरह की सामान्य गतिविधियों पर निगरानी और रोक रहेगी, जबकि सबसे कड़े प्रतिबंध 1 नवंबर से 31 जनवरी की अवधि के दौरान लागू रहेंगे।
वाहनों के लिए सख्त नियम और भारी जुर्माना
सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों के लिए कई तात्कालिक और दूरगामी नियम तय किए गए हैं। बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र यानी पीयूसीसी के वाहन चलाने वालों पर 10,000 रुपये तक का भारी चालान किया जा सकता है। इसके साथ ही एक अक्टूबर से पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पेट्रोल पंपों पर बिना वैध पीयूसीसी वाली गाड़ियों में ईंधन भरने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
सर्दियों के चरम दौर में यानी 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बीएस-IV अथवा उससे पुराने मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों के संचालन पर रोक रहेगी। इस दौरान केवल बीएस-VI मानक वाले इंजन, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त डीजल जनरेटरों के अनधिकृत उपयोग पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है और निर्माण या तोड़फोड़ वाले स्थलों पर धूल नियंत्रण के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य बना दिया गया है।
भविष्य में वाहनों के पंजीकरण और फ्लीट में बदलाव
आने वाले वर्षों में वाहनों के प्रदूषण को जड़ से खत्म करने के लिए एक विस्तृत समय-सारिणी तय की गई है। 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाले वाहनों के मामले में 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में पेट्रोल, डीजल या सीएनजी चालित नए वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद हो जाएगा। यही नियम गुरुग्राम और नोएडा में 1 जुलाई 2027 से लागू कर दिया जाएगा।
मध्यम श्रेणी के 3,500 किलोग्राम से 7,500 किलोग्राम वजन वाले वाहनों में आगे चलकर केवल इलेक्ट्रिक मॉडलों का ही नया पंजीकरण होगा। यह अनिवार्यता गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और नोएडा में 1 जुलाई 2028 से तथा शेष एनसीआर में 1 जनवरी 2029 से प्रभावी होगी। ऑटो रिक्शा के मामले में भी दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से केवल ई-ऑटो का ही पंजीकरण होगा, जबकि प्रमुख 5 एनसीआर जिलों में 1 जनवरी 2028 से और बाकी एनसीआर में 1 जनवरी 2029 से यह नियम लागू होगा।
सवारी ढोने वाली कैब सेवाओं और ई-कॉमर्स डिलीवरी कंपनियों के बेड़े में 1 जनवरी 2027 के बाद से कोई भी पारंपरिक पेट्रोल या डीजल वाहन जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में 1 अप्रैल 2028 के बाद से सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का ही नया पंजीकरण किया जाएगा।
मालवाहक गाड़ियां और सार्वजनिक बस सेवाएं
सड़क मार्ग से माल की ढुलाई करने वाले वाहनों के लिए भी रूपरेखा स्पष्ट कर दी गई है। 1 नवंबर 2025 से दिल्ली में केवल सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक मालवाहकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है, हालांकि बीएस-IV मालवाहक वाहनों को 31 अक्टूबर 2026 तक सीमित छूट प्राप्त है।
यात्री परिवहन को स्वच्छ बनाने के लिए 11 नवंबर 2026 से दिल्ली की सीमाओं के बाहर से आने वाली बसों में केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और बीएस-VI बसों को ही प्रवेश मिलेगा, जबकि दिल्ली में पहले से पंजीकृत बसों को इसमें छूट रहेगी। इसके अलावा दिल्ली परिवहन निगम और दिल्ली सरकार का परिवहन विभाग भविष्य में इंट्रा-स्टेट यानी राज्य के भीतर चलने वाली बसों के रूप में केवल इलेक्ट्रिक बसों की ही नई खरीद करेगा।



















